प्री-प्राइमरी को छोड़कर सभी स्तरों पर स्कूलों में एनरोलमेंट में सुधार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 में देश के 40% स्कूलों में इंटरनेट और 89.3% स्कूलों में बिजली थी.
आंकड़ों से पता चलता है कि राज्यों ने पूंजी परिव्यय के लिए कुल 7 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक का बजट रखा था, नवंबर 2022 तक केवल 2.58 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. आंध्र प्रदेश बड़े राज्यों में सबसे निचले स्थान पर था.
अधिकारियों का कहना है कि बजट आवंटन में वार्षिक 'मामूली वृद्धि' वेतन और भत्तों में चली जाती है. इसके बाद विकास और आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम पैसा बचता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि मौजूदा समय में 14 सेक्टरों में लागू पीएलआई स्कीम लाभकारी रही हैं, प्रशासनिक अक्षमताओं, अनुपालन बोझ को घटाने से उद्योगों को और मदद मिलेगी.
कई प्रोजेक्ट में धीमी प्रगति के बावजूद विशेषज्ञ आशावादी हैं. उनका कहना है कि भारत ने बुनियादी ढांचे के मामले में महज न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के बजाये भविष्य को ध्यान रखकर और नेक्स्ट लेवल के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करना शुरू किया है, जिसमें समय लगता ही है.
इस बार यानी 2023-24 का बजट लोक सभा चुनाव के पहले का पूर्ण बजट होगा. ज़ाहिर है कि मोदी सरकार चाहेगी कि कई सारी ऐसी घोषणाएं इसमें हों जो लोक लुभावन ही नहीं, वोट खींचने वाली हों.
ताशकंद समझौते के दौरान सोवियत संघ ने प्रोटोकॉल पर खास ध्यान दिया. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए व्यवस्थाएं बिल्कुल एक जैसी थीं. इस वार्ता को अमेरिका और ब्रिटेन का भी समर्थन मिला था.
राजौरी/जम्मू, आठ जनवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में संयुक्त घेराबंदी एवं तलाश अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को एक संदिग्ध संवर्धित विस्फोटक...