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Friday, 1 May, 2026
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असम : 2020 से अब तक अफ्रीकी स्वाइन बुखार से 40 हज़ार से अधिक सूअरों की मौत

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गुवाहाटी, 19 जुलाई (भाषा) असम में 2020 से अब तक अफ्रीकी स्वाइन बुखार के कारण 40 हज़ार से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सूअरों की मौत से 14 हज़ार से अधिक परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं और यह बीमारी 22 जिलों में फैल गई है।

अफ्रीकन स्वाइन बुखार (एएसएफ) भारत में पहली बार फरवरी 2020 में असम में पाया गया था और यह घरेलू व जंगली दोनों सूअरों को प्रभावित करता है।

स्वाइन फ्लू बुखार जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है, एएसएफ सूअरों से मनुष्यों में नहीं फैलता।

मंत्री ने बताया कि जनवरी 2022 से अब तक लगभग 900 सूअरों की मौत इस साल आई भीषण बाढ़ के कारण हुई है।

बोरा ने बताया, ”यह एक घातक बीमारी है और सौ प्रतिशत सूअरों की मौत इसके कारण हुई है। वर्तमान में असम के 22 जिलों में 72 उपकेंद्र हैं जो एएसएफ से प्रभावित हैं। मार्च 2020 से अब तक एएसएफ से 40,482 सूअरों की मौत हो चुकी है, जिससे 14,005 सुअर पालन करने वाले परिवार प्रभावित हुए हैं।”

उन्होंने बताया कि सरकार ने उत्तर-पूर्वी राज्य में बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 27 उपकेंद्रों में फैले 1,378 सूअरों को मार डाला था।

सितंबर 2020 में असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एएसएफ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 12 हज़ार सूअरों को मारने का आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों से मालिकों को पर्याप्त मुआवजा देने को कहा था।

मंत्री ने कहा, ”हमने प्रभावित परिवारों के लिए एक मुआवजा योजना भी शुरू की है और सरकार ने अब तक 1.48 करोड़ रुपये उन किसानों को मुआवजा देने के लिए खर्च किए हैं जिनके सूअर एसएसएफ प्रभावित होने पर काटे गए हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि एएसएफ के एक विशेष स्थान पर फैलने के तीन दिनों के भीतर सूअरों को मार दिया जाता है और 10 दिनों के भीतर किसान को मुआवजा दिया जाता है।

बोरा ने कहा, ”स्थिति पर नज़र रखने और पर्याप्त उपाय करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। अभी तक, सभी उपकेंद्रों वाले तिनसुकिया और शिवसागर जिलों में सूअर के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध है।”

उन्होंने बताया कि सरकार ने 427 त्वरित कार्रवाई बलों का गठन किया है और एएसएफ के प्रसार के खिलाफ सूअर किसानों को जागरूक करने के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

भाषा

फाल्गुनी नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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