कपिला वात्स्यायन, आईआईसी की आजीवन न्यासी थीं. वह आईआईसी में एशिया परियोजना की अध्यक्ष भी थीं. वात्स्यायन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की संस्थापक निदेशक थीं.
'बंबई में का बा' के जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कि कैसे गांव में खस्ताहाल कानून व्यवस्था, जर्जर अस्पताल, खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था और भयानक बेरोज़गारी लोगों को मुंबई जैसे उन महानगरों में आने को मजबूर करती है जहां उनके लिए कुछ भी नहीं.
मुसलमानों में सहज मानवीय भावनाएं भी होती हैं जिस का किसी धर्म-मजहब से लेना-देना नहीं होता या यह गैर-मुस्लिम समाजों की नैतिकता, रीति-रिवाजों का प्रभाव भी होता है.
अमृता प्रीतम की कहानियों से जब भी गुज़रना होता है तो उनमें मानवीय करूणा, महिलाओं की पीड़ा, नारी की स्थिति बड़ी संजीदगी और गंभीरता से उकेरी हुई जान पड़ती है.
बिस्मिल्लाह खान की विरासत जिसे संजोने की जिम्मेदारी परिवार की, सरकार की, प्रशासन की व हर उस नागरिक की है जो प्रेम करता है अपनी संस्कृति से, अपनी कला, अपनी धरोहर से. पर अफ़सोस राजनीति और घरेलू मन-मुटाव के चलते इस विरासत का मोल न तो उनके परिवार के कुछ सदस्य और न ही सरकारें समझ पाई.
आखिर में अनारकली का वो प्रभावशाली संवाद आता है जो आज भी लोगों की जुबां पर है. वो कहती है, 'शहंशाह की इन बेहिसाब बख्शीशों के बदले में ये कनीज़ जलालउद्दीन मोहम्मद अकबर को अपना ये ख़ून माफ़ करती है.'
रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.