1962 के भारत-चीन युद्ध के कई महीने पहले भारत की एक फौजी प्लाटून चारों तरफ से घिर जाने के बावजूद गलवान चौकी पर डटी रही थी और चीनियों को करीब 200 मीटर पीछे हटना पड़ा था.
1962 में चीन ने भारत को धोखे में रखकर सीधे तौर पर पूर्ण युद्ध छेड़ दिया था. हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि चीन अब भारत को उस तरह हतप्रभ नहीं कर सकता क्योंकि सेना ने एलएसी के पास मौजूदगी बढ़ा ली है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शुक्रवार के लद्दाख दौरे की फोटो से, लड़ाई में बढ़त लेने के लिए, सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेज़ की, हाल की ख़रीदारियों का पता चलता है.
असॉल्ट राइफल्स मेक इन इंडिया पहल के तहत मध्य प्रदेश में, संयुक्त उपक्रम पीएलआर सिस्टम्स द्वारा बनाई जाएंगी, जो पहले से ही टेवर जैसे हथियार बना रहे हैं.
कोर कमांडर्स की मीटिंग का एजेंडा, इंडिया-चाइना वर्किंग मिकैनिज़्म फॉर कंसल्टेशन एंड को-ऑर्डिनेशन की मीटिंग के बाद तय किया जाएगा, जिसके शुक्रवार को होने की संभावना है.
जो हुआ है उसे स्वीकार करने में मोदी सरकार को झिझक नहीं होनी चाहिए. चीन के मुकाबले के लिए एक रणनीतिक संचार योजना की ज़रूरत है जोकि अपने कथानक को आगे बढ़ाता जा रहा है.
यह 400 किमी तक की सीमा के भीतर आने वाले प्रतिरोधी विमान, मिसाइल और यहां तक कि ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है. इसकी ट्रैकिंग क्षमता लगभग 600 किमी. है.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और भारत...