वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता रजनी कांत, 2030 तक 10,000 जीआई टैग हासिल करने के मोदी सरकार के मिशन में एक अग्रणी प्रकाश स्तंभ हैं. यह भारत को फिर से 'सोने की चिड़िया' बनाने का उनका तरीका है.
भारतीय मज़दूर अब दुनिया के नए कोनों में ब्लू-कॉलर जॉब्स की कमी को पूरा कर रहे हैं. सरकारी नीतियां और रिक्रूटर्स का बढ़ता नेटवर्क इसे और आसान बना रहा है.
एक गलत औपनिवेशिक चित्रण ने बनारस के राजघराने पर 200 साल तक कलंक लगाया. प्रदीप नारायण सिंह ने सारनाथ में अपने पूर्वज जगत सिंह की सही छवि करवाने के लिए 5 साल तक अभिलेखों की छानबीन की.
जीविका मिशन के 1.25 करोड़ सदस्यों में से एक करोड़ को 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. नालंदा ज़िले के लाभार्थी इस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, यहां पढ़ें.
नेशनल म्यूजियम के एक अधिकारी ने कहा कि भले ही भारत की कई कलाकृतियां दूसरे देशों में प्रदर्शित की जाती हैं, लेकिन दुनिया जानती है कि वे वास्तव में किसकी हैं.
बिना सर्टिफिकेट वाले डेटिंग गुरू महिलाओं को सिखा रहे हैं कि उन्हें संकेतात्मक, रहस्यमयी और कभी फास्ट नहीं होना चाहिए. हमारे जैसी कुछ महिलाओं के लिए ये नाटक करना नामुमकिन है. बेहतर है हम हार मान लें और ब्रह्मा कुमारी बन जाएं.
हिंदी अक्षरों से लेकर टैश डिज़ाइन और कलाकारों के सहयोग तक, भारतीय ब्रांड भारत की अपनी स्नीकर कहानी गढ़ रहे हैं. "भारतीय ब्रांडों ने लोगों से ज़्यादा पैसे वसूलने की संस्कृति और आकांक्षा का निर्माण किया है."
भारत-विशिष्ट कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ डेटाबेस यह पता लगाने में मदद करेगा कि किसी व्यक्ति को भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा है या नहीं. इससे इलाज और दवा अधिक सटीक तरीके से दी जा सकेगी.