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Monday, 23 February, 2026
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नेशनल इंट्रेस्ट

मोदी के 10वें साल में भारत तेजी से ग्रोथ कर रहा पर चीन-पाकिस्तान मिलकर इसके गले की फांस बन गए हैं

पाकिस्तान ज़्यादातर पैमाने के लिहाज़ से सिफर पर है, चीन सुस्त नहीं पड़ रहा है और भारत की गाथा अमीर बनने से पहले ही काफी शक्तिशाली बनने में कामयाबी की उल्लेखनीय कहानी है.

नरोदा गाम से अतीक़ तक खिंचती रेखा ने ‘ठोक दो’ वाली संस्कृति तक पहुंचाया है

दो पड़ोसी राज्यों में जनसंहार के पुराने मामलों में जो दो अदालती फैसले आए हैं उनमें आरोपियों को बरी कर दिया गया है. पहला फैसला...

बिना एक नेता और साझी विचारधारा के विपक्षी एकता जादू की पुड़िया बेचने जैसी है   

सत्ताधारी पार्टी को हराने की विपक्षी महत्वाकांक्षा बिलकुल जायज है. लेकिन इसके लिए उन्हें चाहिए— एक नेता, एक विचारसूत्र, और एक विचारधारा. अगर वे ये तीन चीजें नहीं जुटा पाते तो एक यही रास्ता बचता है कि वे भाजपा की सीटें कम करने के लिए राज्य स्तरीय, झगड़ा मुक्त गठजोड़ बनाएं

कभी अछूत रही मगर आज जिसे छू पाना हुआ मुश्किल, 43 सालों में कहां से कहां पहुंची बीजेपी

BJP के संस्थापक कभी बहुमत नहीं हासिल कर पाए और उन्हें गठबंधन करते रहना पड़ा पर आज मोदी-शाह की बदौलत उसे किसी सहयोगी की बैसाखी की जरूरत नहीं रही.

जॉबलेस ग्रोथ आपने सुनी होगी, लेकिन टाटा-बिरला-अंबानी-अडाणी ने भारत को ब्रांडलेस ग्रोथ दिया है

‘क्रोनिज़्म’ निंदनीय है, और यह अच्छी बात है कि इस पर जोरदार बहस जारी है. लेकिन अविश्वसनीय रूप से ताकतवर, अमीर, सफल कंपनियों के साथ-साथ सरकारी नीति की सबसे बड़ी विफलता भारत की ब्रांडलेस ग्रोथ है.

भारत का दोस्त कौन, दुश्मन कौन? मोदी सरकार अपनी बनाई अमेरिका-चीन-रूस-पाकिस्तान की जलेबी में उलझी

मोदी सरकार एक ओर पश्चिम विरोधी और रूस समर्थक जनमत के निर्माण को प्रोत्साहित करती रही है, तो दूसरी ओर अपनी रणनीति इसके बिलकुल उलटी दिशा में निर्धारित करती रही है. ऐसे विरोधाभास चल नहीं सकते.

पूर्वोत्तर में सफलता बीजेपी की ही नहीं, भारत की भी कामयाबी की कहानी है

उत्तर-पूर्व के लोग ज्यादा स्मार्ट हैं. वे “दिल्ली” की अच्छी पेशकश के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं. शांति, संपर्क, और भारत की उछाल मारती अर्थव्यवस्था ने राष्ट्रीय भावना और भारतीयता को भी बढ़ावा दिया है 

खालिस्तान की मांग करता अमृतपाल क्यों सिर उठा रहा है और सरकार क्यों सरेंडर कर रही है?

हथियारों से लैस भीड़ सीमावर्ती पुलिस थाने पर हमला बोल देती है, गिरफ्तार संदिग्ध शख्स को रिहा कर दिया जाता है, और सरकार ‘खेद’ जाहिर करके रह जाती है, इसके बाद भी आप सोचते हैं कि इस सबका का कोई नतीजा सामने नहीं आएगा, तो आप बड़े नादान हैं.

बाज़ार तो जीत गया, अब अडाणी तय करें कि वे हारेंगे या नहीं

इस तरह की परिस्थिति में राजनीतिक सत्तातंत्र अगर यह फैसला करता है कि एक कॉर्पोरेट और बाज़ार आपस में निबट लें तो यह माना जाएगा कि भारत में पूंजीवाद समझदार हो गया है.

मोदी के उपदेश से लेकर ‘पठान’ और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ तक, मुस्लिमों के मेनस्ट्रीम में वापसी के संकेत

हिंदुत्ववाद के अधिकतर लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं. अब मोदी और उनकी पार्टी को 2024 की गर्मियों तक तो समाज में अमन-चैन चाहिए ही. इसलिए मुसलमानों की ओर हाथ बढ़ाने की बातें हो रही हैं.

मत-विमत

AI समिट पर घिरी मोदी सरकार को यूथ कांग्रेस के विरोध से मिला राहत का मौका

रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.

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राजनीति

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शबरिमला ध्वज स्तंभ जांच में केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी का बयान दर्ज

तिरुवनंतपुरम, 23 फरवरी (भाषा) शबरिमला मंदिर में 2017 में एक नए ध्वज स्तंभ की स्थापना के संबंध में सोने और धन के कथित दुरुपयोग...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.