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Friday, 27 March, 2026
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शेख हसीना की तानाशाही को शह देने का खामियाजा भुगत रही है जातीय पार्टी

आलोचकों का कहना है कि जातीय पार्टी ने बांग्लादेश की उन चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी सत्ता को वैधता देने में मदद की, जिनकी विश्वसनीयता नहीं थी.

1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध कब शुरू हुआ? ताशकंद शिखर सम्मेलन में एक बड़ा विवादित मुद्दा

भारत के अनुसार युद्ध 5 अगस्त को पाकिस्तान ने शुरू किया था, लेकिन पाकिस्तान के लिए 1965 के युद्ध की शुरुआत की तारीख 3 सितंबर थी.

भारत-पाकिस्तान ताशकंद समझौते के दौरान क्या हुआ था?

ताशकंद समझौते के दौरान सोवियत संघ ने प्रोटोकॉल पर खास ध्यान दिया. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए व्यवस्थाएं बिल्कुल एक जैसी थीं. इस वार्ता को अमेरिका और ब्रिटेन का भी समर्थन मिला था.

नए लेबर कोड गिग वर्क की कठोर हकीकत को बदल सकते हैं

नियोक्ताओं और ग्राहकों को यह समझने होगा कि गिग वर्कर भी उतने ही मजदूर हैं जितने फैक्ट्री या खेतों में काम करने वाले मजदूर, और वे कोई उपद्रवी नहीं हैं.

BCCI ने बांग्लादेश को लेकर भारत के रवैये को नुकसान पहुंचाया

BCCI के फैसले ने हिंदू राइट के कट्टरपंथी गुट को नई जान दे दी है. अब उनमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि वे अपने सांप्रदायिक अभियानों के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव करवा सकें.

जोमैटो से जेप्टो तक—गिग वर्क पर रोक नहीं, बल्कि सुरक्षा की जरूरत है

हमें एक साथ दो सच्चाइयों को स्वीकार करना होगा. पहली, गिग वर्क लाखों लोगों के लिए असली कमाई है. दूसरी, यह एक वास्तविक जोखिम भी है.

NEP के पांच साल बाद: ‘डिज़ाइन योर डिग्री’ के ज़रिये जम्मू-कश्मीर ने दिखाया आगे का रास्ता

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में भारतीय विश्वविद्यालयों का योगदान अब भी कम है, खासकर जब इसकी तुलना एमआईटी और इम्पीरियल कॉलेज जैसे विदेशी संस्थानों से की जाती है.

हिंदुओं पर हमले, खालिदा की मौत और जमात—बांग्लादेश कई मोर्चों पर संकट से जूझ रहा है

जब सभी लोग नए साल का स्वागत कर रहे थे, तब बांग्लादेश में 50-वर्षीय एक हिंदू व्यक्ति को ज़िंदा जला दिया गया, दो हफ्तों में यह चौथा ऐसा हमला था. देश में फॉर-राइट के अपने संस्करण की पकड़ मजबूत होती जा रही है.

भारत का सबसे नतीजाखेज दशक और पत्रकारिता की ‘ड्रीम टीम’ के साथ उसकी खबरनवीसी का मजा

आप कहेंगे कि 1985-95 का दशक तो कब का बीत चुका लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि उस दशक में जो मसले उभरे वे आज भी हमारे लोकतंत्र और सार्वजनिक विमर्शों पर हावी हैं.

भारतीय मिलेनियल्स की दुविधा: न परंपराएं छोड़ पाए, न आधुनिक जीवन में पूरी तरह रम पाए

हमारे माता-पिता हमारी थकान नहीं समझते. वे कहते हैं कि हम न तो कुएं खोद रहे हैं, न ही युद्ध झेल रहे हैं, लेकिन हम थके हुए हैं—हड्डियों तक.

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हैदराबाद, 27 मार्च (भाषा) तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने शुक्रवार को कहा कि वह 25 अप्रैल को अपने नये राजनीतिक दल के...

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