एलएसी पर बरक़रार गतिरोध के बीच, लद्दाख़ की कड़कड़ाती सर्दी में आगे की तैनाती बनाए रखने के लिए, भारत और चीन दोनों अपनी अपनी सैनिक टुकड़ियों की, अदला-बदली जारी रखे हुए हैं.
ले.जन. बीएस राजू का कहना है, कि सीधे मार देने की बजाय, सेना सरेंडर सुनिश्चित करने पर ज़्यादा काम कर रही है, चूंकि ‘हमें नौजवान लड़कों को मारने में कोई मज़ा नहीं आता, जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं’.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के 117 के मुकाबले 131 कश्मीरी युवा इस साल आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं. स्थानीय आंकड़े बताते हैं कि 2018 में यह संख्या 214 और 2017 में 128 थी.
5 अगस्त 2019 से जब नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया, तो यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया कि परिचालन के दौरान कोई भी नागरिक हताहत न हो.
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में रसद आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा और आकलन किया और इसमें नजर आई कई कमियों को सामने रखा.
भारत सोमवार को चीन के साथ होने वाली उच्च-स्तरीय सैन्य वार्ता के सातवें दौर में पूर्वी लद्दाख में टकराव के बिंदुओं से चीन द्वारा सैनिकों की पूरी तरह से जल्द वापसी पर जोर देगा.
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच पांच महीने तक गतिरोध के हालात बने रहे. इस बीच वायुसेना ने किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिहाज से क्षेत्र में महत्वपूर्ण तैनातियां की हैं.
चीन के साथ लद्दाख में सीमा पर चल रहे गतिरोध के बीच वायुसेना प्रमुख आर के एस भदौरिया ने कहा है कि स्थितियां जटिल हैं लेकिन हम जंग के साथ किसी भी तरह के संघर्ष के लिए तैयार हैं.
राजनीतिक नेतृत्व ने 1971 की तरह 2020 में भी सैन्य मामलों में दखल न देकर सही राजनीतिक निर्देश जारी किया, और रक्षा मंत्री ने सेना अध्यक्ष को सलाह दी कि 'जो उचित समझो वो करो.'