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Saturday, 21 February, 2026
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समाज-संस्कृति

वीएचपी की धर्म संसद में नहीं शामिल हुआ अखाड़ा परिषद, कई सीटें भी रह गईं खाली

विश्व हिंदू परिषद द्वारा कुंभ में आयोजित धर्म संसद के पहले दिन सबरीमाला, सामाजिक समरसता समेत तमाम प्रस्तावों पर चर्चा हुई. कई संत हुए शामिल.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने केरल सरकार को आड़े हाथों लिया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चीफ मोहन भागवत ने सबरीमाला मंदिर में प्रतिबंधित उम्र वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुओं की भावनाओं का खयाल नहीं रखा गया.

वीएचपी की धर्म संसद से पहले संत स्वरूपानंद सरस्वती का ऐलान, 21 फरवरी से करेंगे राम मंदिर का निर्माण

प्रयागराज कुंभ में पिछले दो दिनों से परम धर्म संसद चल रही थी, जिसमें बुधवार को स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए बलिदान का समय आ गया है.

जयशंकर प्रसाद का ‘गुंडा’ अपराधी नहीं था

जयशंकर प्रसाद काशी में पैदा हुए और पूरा जीवन यहीं बिता दिया. वाराणसी के सीर गोवर्धन में स्थित उनका पुश्तैनी मकान आज भी जर्जर अवस्था में है.

पुण्यतिथि: महात्मा गांधी का वह सपना जो 98 साल से अधूरा है

बिहार विद्यापीठ को जानने वाले लोग कहते हैं कि जब तक डॉ़ राजेंद्र प्रसाद यहां रहे, इस विद्यापीठ की स्थिति सही रही, मगर कालांतर में यह अपनी चमक खोती चली गई.

‘मणिकर्णिका’ दि क्वीन ऑफ झांसी के ये तीन पैसा वसूल सीन

नई दिल्ली: बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...वो तो झांसी वाली रानी थी..सुभद्रा...

संस्मरण: ‘लिखना है मुझे अभी कुछ’: ये थी कृष्णा सोबती की आखिरी चाह

अनामिका जी के हाथों में हैं उनके नरम, मुलायम हाथ. एक-एक कर जैसे स्मृतियां उनकी आंखों के आगे अपने बहुरंगी रंगों में तैरने लगतीं हैं.

गणतंत्र के 70 साल: वे महिलाएं जिन्होंने संविधान निर्माण में निभाई अहम भूमिका

संविधान निर्माण के दौरान देशभर की विभिन्न अभियानों से जुड़ी महिलाओं को एकत्रित किया गया था और उनसे महिला अधिकारों सहित कई मामलों पर बात की गई थी..

वो कृष्णा सोबती ही थीं जिन्होंने ‘पहला दरवाजा खोला था’

जिनके नाम पर दम भरते थे, जिनके होने से बहुत साहस था, जो मिसाल थीं, हर तरह से. जीवन और लेखन दोनों में, सुबह...

उसकी जिंदगी का मकसद बन गया है सार्वजनिक जगहों पर लिखे ‘अश्लील’ शब्द मिटाना

ट्रेन में हुई उस घटना के एक साल के अंदर वे अब तक 100 से अधिक ट्रेनों, कई स्कूल कॉलेजों, ढेर सारे सरकारी भवनों, में लिखे अपशब्दों को मिटा चुके हैं.

मत-विमत

भारत में केंद्र-राज्य रिश्तों में बदलाव की जरूरत, लेकिन उतना बड़ा नहीं जितना स्टालिन का दावा

एक राज्य सरकार का नई दिल्ली से वित्तीय स्वायत्तता की मांग करना, जबकि अपने स्थानीय निकायों को धन और निर्णय लेने के अधिकार से वंचित रखना, विडंबना है, जिसे नज़रअंदाज़ करना कठिन है — और इसका बचाव करना और भी कठिन है.

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राजनीति

देश

भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुंबई में राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए

मुंबई, 21 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुंबई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.