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Monday, 12 January, 2026
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भारत में GI टैग की लहर लाने वाला शख्स—नाम है रजनी कांत

वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता रजनी कांत, 2030 तक 10,000 जीआई टैग हासिल करने के मोदी सरकार के मिशन में एक अग्रणी प्रकाश स्तंभ हैं. यह भारत को फिर से 'सोने की चिड़िया' बनाने का उनका तरीका है.

विदेशी रोज़गार का बदल रहा है नक्शा, भारतीय मज़दूर अब रूस, ग्रीस और जापान में बना रहे नया भविष्य

भारतीय मज़दूर अब दुनिया के नए कोनों में ब्लू-कॉलर जॉब्स की कमी को पूरा कर रहे हैं. सरकारी नीतियां और रिक्रूटर्स का बढ़ता नेटवर्क इसे और आसान बना रहा है.

तोड़ने नहीं खोज करने वाला: वाराणसी के शाही परिवार ने कैसे ‘ब्रिटिश इतिहास’ के खिलाफ लड़ाई लड़ी

एक गलत औपनिवेशिक चित्रण ने बनारस के राजघराने पर 200 साल तक कलंक लगाया. प्रदीप नारायण सिंह ने सारनाथ में अपने पूर्वज जगत सिंह की सही छवि करवाने के लिए 5 साल तक अभिलेखों की छानबीन की.

जानिए, बिहार की जीविका दीदियों ने सरकार से मिले 10,000 रुपये कैसे खर्च किए

जीविका मिशन के 1.25 करोड़ सदस्यों में से एक करोड़ को 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. नालंदा ज़िले के लाभार्थी इस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, यहां पढ़ें.

‘हम भारत बनाते हैं, बिहार कौन बनाएगा?’ —छठ स्पेशल ट्रेन में सवार प्रवासियों की उदासी का सफर

यह बिहार का छठ महापर्व ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार—चुनाव—भी है. यह एक अहम पल है.

कैसे नेशनल म्यूजियम में एक ब्रिटिश शख्स के दौरे ने उपनिवेशवाद पर बहस छेड़ दी

नेशनल म्यूजियम के एक अधिकारी ने कहा कि भले ही भारत की कई कलाकृतियां दूसरे देशों में प्रदर्शित की जाती हैं, लेकिन दुनिया जानती है कि वे वास्तव में किसकी हैं.

सॉफ्ट बनो, ज़्यादा मुस्कुराओ, कभी पहले मैसेज मत करो—पुरुषों की नई दीवानगी है ‘फेमिनिन एनर्जी’

बिना सर्टिफिकेट वाले डेटिंग गुरू महिलाओं को सिखा रहे हैं कि उन्हें संकेतात्मक, रहस्यमयी और कभी फास्ट नहीं होना चाहिए. हमारे जैसी कुछ महिलाओं के लिए ये नाटक करना नामुमकिन है. बेहतर है हम हार मान लें और ब्रह्मा कुमारी बन जाएं.

कहां गया खजाना? वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के तोशखाने पर क्यों हो रहा विवाद

54 साल बाद जब खजाने का कमरा खोला गया, तो सामने आया सिर्फ मामूली सामान, उस विशाल सोने के खजाने की उम्मीद नहीं.

एयर जॉर्डन पीछे छूट गए, भारत में अब अपना स्नीकर्स सबकल्चर है—कोमेट, अनार, ज़ायडन, 7-10

हिंदी अक्षरों से लेकर टैश डिज़ाइन और कलाकारों के सहयोग तक, भारतीय ब्रांड भारत की अपनी स्नीकर कहानी गढ़ रहे हैं. "भारतीय ब्रांडों ने लोगों से ज़्यादा पैसे वसूलने की संस्कृति और आकांक्षा का निर्माण किया है."

दिल की बीमारी का इलाज आज भी ट्रायल और एरर पर निर्भर है. कैसे एक स्टार्ट-अप इसे बदलना चाहता है

भारत-विशिष्ट कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ डेटाबेस यह पता लगाने में मदद करेगा कि किसी व्यक्ति को भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा है या नहीं. इससे इलाज और दवा अधिक सटीक तरीके से दी जा सकेगी.

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ट्रंप 1991 के बाद अमेरिका की बनाई दुनिया को बिखेर रहे हैं. वह दूसरी महाशक्ति को स्वीकार नहीं करते

मल्टीपोलैरिटी की तमाम बातों के बावजूद, डॉनल्ड ट्रंप जानते हैं कि दुनिया अभी भी यूनिपोलर है और वे बिना किसी दिखावे के अपनी ताकत दिखा रहे हैं.

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.