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वीएचपी की धर्म संसद में बोलते हुए मोहन भागवत और हंगामा करती भीड़/ सुमित कुमार
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प्रयागराज: जिस राम मंदिर मुद्दे को लेकर वीएचपी ने जोर-शोर से धर्म संसद बुलाई थी उसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सामने हंगामा हो गया. दरअसल, राम मंदिर के प्रस्ताव पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जल्द ही मंदिर बनेगा, लेकिन किसी तारीख की घोषणा नहीं की. तब ही दर्शक दीर्घा में बैठे कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया.

ये है पूरा मामला

लोगों ने हंगामा करते हुए कहा कि ‘बहुत हुए वादे अब तारीख बताइए, माहौल तो बहुत बना लिया. ‘ऐसे नारे सुनकर वीएचपी कार्यकर्ताओं और उन लोगों के बीच हाथापाई हो गई. हंगामा करने वाले दर्जन भर लोगों में कुछ साधु संत भी शामिल थे. लगभग 15 मिनट ये हंगामा चला. इस दौरान कई युवक ‘मंदिर बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे’ के नारे लगाते दिखे. स्टेज से भी इन युवकों को शांत करने की कोशिश की गई, लेकिन वे नहीं माने. बाद में सभा स्थल से उन्हें भगाया गया. ये सब कुछ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सामने हुआ.

भागवत के वादे के बाद हुआ हंगामा

दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन न करने और सरकार को और वक्त देने के बयान पर साधु-संत भड़क गए. धर्म संसद को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘राम मंदिर के निर्माण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है. ये हमारी मांग रहेगी. अब सरकार कैसे करेगी देखेंगे. सरकार करेगी तो प्रभु राम का आशिर्वाद मिलेगा. हम 1990 में 20-30 साल का लक्ष्य मानकर चले थे. 30 साल पूरे होने में बस 2 साल बाकी हैं. भव्य मंदिर निर्माण के प्रयास को सम्पूर्ण बल संघ देगा. चुनाव के मद्देनजर फ़िलहाल आंदोलन की घोषणा नहीं की, लेकिन 4-6 महीने में इस पर कुछ हो गया तो ठीक नहीं तो सब देखेंगे.

यह सुनते ही साधु-संतों का बवाल

मंदिर केवल वोट पाने के लिए नहीं, बल्कि आस्था को ध्यान में रखते हुए बनेगा. उन्होंने इशारा किया कि बीजेपी की सरकार जब दोबारा बनेगी तो मंदिर बनेगा. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है वह मंदिर बनाना चाहती है. मोहन भागवत के इस बयान के बाद वहां मौजूद साधु-संतों का एक वर्ग आक्रोशित हो गया. उसका आरोप था कि विहिप का यह मंच राजनैतिक मंच है. उनका कहना था कि उन्हें राजनीति नहीं, राम मंदिर चाहिए. इसके बाद भागवत के खिलाफ नारेबाजी होने लगी.

तारीख न बताने पर भड़के लोग

बिहार से धर्म संसद में हिस्सा लेने आए कमलेश कुमार ने दप्रिंट से बातचीत में कहा कि बीजेपी, आरएसएस , वीएचपी वाले कई साल से कहते आ रहे हैं कि बीजेपी की सरकार होगी तो मंदिर बनेगा. सरकार बने हुए चार साल हो गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब ये अगले लोकसभा चुनाव के लिए माहौल बना रहे हैं. अब हम लोग इनकी बातों में आने वाले नहीं. वहीं गोरखपुर से आए रमेश सिंह ने कहा कि वे पूरे परिवार के साथ इस उम्मीद से धर्म संसद में आए थे कि आरएसएस प्रमुथ द्वारा तारीख बताइ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इससे लोगों को दुख हुआ है.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बहिष्कार किया

इस धर्म संसद का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बहिष्कार किया है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि ये धर्म संसद नहीं, राजनीति है. अखाड़ा परिषद इस बैठक में शामिल नहीं होगा. इसमें सिर्फ महामंडलेश्वर को जाने की अनुमति है. वह इस धर्म संसद में अपनी बात रखेंगे. महंत नरेंद्र गिरी ने ऐलान किया है कि वह 4 मार्च के बाद साधु-संतों के साथ अयोध्या जाएंगे और मुस्लिम पक्षकारों से राम मंदिर मसले पर चर्चा करेंगे. उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम पक्षकारों से कहेंगे कि वे मस्जिद की जिद छोड़ दें.

उम्मीद से कम आई भीड़, कई कुर्सियां भी खाली

धर्म संसद के पहले व दूसरे दिन भी वीएचपी कार्यकर्ताओं की उम्मीद से कम भीड़ पहुंची. इसका एक अहम कारण अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बहिष्कार करना भी था. पंडाल में कई कुर्सियां भी खाली दिखीं. धर्म संसद के दूसरे दिन राम मंदिर मुद्दे पर चर्चा होगी. इस कारण वीएचपी को भीड़ जुटने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके अलावा हंगामा भी हो गया.


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