20 साल की नीतीश सरकार के बाद भी, बिहार देश का सबसे कमज़ोर परफॉर्मेंस देने वाला राज्य बना हुआ है. स्वास्थ्य और शिक्षा में भारी बजट बढ़ोतरी के बावजूद रैंकिंग सबसे नीचे है.
मधुमक्खियों की संख्या कम होने की वजह से कई राज्यों के किसान अब इन ज़रूरी पॉलिनेटर्स के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं. वे छत्ते किराए पर ले रहे हैं, हाथों से पॉलिनेशन कर रहे हैं और अपनी खेती के तरीके भी बदल रहे हैं.
छात्रों को यह मामला एक वीडियो क्लिप से पता चला जिसमें कार्यकर्ता और सफाईकर्मी असिस्टेंट रजिस्ट्रार से सवाल कर रहे थे, लेकिन यह संदेश किसी बातचीत की वजह नहीं बना.
वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता रजनी कांत, 2030 तक 10,000 जीआई टैग हासिल करने के मोदी सरकार के मिशन में एक अग्रणी प्रकाश स्तंभ हैं. यह भारत को फिर से 'सोने की चिड़िया' बनाने का उनका तरीका है.
भारतीय मज़दूर अब दुनिया के नए कोनों में ब्लू-कॉलर जॉब्स की कमी को पूरा कर रहे हैं. सरकारी नीतियां और रिक्रूटर्स का बढ़ता नेटवर्क इसे और आसान बना रहा है.
एक गलत औपनिवेशिक चित्रण ने बनारस के राजघराने पर 200 साल तक कलंक लगाया. प्रदीप नारायण सिंह ने सारनाथ में अपने पूर्वज जगत सिंह की सही छवि करवाने के लिए 5 साल तक अभिलेखों की छानबीन की.
जीविका मिशन के 1.25 करोड़ सदस्यों में से एक करोड़ को 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. नालंदा ज़िले के लाभार्थी इस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, यहां पढ़ें.
नेशनल म्यूजियम के एक अधिकारी ने कहा कि भले ही भारत की कई कलाकृतियां दूसरे देशों में प्रदर्शित की जाती हैं, लेकिन दुनिया जानती है कि वे वास्तव में किसकी हैं.
अगर राहुल गांधी इतने ही बेकार हैं कि वे इस सरकार के लिए एक 'एसेट' और विपक्ष के लिए एक 'लायबिलिटी' की तरह काम करते हैं, तो फिर सरकार उन्हें ख़बरों में बनाए रखने के लिए इतनी ज़ोर-शोर से कोशिश क्यों कर रही है?