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Sunday, 29 March, 2026
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CJI, IPS, IAS और होमबाउंड: 75 साल बाद की चेतावनी

शिक्षा, आरक्षण, और सरकारी नौकरी समता और सम्मान दिलाने का लिए है लेकिन हम इससे कितने दूर हैं यह मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने और हरियाणा के IPS अफसर की आत्महत्या से साफ है. फिल्म ‘होमबाउंड’ एक सबक भी सिखाती है.

क्या वजह है कि भारत के लिए RSS का होना उसके न होने से बेहतर है

तमाम संगठन समय के साथ बदलते हैं, संघ ने भी शायद खुद को बदला है. लेकिन इसका अतीत इस पर राजनीतिक हमले करने के लिए इसके आलोचकों को आसानी से हथियार उपलब्ध कराता है.

हुज का अतीत और स्डेरोट का वर्तमान: अरबों और इज़राइलियों को साथ रहने का तरीका सीखना होगा

1948 में जब इज़रायलियों ने अरबों को खदेड़ा था, तो उन्होंने यह नहीं सोचा था कि ये कटु शरणार्थी उनके नए राज्य के लिए एक स्थायी ख़तरा बन जाएंगे. यह एक भयावह ग़लतफ़हमी थी.

CJI गवई पर जूता फेंकने का हमला दिखाता है कि भारतीय राज्य के शीर्ष पर जातिवाद कितना पनपता है

जब उस यूट्यूबर ने, जिसने CJI बी आर गवई के खिलाफ हंगामा मचाया, पुलिस स्टेशन जाने के बाद सोशल मीडिया पर घमंड करते हुए कहा कि ‘सिस्टम हमारा है’, तो दलितों के लिए क्या उम्मीद बचती है?

उत्तराखंड 25 साल का होने जा रहा है—अभी तक क्या हासिल किया और आगे क्या कुछ करने की ज़रूरत है

उत्तराखंड के पास भारत का पहला शून्य-गरीबी वाला राज्य बनने की तकनीक, धन और प्रशासनिक क्षमता है, जिससे यह पहले दो सस्टेनेबल डेवलमेंट गोल्स (SDGs) को पूरा कर सकता है.

ओली-कालीन सोशल मीडिया अकाउंट्स को बहाल नहीं कर पाने से दिखी नई नेपाल सरकार की अवस्था

जब नेपाल के जेन ज़ी सुधार के लिए लड़ रहे थे, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि देश की नई सरकार अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित नहीं कर पाएगी.

चीन को इंजीनियर चला रहे हैं, भारत में ‘फर्स्ट-जेनरेशन’ टेक्नोक्रेट्स की कमी है

किसी दूसरे देश के मुकाबले चीन में उसके उच्चस्तरीय विश्वविद्यालयों से हर साल जितने ग्रेजुएट निकलते हैं उनमें ‘स्टेम’ (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजिनियरिंग, मैथेमेटिक्स) के स्टूडेंट्स की संख्या काफी बड़ी होती है.

‘आई लव मोहम्मद’ पैगंबर के नाम की सस्ती राजनीति है, इसे सड़कों पर न घसीटें

मुसलमानों को सोचना चाहिए कि धर्म का सार्वजनिक प्रदर्शन सेक्युलरिज़्म — यानी वह विचार जिसमें उनका सबसे बड़ा हित है — को मज़बूत करता है या कमज़ोर.

भारत-अमेरिका के व्यापार मामलों में अब सिर्फ गुप्त कूटनीति ही काम कर सकती है

अगर भारत में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो जाए तो इसे विदेशों में बचाया नहीं जा सकता. शॉर्ट टर्म कदम सहारा दे सकते हैं, लेकिन सुधारों के बिना, निर्यातक हमेशा कमजोर बने रहेंगे.

PM मोदी लद्दाख पर मौन हैं, जैसे पहले मणिपुर मामले में थे. यह एक बड़ी गलती है

अमित शाह को लद्दाख में जनता की भावना के बारे में बेहतर जानकारी होनी चाहिए थी, यह देखते हुए कि पार्टी 2014 और 2019 में जीतने के बाद 2024 का लोकसभा चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार से हार गई.

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खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.