scorecardresearch
Saturday, 2 May, 2026
होमविदेशअमेरिका के साथ युद्ध फिर भड़क सकता है: ईरान के सशस्त्र बल

अमेरिका के साथ युद्ध फिर भड़क सकता है: ईरान के सशस्त्र बल

ईरान के हमलों से आठ देशों में स्थित कम से कम 16 अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचा है.

Text Size:

तेहरान: फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के डिप्टी इंस्पेक्टर सरदार असादी ने शनिवार को चेतावनी दी कि देश का अमेरिका के साथ युद्ध फिर से भड़क सकता है.

असादी ने कहा कि अमेरिका किसी भी संधि या समझौते का पालन नहीं करता है, क्योंकि दोनों देश एक अस्थिर संघर्ष-विराम की स्थिति में हैं.

फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा, “अमेरिकी अधिकारियों के काम और बयान मुख्य रूप से मीडिया-प्रेरित होते हैं, जिनका पहला मकसद तेल की कीमतों में गिरावट को रोकना और दूसरा, उस मुश्किल से खुद को निकालना होता है जो उन्होंने खुद पैदा की है. हमारी सेनाएं अमेरिकियों की किसी भी नई हरकत या बेवकूफी का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.”

इस बीच, CNN की एक खोजी रिपोर्ट से पता चला है कि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है.

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत के कैंप ब्यूहरिंग में, जहाँ अमेरिकी सैनिकों का खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़ा सैन्य केंद्र था, रेगिस्तान में बसा वह कभी गुलजार रहने वाला अमेरिकी ‘माइक्रो-सिटी’ (छोटा शहर) अब लगभग खाली हो चुका है और

ईरानी मिसाइलों तथा ड्रोन के हफ्तों तक चले हमलों के बाद उसे भारी नुकसान पहुंचा है.

कुवैत उन कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों में से एक था, जिन्हें तेल-समृद्ध अरब प्रायद्वीप में ईरान द्वारा निशाना बनाया गया; यह तब हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ईरान की रक्षा क्षमताओं पर हमले कर रहे थे. CNN की जांच में अभूतपूर्व तबाही के सबूत मिले हैं.

ईरान के हमलों से आठ देशों में स्थित कम से कम 16 अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचा है. CNN के अनुसार, यह इस क्षेत्र में मौजूद अधिकांश अमेरिकी सैन्य ठिकानों को प्रभावित करता है, और उनमें से कुछ अब लगभग इस्तेमाल के लायक नहीं बचे हैं.

पेंटागन के अनुमानों का हवाला देते हुए Axios की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जिससे तेहरान पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है.

युद्ध विभाग के आकलन से पता चलता है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई से जुड़ी बाधाओं के कारण ईरान को तेल से होने वाली कमाई में लगभग 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है; अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाईयां उन समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात को निशाना बना रही हैं जिन पर प्रतिबंध लगे हुए हैं.

यह रिपोर्ट होर्मुज जलडमरूमध्य के पास शिपिंग मार्गों को लेकर चल रहे तनाव के बीच सामने आई है; होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है.

share & View comments