बांग्लादेश संकट भारत के पड़ोस में उथल-पुथल की एक ताजा मिसाल है लेकिन पड़ोसियों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए हमें खुद को भुक्तभोगी मानने की मानसिकता छोड़नी होगी, घरेलू सियासत और धर्म पर बेहिसाब ज़ोर देने से परहेज करना होगा
उत्पीड़न के प्रत्येक कृत्य का अपना मूल कारण होता है और इसके ऊपर उसी के अनुसार चर्चा की जानी चाहिए. बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रति लोगों के मन में निर्विवाद रूप से घृणा का एक भाव है
कोई भी सरकार किसी एक रणनीति के आधार पर अपना भविष्य नहीं बनाती. इस तरह अगर चीज़ें प्लान-ए के अनुसार नहीं भी होती हैं, तो कम से कम एक प्लान-बी तो होता ही है. मोदी सरकार इस नियम का अपवाद हो सकती है.
जब भी भाजपा सांसदों की इंडिया ब्लॉक के साथ तीखी नोक-झोंक हुई, तो एनडीए घटक संसद में उत्सुक दर्शक बने रहे, जबकि INDIA ब्लॉक ने एक स्वर में प्रतिक्रिया व्यक्त की, भाजपा अलग-थलग रही.
जम्मू-कश्मीर के संकट के समाधान के तीन आयाम हैं — सीधी सैन्य टक्कर से बचा जाए, अलगावाद विरोधी ढांचे का दायरा बढ़ाया जाए और राष्ट्रप्रेमी नेताओं को साथ लेकर चला जाए.
मोदी की तीसरे कार्यकाल की सरकार ने काँग्रेस के जिन विचारों को बेमानी और मज़ाक बताकर खारिज कर दिया था उनमें से कई को अब लागू करने में जुट गई है. इसकी तस्दीक करती हैं हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों के मद्देनजर उसकी घोषणाएं
हमें ढाका में फर्जी ‘जनक्रांति’ का गुणगान करना बंद कर देना चाहिए और इसके बजाय अपने देश के बारे में सोचना चाहिए. अराजकता का जश्न मनाना वही गलती है जो अरब स्प्रिंग का स्वागत करने वालों ने की थी.
पश्चिम बंगाल के दो बार के मुख्यमंत्री, वामपंथ में सुधार के पोस्टर बॉय, जिन्होंने इस बात की परवाह नहीं की कि बिल्ली काली है या सफेद, जब तक वह चूहे पकड़ती है, अब इतिहास बन गए हैं.
उन्होंने इस्लामी भस्मासुर को जन्म दिया है, जिसने खुद उन्हें ही निगल लिया यानी उनका तख्ता पलट दिया. हसीना ने मुल्क से फरार होकर अपनी जान बचाई है, लेकिन यह भस्मासुर अब मुल्क में सभी प्रगतिशील विचारकों को कुचल डालेगा.
छतरपुर (मध्यप्रदेश), नौ अप्रैल (भाषा) महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधन बांध का निर्माण कार्य बृहस्पतिवार को लगातार पांचवें दिन भी...