बंद गेट, महीनों से तनख्वाह न पाए कर्मचारी और धीमी बर्बादी — यही है सहारा की कभी चमकती शान, एंबी वैली से सहारा स्टार तक. अडाणी को होने वाली डिस्टेस सेल से थोड़ी उम्मीद दिखी — ‘उनके पास पैसा है.’
अखलाक केस कभी भी बिसाड़ा गांव की तंग गलियों से बाहर नहीं गया. यहां उसकी हत्या और बीफ की अफवाहों की बातें आज भी ताज़ा हैं, लेकिन किसी को भी नहीं पता कि जांच कहां पहुंची है.
लेपचा शादियों के गीतों में अब भी गाई जाती है तीस्ता की प्रेम कहानी, लेकिन अब यह नदी अपने गुस्से के लिए भी जानी जाती है. जो कहानी बर्फ के पिघलने से शुरू हुई थी, उसे बांधों और अतिक्रमण ने और भी भयावह बना दिया है.
यूनिवर्सिटी में काम करने वाले एक डॉक्टर ने कहा, ‘अभी एडमिशन का टाइम है, अगर यूनिवर्सिटी की छवि खराब हुई तो एडमिशन पर असर पड़ेगा. हम जांच एजेंसियों की मदद कर रहे हैं.’
चिनाब नदी के किनारे रहने वाले 23 साल के एक युवक ने कहा, ‘अगर हम इसकी धार को यूं ही समेटते रहे, तो ये ज़रूर हमारे घरों में घुस आएगी. इसे गुस्सैल नदी कैसे कह सकते हैं, इसमें नदी की गलती तो नहीं है.’
यह घटना एक असहज लेकिन संवैधानिक रूप से सामान्य बात को सामने लाती है: जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. उनकी सुरक्षा क्षेत्रीय है, न कि "सभ्यतागत."