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Wednesday, 30 September, 2026
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अमेरिकी सेना ने इराक से सैनिकों की वापसी पूरी की, 12 साल का ISIS मिशन खत्म

अमेरिकी सैनिकों ने पिछले साल इराक के ज्यादातर इलाकों में मौजूद अपने ठिकानों से वापसी कर ली थी, लेकिन अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र में कुछ सौ सैनिकों की छोटी मौजूदगी बनाए रखी थी.

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बगदाद: अमेरिकी सेना ने बुधवार को ऐलान किया कि उसने इराक से अपने सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है. इसके साथ ही इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ने का 12 साल का मिशन खत्म हो गया है.
आखिरी अमेरिकी सैनिक उस आखिरी एयर बेस से भी चले गए, जहां वे बगदाद और वॉशिंगटन के बीच हुए समझौते के तहत उत्तरी इराक में मौजूद थे.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है और इसका असर कभी-कभी इराक पर भी पड़ा है. बगदाद ने इसे देश की बढ़ती ताकत और संप्रभुता का संकेत बताया.
ईरान समर्थित समूहों ने भी इस कदम का जश्न मनाया, लेकिन कुछ दूसरे इराकियों, खासकर कुर्द क्षेत्र में, ने चिंता जताई.

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी सैनिकों और उपकरणों ने उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में इरबिल के एयर बेस से “व्यवस्थित तरीके से वापसी” पूरी कर ली है.

उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि 12 साल के उस अभियान की सफलता को दिखाती है, जिसने इराक और पूरे क्षेत्र में ISIS को एक संगठित सैन्य खतरे के रूप में हरा दिया. यह युद्ध के समय वाले गठबंधन मिशन से इराक की अगुवाई में चलने वाले सुरक्षा प्रयास की ओर बदलाव भी है, जिसे अब सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा संबंध का समर्थन मिलेगा.”

इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम की अध्यक्षता की और अमेरिकी वापसी को “एक नए दौर की शुरुआत” बताया. उन्होंने कहा कि यह ऐसा दौर है जो “इराक की संप्रभुता, उसकी संस्थाओं की ताकत, उसकी सेनाओं की तैयारी, फैसले लेने में एकता और अपने दोस्तों के साथ संतुलित साझेदारी” से तय होगा.

अमेरिकी सैनिकों ने 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए इराक पर हमला किया था. वे 2011 में चले गए थे, लेकिन तीन साल बाद इराकी अधिकारियों ने इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ने के लिए अमेरिका की अगुवाई में एक छोटे मिशन को बुलाया. इस समूह ने इराक के बड़े हिस्से में तेजी से कब्जा कर लिया था.

जब यह चरमपंथी समूह छोटे-छोटे छिपे हुए ठिकानों तक सीमित रह गया, तो वॉशिंगटन और बगदाद ने 2024 में मिशन को खत्म करने पर सहमति जताई.

अमेरिकी सैनिकों ने पिछले साल इराक के ज्यादातर इलाकों में मौजूद अपने ठिकानों से वापसी कर ली थी, लेकिन अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र में कुछ सौ सैनिकों की छोटी मौजूदगी बनाए रखी थी.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. इसके बाद से इन ठिकानों पर नियमित रूप से हमले होते रहे हैं. ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया ने सऊदी अरब पर हमले करने के लिए यमन के हूती विद्रोहियों के साथ भी तालमेल किया है.

इराकी सरकार ने शुरू में 30 सितंबर की अमेरिकी वापसी की समय सीमा को उस तारीख तक गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के हथियार डालने से जोड़ा था.

कम प्रभाव वाले कुछ मिलिशिया समूहों ने अपने हथियार सौंपने पर सहमति जताई है, लेकिन ईरान के करीब माने जाने वाले ताकतवर समूहों ने इसे खारिज कर दिया या हथियार डालने के लिए ऐसी शर्तें रखीं जिन्हें सरकार के लिए पूरा करना मुश्किल था.

प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने बाद में इस समय सीमा से पीछे हटते हुए इसे बदल दिया. उन्होंने इस महीने की शुरुआत में द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि मिलिशिया के हथियार डालने की समय सीमा बढ़ाकर जून 2027 कर दी गई है.

अमेरिकी वापसी का असर तुरंत दिखाई नहीं दे सकता, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पहले ही कम कर दी गई थी. लेकिन इराक के कुर्द क्षेत्र के अधिकारियों ने अमेरिकी सैनिकों के जाने और खासकर अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई है.

कुर्द क्षेत्र की सरकार के पेशमर्गा मंत्रालय ने कहा कि हाल के अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान कुर्द क्षेत्र पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से 1,000 से ज्यादा हमले हुए.

बयान में कहा गया, “इन जटिल क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच, बिना किसी रक्षा प्रणाली की व्यवस्था किए कुर्दिस्तान क्षेत्र से अमेरिका की वापसी चिंता का विषय है.”

इस बीच, इराक में ईरान के साथ जुड़े समूहों ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी का जश्न मनाया है.

ताकतवर कताइब हिजबुल्लाह मिलिशिया के सुरक्षा अधिकारी अबू मुजाहिद अल-असाफ ने एक बयान में कहा, “इराक की जमीन से हार चुके कब्जे वाले सैनिकों को बाहर निकालना पूरी संप्रभुता की शुरुआत है.”

उन्होंने अल-जैदी और उनकी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वे अमेरिकी योजनाओं को लागू न करें. उन्होंने धमकी दी कि “जो भी सरकार लोगों के हित में काम नहीं करेगी, उसे हर तरीके से सत्ता से हटा दिया जाएगा.”


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