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Sunday, 8 March, 2026
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समाज-संस्कृति

उर्दू प्रेस की खबरें- कर्नाटक के मंदिरों में ग़ैर-हिंदू व्यवसाइयों पर पाबंदी लगाना BJP का अपनी सरकार बचाने का प्रयास है

दिप्रिंट का सारांश कि उर्दू मीडिया ने सप्ताह भर में अलग अलग घटनाओं को किस तरह कवर किया, और उनमें से कुछ ने क्या संपादकीय रुख़ इख़्तियार किया.

‘आम के पेड़ के इर्द-गिर्द संदेह और रोमांच का माहौल’: भारतीय सेना में कितनी है एक फोन की अहमियत

बच्चे अपने पिता से बात करने के इंतजार में वहां आसपास साइकिल चलाया करते थे या कोई और खेल खेलते थे. यह छावनी का सामाजिक चौपाल बन गया था. लेकिन यहां का माहौल हमेशा खुशगवार नहीं होता था.

‘शर्मा जी नमकीन’ को सिर्फ ऋषि कपूर के लिए देख जाइए, ऐसी रूखी फिल्म से उनकी विदाई नहीं होनी चाहिए थी

एक्टिंग के नाम पर बस ऋषि कपूर का बेहतरीन अभिनय है. परेश रावल ने भी भरपूर भरपाई की है. बाकी कलाकार औसत ही रहे.

यूक्रेन रूस संकट में भारत की स्थिति पर बोले कांग्रेस नेता शशि थरूर- ये मुश्किल दौर है लेकिन हमारी स्थिति साफ है

मीटल की ट्रैवलिंग फ़ोटोग्राफ़र की यादें 'कीव और ल्वीव की खुशहाल देश और शोर शोरशराबे वाले सड़कों को दिखाती हैं जिसे मीटल ने अपनी 9 दिन के यात्रा के दौरान कैप्चर किया.

कैसे चुराईं गईं कलाकृतियों की खोज में माहिर जासूसों के इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने 265 कलाकृतियों का पता लगाया?

अनुसंधान, विधायी तौर पर हस्तक्षेप और एडवोकेसी का उपयोग करते हुए, इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने कई कलाकृतियों को वापस भारत लाने में मदद की है, जिनमें से कुछ दुनिया भर के संग्रहालयों में थीं और कुछ अन्य को अवैध कला के सौदों के तहत नीलाम कर दिया गया था.

‘राष्ट्रवाद आ गया…’: कविता की दुनिया में सशक्त हस्तक्षेप करती है जसिंता केरकेट्टा की कविताएं

जसिंता केरकेट्टा की कविताओं से स्पष्ट दिखलाई पड़ता है कि इन कविताओं के पीछे गहरे अनुभव और बहुत हद तक खुद झेली हुई पीड़ा का संसार है. यही चीज़ उनकी कविताओं से बेबाकी के साथ प्रतिरोध का स्वर उभारती हैं.

विश्व रंगमंच दिवस: बना रहेगा थिएटर का वजूद

रंगमंच की दशा, दुर्दशा, उम्मीदों, संभावनाओं को लेकर बातें होती हैं, चिंताएं जताई जाती हैं.

बयानबाजी करने के बजाय ममता बनर्जी को आम आदमी की हिफाजत पर ध्यान देना चाहिए: बीरभूम पर उर्दू प्रेस का रुख

पेश है दिप्रिंट का इस बारे में राउंड-अप कि उर्दू मीडिया ने इस सप्ताह के दौरान विभिन्न समाचार घटनाओं को किस तरह कवर किया, और उनमें से कुछ ने इन पर किस तरह की संपादकीय टिप्पणियां कीं.

‘जो मजलूमों और कमजोरों के हक में बोलने से डरते हैं, गुलाम वे हैं’- क्या कुछ कहती है भगत सिंह की ‘जेल डायरी’

‘जेल डायरी’ के पन्नों से हमें पता चलता है कि भगतसिंहजी गुरुनानक देव महाराजजी, गुरु गोविंदसिंहजी, समर्थ गुरु रामदासजी, रवींद्रनाथ टैगोरजी, विलियम वर्ड्सवर्थजी, मार्क्स, एंजेल्स, बुखारिन लेनिन, बर्टेड रसेल आदि के जीवन एवं विचारों से प्रभावित थे.

सत्यजित राय के लिए एक सपने को साकार करने की लड़ाई क्यों थी ‘पाथेर पांचाली’

सत्यजित राय ने अपने पूरे जीवन में कुछ दर्जन ही फिल्में बनाई लेकिन जो भी बनाई वो वैश्विक ऊंचाईयां छूती गई और सिनेमा जगत के लिए अनूठी साबित हुई.

मत-विमत

ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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दिल्ली के नांगलोई में अचार के कुएं में गिरने से फैक्टरी मालिक और उसके बेटे की मौत

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली के नांगलोई इलाके में शनिवार शाम को अचार बनाने की एक फैक्टरी में कुएं में गिरने से फैक्टरी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.