ज्यूरिख: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उन प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जो पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता में हिस्सा लेने के लिए रविवार को स्विट्जरलैंड पहुंचे.
वेंस रविवार सुबह पहुंचे, जबकि अमेरिका के अन्य वार्ताकार, जिनमें दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जैरेड कुशनर शामिल हैं, पहले से ही यहां मौजूद थे.
रवाना होने से पहले वेंस ने फॉक्स न्यूज से कहा, “आज (शनिवार) सुबह जैरेड और स्टीव से बात करने के बाद मेरी समझ यह है कि चीजें अच्छी तरह आगे बढ़ रही हैं.”
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ कर रहे हैं.
एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा, “विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव अली बाघेरी कानी और ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं.”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी रविवार को ज्यूरिख पहुंचे. उनके साथ सेना प्रमुख असीम मुनीर और अन्य प्रतिनिधि भी हैं.
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पाकिस्तान मध्यस्थ की अपनी भूमिका में प्रक्रिया को आगे भी आसान बनाता रहेगा.”
आईआरएनए ने यह भी बताया कि रविवार को अराघची और उनके स्विस समकक्ष इग्नाजियो कैसिस के बीच बैठक हुई.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कतर के वार्ताकार भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पिछले सप्ताह एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे. इसने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए 60 दिन की बातचीत की अवधि की शुरुआत की.
मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने इस एमओयू पर गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए.
वार्ता के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत शुक्रवार से शुरू होनी थी, लेकिन इजराइल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच नए सिरे से गोलीबारी होने के कारण इसमें देरी हो गई.
स्विट्जरलैंड में हो रही इस उच्च स्तरीय वार्ता का उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और अस्थायी समझौते को स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करना है.
एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया गया था. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है.
हालांकि, ईरान ने शनिवार को कहा कि उसने इजराइल द्वारा लेबनान में किए गए हमले का हवाला देते हुए जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है.
वेंस ने कहा कि खाड़ी का यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग अभी भी जहाजों के लिए खुला है. वहीं, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकता है.
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