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Thursday, 23 April, 2026
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2009 के भ्रष्टाचार के एक मामले पूर्व सीआरपीएफ डीआईजी को तीन साल की कठोर कैद

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नयी दिल्ली/लखनऊ, 28 मार्च (भाषा) लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और दो अन्य को आरक्षी भर्ती से संबंधित रिश्वत के 17 साल पुराने मामले में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि अदालत ने सीआरपीएफ के तत्कालीन उप महानिरीक्षक विनोद कुमार शर्मा तथा बल के दो कर्मियों– सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी ठहराया एवं उन्हें सजा सुनाई।

सीबीआई ने बयान में कहा कि अदालत ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में आरक्षियों की भर्ती से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में तीनों को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी तथा उन पर कुल 1.2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया ।

एजेंसी ने शर्मा और अन्य लोगों के खिलाफ 23 फरवरी, 2009 को मामला दर्ज किया था।

बयान में कहा गया है, ‘‘जांच से पता चला कि उसने (शर्मा ने) सीआरपीएफ में आरक्षी (सामान्य ड्यूटी) पद पर भर्ती होने के इच्छुक उम्मीदवारों से रिश्वत लेने के लिए कुछ व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी।’’

शर्मा ने भर्ती कार्यक्रम और उपलब्ध रिक्तियों के बारे में बिचौलियों को अग्रिम जानकारी दी थी।

एजेंसी ने एक वर्ष के भीतर 2010 में आरोपपत्र दाखिल किया था। बाद में 2012 में एक और आरोपपत्र दाखिल किया गया।

भाषा जफर

राजकुमार अविनाश

अविनाश

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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