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Sunday, 21 June, 2026
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शशि थरूर पर पवन खेड़ा का ‘महामानव मोदी’ तंज, नाविकों की मौत पर कांग्रेस में दरार फिर उजागर

खेड़ा ने X पर तिरुवनंतपुरम के MP की ‘मोदी की तारीफ़’ पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने US जहाज़ पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले में PM के रवैये पर टिप्पणी की थी.

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नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच असहज रिश्ते एक बार फिर शनिवार को चर्चा में आ गए. कांग्रेस सांसद और AICC संचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर पर नया तंज कसते हुए उन्हें “महामानव मोदी” का भक्त बताया. यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी जहाज पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले को संभालने पर थरूर की टिप्पणियों के बाद आई.

इस टिप्पणी ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि कांग्रेस नेतृत्व विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार की थरूर द्वारा की गई तारीफ से असहज है.

खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “मेरे वरिष्ठ सहयोगी डॉ. शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रशंसा अब शायद भौतिक दुनिया की सीमाओं को भी पार कर चुकी है. अब ऐसा लगता है कि वे वह भी सुन सकते हैं, जो मोदी ने कहा ही नहीं.”

उन्होंने आगे लिखा, “थरूर जी ने किसी तरह ऐसे मजबूत दावे, कड़ा जवाब और बिना समझौते वाली कूटनीति सुन ली, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में कहीं दर्ज ही नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा, “शायद हम बाकी लोग सामान्य मानवीय इंद्रियों तक सीमित हैं. ‘महामानव मोदी’ के भक्तों के लिए, मोदी जितना कम बोलते हैं, उन्हें उतना ज्यादा सुनाई देता है.”

खेड़ा की टिप्पणियों से पहले थरूर ने एक्स पर लिखा था कि एक मानवीय मुद्दे को राजनीतिक विवाद बनाया जा रहा है.

उन्होंने लिखा, “सच कहूं तो मुझे यह बेहद हैरानी की बात लगती है कि भारतीय नागरिक नाविकों की सुरक्षा को लेकर दिए गए एक बयान को राजनीतिक विवाद में बदला जा रहा है.”

उन्होंने आगे लिखा, “तीन भारतीयों की जान गई है. मेरी टिप्पणियां हमारे नागरिकों की सुरक्षा और इस सिद्धांत को लेकर थीं कि व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नागरिक नाविक कभी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनने चाहिए. अगर कुछ लोग इस चिंता पर बात करने के बजाय राजनीतिक अंक बटोरने में ज्यादा रुचि रखते हैं, तो यह उनके बारे में ज्यादा बताता है, मेरे बारे में नहीं.”

उन्होंने कहा, “भारतीयों की जान की चिंता हमें एकजुट करनी चाहिए, बांटना नहीं चाहिए.”

खेड़ा और थरूर के बीच यह बयानबाजी उस टिप्पणी के बाद हुई, जो तिरुवनंतपुरम सांसद ने इस हफ्ते की शुरुआत में की थी.

थरूर ने पीटीआई से कहा था, “जब भारतीय नाविकों की बात आती है, तो प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से और मेरी जानकारी के अनुसार निजी तौर पर भी बहुत मजबूती से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आपको समझना होगा कि कई जहाजों पर भारतीय नाविक काम करते हैं. वह भारतीय जहाज नहीं था, लेकिन दूसरे देशों के झंडे वाले जहाजों पर भी बहुत सारे भारतीय चालक दल और नाविक हैं. जब तक वे व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नागरिक हैं, उन्हें युद्ध में लड़ने वाले लोगों की तरह नहीं माना जाना चाहिए.”

अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में तीन व्यापारिक जहाजों— मारिवेक्स, सेटेबेलो और जलवीर—पर हमला किया था. आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन किया.

केंद्र सरकार ने कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है और उसने हमलों को लेकर अपनी चिंता जताई है. भारत ने अमेरिकी प्रभारी राजनयिक जेसन मीक्स को भी तलब किया था. पलाऊ के झंडे वाले जहाज सेटेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई थी.

‘मतभेद अब भी बने हुए हैं’

थरूर और कांग्रेस के अन्य नेताओं के बीच तनाव पहले भी दिखाई देता रहा है.

संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर को केंद्र सरकार ने पिछले साल आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष रखने के लिए विदेश जाने वाले बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए चुना था. यह कदम पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में पर्यटकों पर गोलीबारी कर 26 लोगों की हत्या करने के बाद उठाया गया था.

इस दौरान सरकार की कूटनीतिक रणनीति की थरूर द्वारा की गई तारीफ पर कांग्रेस के भीतर तीखी आलोचना हुई और पार्टी में उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठे. वह जी-23 समूह का भी हिस्सा रहे हैं. इस समूह में पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल थे, जो संगठन में सुधार और आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की मांग कर रहे थे.

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच कई बैठकें हुई हैं. इन बैठकों में मोदी सरकार की विदेश नीति पर थरूर के सार्वजनिक बयानों और पार्टी की आधिकारिक लाइन के बीच मतभेदों पर चर्चा हुई.

हालांकि, इन चर्चाओं से कोई समाधान नहीं निकला. एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने दिप्रिंट से कहा, “इन मुद्दों पर एक से अधिक बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन मतभेद अब भी बने हुए हैं.”

एक अन्य सूत्र ने कहा, “नेतृत्व अभी तक थरूर के मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं कर पाया है.”

कांग्रेस नेता पहले भी सार्वजनिक रूप से थरूर की टिप्पणियों से पार्टी को अलग बता चुके हैं.

पिछले साल मई में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र की कूटनीतिक पहल के दौरान थरूर की टिप्पणियां उनके निजी विचार थे, पार्टी की आधिकारिक राय नहीं.

जयराम रमेश ने कहा था, “जब शशि थरूर बोलते हैं, तो वह उनकी अपनी राय होती है और हमेशा यह नहीं मान लेना चाहिए कि वह कांग्रेस की राय भी है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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