12 नवंबर की रात को हिंदी साहित्य के लेखक नीलोत्पल मृणाल को कनॉट प्लेस के एक रेस्त्रां में घुसने से मना कर दिया गया जिनकी बगावत सोशल मीडिया पर छा गई और आखिर में जीत हुई.
1976 की ये बासु चटर्जी की फिल्म आज भी प्रासंगिक लगती है. ये सिर्फ एक रोमांटिक कॉमेडी नहीं है, बल्कि उस सुनहरे समय की साक्षी है जब प्यार और डेटिंग का मतलब धीरज रखना और जल्द हार न मानना होता था.
स्कूल में सभी बच्चों के पैरों में जूते या चप्पलें होने से हर एक के भीतर आत्मविश्वास झलकता है. इसके कारण लगभग सभी बच्चे नियमित स्कूल आ रहे हैं. पर, एक वर्ष पहले ऐसा नहीं था.
भारत के विशाल बाजार के कारण हिन्दी अब विदेशी लोगों के रोजगार की भी भाषा बन रही है और कई देशों में व्यापार प्रबंधन और मार्केटिंग से जुड़े लोग इसे सीख रहे हैं.
बेहद ही भारी और दमदार आवाज में अमिताभ बच्चन 1962 के कलकत्ता शहर की पहचान इसके बाजार, कालीबाड़ी मंदिर, ट्राम, कॉफी हाउस, रसगुल्ला, पुचका, फुटबॉल, सियासत, प्रेम, लोलिता और शेखर से करते हैं.
फिल्म सिर्फ गंजे पन की बात नहीं करती बल्कि उन भ्रामक विज्ञापनों की भी बात करती है जो चंद मिनटों में आपके रंग रूप को बदल देने का दावा करते हैं और फिर समाज से कहती है कि आखिर बदलना क्यूं है.
नैतिक कहानियों के तौर पर बेची जा रही इन वीडियोज के एनालिटिक्स कई यूट्यूब चैनल्स ने दिप्रिंट के साथ साझा किए. सबसे ज्यादा पुरुष इस तरह के वीडियोज देख रहे हैं.
भारतीय नौसेना हमेशा से भारत की राजनीतिक सीमाओं से परे, राष्ट्रीय कूटनीतिक और अन्य संपर्क प्रयासों को समर्थन देने में सबसे आगे रही है. अब आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने का समय आ गया है.