जिस दिन केस फिर से खुला, उनके पिता शंभूनाथ ने पुरानी सारी फाइलें, पीले पड़ चुके अखबारों की कतरनें और सालों से जमा किए गए दस्तावेज़ फिर से खंगाले. उस रात वे सो नहीं पाए.
वरिष्ठ बुना-बुनाई श्रमिकों ने 2008 की आर्थिक मंदी, जीएसटी लागू होने और कोविड-19 जैसे पिछले संकटों को याद किया. "हर बार, उद्योग ने खुद को ढाल लिया और हालात सामान्य हो गए."
जब जेन स्ट्रीट ने कथित बाजार हेरफेर के जरिए बड़ा मुनाफा कमाया, तो लखनऊ से लेकर रीवा और जलगांव तक छोटे शहरों के एफ एंड ओ कारोबारियों की पूंजी साफ हो गई.
कोचिंग संस्थान नियमों को नज़रअंदाज़ कर अपनी मनमानी रिफंड नीति अपनाते हैं. छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ दें, तब भी माता-पिता पूरी फीस भरते हैं. कुछ लोग यह नुकसान सह जाते हैं, तो कुछ कानूनी रास्ता अपनाते हैं.
अरावली के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाने का अभियान इस साल जून में शुरू हुआ. इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर की मशहूर फार्महाउस संस्कृति भी तेज़ी से खत्म हो रही है. अभी आगे और भी काम बाकी है.
जगह, पानी, साफ हवा और उपजाऊ मिट्टी की कमी से जूझती दिल्ली अब हज़ारों छोटे बागानों वाला शहर बनना चाहती है. शहरी माली अब फूल-पौधों से लेकर फल-सब्ज़ियां तक उगा रहे हैं.
दलित आईटी इंजीनियर कविन सेल्वगणेश की हत्या की परिस्थितियां तमिलनाडु में पहले भी देखे गए एक पैटर्न को दोहराती हैं. अब एक और परेशान करने वाला चलन सामने आ रहा है.
बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्या गलत हो गया है? कई मुख्यमंत्रियों की ढीली-ढाली सरकार इस सोच से निकलती है कि चुनावी जीत तीन ‘एम’ की वजह से मिली—मोदी, बहुसंख्यकवाद और पैसा.
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ (सीपीसी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय...