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Sunday, 29 March, 2026
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नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट पर भारत और चीन की प्रतिक्रिया में अहम फर्क क्यों नज़र आता है

चीन किसी भी कीमत पर अपने कम्युनिस्ट सहयोगी नेपाल को एकजुट रखना चाहता है. भारत को चिंता करनी चाहिए.

तमिलनाडु की राजनीति दरारों से त्रस्त हो रही है, विजय की ‘एंट्री’ से इसमें और मंथन हो सकता है

राज्य में संशयवादी, स्थापित तथा मजबूत दलों, और सियासतबाजी के कारण भारी उदासीनता का भाव हावी है.

क़तर ने निभाई दोहरी भूमिका—शांति दूत भी और कट्टरपंथियों का ठिकाना, अब छिपने की कोई जगह नहीं बची

दुनिया की व्यवस्था दबाव में डगमगा रही है, ऐसे में शांति बनाना अब पहले से भी ज़्यादा ख़तरनाक काम हो गया है.

भारत कैसे टिका रहा जबकि पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान बार-बार बिखरते रहे

जो लोग कहते हैं कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए, उन्हें नेपाल को गौर से देखना चाहिए. वहां की आबादी भारी संख्या में हिंदू है, फिर भी इससे देश की स्थिरता पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

आरएसएस शताब्दी वर्ष: सेवा से संघर्ष तक, सामाजिक संगठन और राष्ट्र निर्माण की कसौटी पर संघ

संघ की हिंदू और हिंदुत्व की अवधारणा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक तत्वों का समावेशी संगम है. संघ मानता है कि हिंदुत्व कोई मत या पंथ नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना है.

भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और हिट-एंड-रन—कैसे Gen Z का गुस्सा नेपाल की सड़कों पर उमड़ पड़ा

ताजा घटनाक्रम यह गंभीर सबक सिखाता है कि युवा पीढ़ी की ताकत को कमतर न समझें, वह भविष्य को बूढ़ी जमात के मुकाबले बेहतर नज़र से देखती है. 1990 और 2006 के जन आंदोलन के बाद से नेपाल को धोखा दे चुके शासक वर्ग से वह बुरी तरह निराश हो चुकी है.

‘तेंदुए’ उमर खालिद के ही नहीं बल्कि आपकी जिंदगी के भी कुछ साल खा सकते हैं

यह सब केवल भारत में ही नहीं चल रहा है. दुनियाभर में जो लोग तानाशाही की अतिवादी कार्रवाइयों पर तालियां बजाते हैं वे पाते हैं कि बुलडोजर उनके दरवाजे पर भी आ पहुंचा है

लिपुलेख से फिर शुरू हुआ भारत-चीन व्यापार, सीमा के व्यापारियों में उम्मीदें और चिंता दोनों

तीन दशकों के अंतराल के बाद 1992 में लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ, लेकिन व्यापार की मात्रा पहले जैसी नहीं रही क्योंकि जिन बाज़ारों को यह जोड़ता था वे हाईवे से बेहतर तरीके से जुड़े हुए थे.

क्या नेपाल में हैं बांग्लादेश जैसे हालात? सोशल मीडिया बैन से आगे बढ़ा Gen Z का विद्रोह

प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को कहा जा रहा है ‘हत्यारा सरकार’. गृहमंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा, लेकिन प्रदर्शन और तेज़ हो रहे हैं.

बांग्लादेश के हिंदू CAA के एक्सटेंशन का जश्न मना रहे हैं, यह उनके लिए मददगार है

बांग्लादेश के हिंदू नेताओं में से कुछ जेल में हैं और कुछ छिपे हुए हैं. वहीं, कुछ पत्रकार जिन्होंने उनके लगातार हो रहे उत्पीड़न की रिपोर्ट करने की कोशिश की, या तो अपनी नौकरी खो बैठे या रहस्यमय तरीके से उनकी मौत हो गई.

मत-विमत

केरल में कांग्रेस के ‘कमजोर’ प्रचार से धोखा मत खाइए. 2001 के बाद उसका यह सबसे मजबूत मौका है

बीजेपी के एक मजबूत तीसरे विकल्प बनकर सामने आने से कई राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. अब केरल की राजनीति सिर्फ दो पक्षों तक सीमित नहीं रही, भले ही यूडीएफ और एलडीएफ अभी भी ऐसा कहते हों.

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सीएमएस ने एफएसएस के एटीएम प्रबंधन कारोबार का 115 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया

मुंबई, 29 मार्च (भाषा) सीएमएस इन्फो सिस्टम्स ने फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स (एफएसएस) के प्रबंधित सेवाओं के कारोबार का 115 करोड़ रुपये में...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.