बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था कुछ समय के लिए औपचारिक धर्मनिरपेक्षता के दौर में रहने के बाद बंटवारे के पहले वाली हकीकत के दौर की ओर लौट रही है. भारत को इसे समझते हुए रिश्ते तय करने चाहिए.
अपने चुनाव से पहले के वादे—‘मेरे पास एक योजना है’—को दोहराते हुए तारिक रहमान ने कहा कि उन्होंने सभी को शामिल करने वाली रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग इस सफर में उनका साथ देंगे.
दीपक और अम्मा के काम मायने रखते हैं. एक ऐसे देश में जहां सामूहिक लापरवाही जीने की रणनीति बन गई है, वहां किसी को ‘ना’ कहते देखना एक बड़ा बदलाव जैसा लगता है.