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Monday, 12 January, 2026
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उत्तराखंड में ‘पहाड़ बनाम मैदान’ बहस फिर उभरी — स्वास्थ्य ढांचे पर 25 साल का गुस्सा सड़कों पर

मशाल मार्च, रोज़ाना धरने और पीएम नरेंद्र मोदी को खून से लिखे खत — उत्तराखंड के पहाड़ी ज़िले अपने स्वास्थ्य अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं.

सहारा साम्राज्य में अब क्या बचा? भूतिया कस्बे, कबाड़ होती कारें, खाली स्विमिंग पूल

बंद गेट, महीनों से तनख्वाह न पाए कर्मचारी और धीमी बर्बादी — यही है सहारा की कभी चमकती शान, एंबी वैली से सहारा स्टार तक. अडाणी को होने वाली डिस्टेस सेल से थोड़ी उम्मीद दिखी — ‘उनके पास पैसा है.’

अखलाक लिंचिंग के 10 साल बाद—गांव में राजनीति भी बदली, खेल के मैदान भी

अखलाक केस कभी भी बिसाड़ा गांव की तंग गलियों से बाहर नहीं गया. यहां उसकी हत्या और बीफ की अफवाहों की बातें आज भी ताज़ा हैं, लेकिन किसी को भी नहीं पता कि जांच कहां पहुंची है.

कैसी है सिंगल महिलाओं के लिए दिल्ली — RWA के अनकहे नियम से लेकर अपने घर तक का सफर

सजाए-संवारे लॉन और सिक्योरिटी गेट्स के पीछे, RWAs चुपचाप तय कर रही हैं कि शहर और उनके सोसाइटियों में किसे ‘सभ्य महिला’ माना जाए.

तीस्ता की त्रासदी: बांधों और अतिक्रमण ने कैसे भड़काई बाढ़ की विनाशलीला

लेपचा शादियों के गीतों में अब भी गाई जाती है तीस्ता की प्रेम कहानी, लेकिन अब यह नदी अपने गुस्से के लिए भी जानी जाती है. जो कहानी बर्फ के पिघलने से शुरू हुई थी, उसे बांधों और अतिक्रमण ने और भी भयावह बना दिया है.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स में डर — ‘हो सकता है कोई और इसमें शामिल व्यक्ति अब भी अंदर हो’

यूनिवर्सिटी में काम करने वाले एक डॉक्टर ने कहा, ‘अभी एडमिशन का टाइम है, अगर यूनिवर्सिटी की छवि खराब हुई तो एडमिशन पर असर पड़ेगा. हम जांच एजेंसियों की मदद कर रहे हैं.’

मेट्रो की बजाय रोपवे: क्या ट्रैफिक से निजात पाएगा वाराणसी

800 करोड़ रुपये का वाराणसी रोपवे उन शहरों के लिए एक नेशनल टेस्ट केस बन गया है, जहां मेट्रो संभव नहीं — ताकि ट्रैफिक की समस्या को हल किया जा सके.

कैसे ‘मोहब्बत की नदी’ से चिनाब बन गई बेचैन टिक-टिक करता टाइम बम

चिनाब नदी के किनारे रहने वाले 23 साल के एक युवक ने कहा, ‘अगर हम इसकी धार को यूं ही समेटते रहे, तो ये ज़रूर हमारे घरों में घुस आएगी. इसे गुस्सैल नदी कैसे कह सकते हैं, इसमें नदी की गलती तो नहीं है.’

‘मुश्किल वक्त चल रहा है’ — अल-फलाह यूनिवर्सिटी के हेडक्वार्टर में अब पहले से ज्यादा भीड़

यह दफ्तर आमतौर पर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक और दस्तावेज़ी काम संभालता है. छात्र यहां एडमिशन, फीस जमा करने या सामान्य जानकारी लेने आते हैं.

अमलानंद घोष: आर्कियोलॉजी के सबसे अनदेखे नायक जिसने आज़ादी के बाद ASI की बदली दिशा

किताब इंडियन आर्कियोलॉजी आफ्टर इंडिपेंडेंस इस धारणा को चुनौती देती है कि यह संस्था मुख्य रूप से हड़प्पा स्थलों की खोज में ही लगी रही.

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पटना हवाई अड्डे में सुरक्षा जांच के दौरान बेहोश होकर गिरने के बाद महिला की मौत

पटना, 11 जनवरी (भाषा) मुंबई जा रही एक महिला यात्री की पटना हवाई अड्डे पर रविवार को सुरक्षा जांच के दौरान बेहोश होकर गिरने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.