कर्नाटक के लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित आठ कैबिनेट मंत्री और भाजपा राज्यों के तीन मुख्यमंत्री शामिल हैं.
कर्नाटक में कांग्रेस भी सत्ता में लौटने के प्रयासों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है वहीं जनता दल (सेक्युलर) भी तीसरी ताकत के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी है.
कर्नाटक में पिछले चार चुनावों में भाजपा की जीती 80% से अधिक सीटें पर उसका कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला हुआ. भाजपा ने जेडीएस के खिलाफ अपने स्ट्राइक रेट को 2004 में 31.25% से बढ़ाकर 2018 में 65% पर पहुंचा दिया.
पार्टी ने 52 नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है. उनके मुताबिक 189 उम्मीदवारों की सूची में 32 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं जबकि 30 अनुसूचित जाति और 16 अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं.
2018 में कांग्रेस ने पांच हज़ार मतों के अंतर से 30 में से 18 सीटें जीतीं. वहीं, बीजेपी ने 8 और जेडी (एस) ने 3 सीटें जीतीं थीं. छोटे दलों की एंट्री और लिंगायत फैक्टर भी यहां हार-जीत में भूमिका तय कर सकते हैं.
AIMIM फिलहाल SDPI, KRPP, AAP जैसे कई अन्य छोटे दलों के उस गुट में शामिल होती दिखाई दे रही है, जिन्होंने इस बार चुनाव लड़ने का फैसला किया है. कांग्रेस विधायक ने माना कि छोटी पार्टियां तकरीबन 50 सीटों पर वोटों को बंटवा सकती हैं.
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