scorecardresearch
Wednesday, 14 October, 2026
होमविदेशआतंकवादी कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराधों के दायरे में रखा जाना चाहिए : भारत

आतंकवादी कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराधों के दायरे में रखा जाना चाहिए : भारत

Text Size:

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 13 अक्टूबर (भाषा) भारत ने कहा है कि आतंकवादी कृत्यों की गंभीर प्रकृति और लोगों पर उनके प्रभाव को देखते हुए आतंकवादियों द्वारा किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराधों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने सोमवार को कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून का व्यापक उद्देश्य मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों का संरक्षण करना है। अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर उल्लंघन संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना और उद्देश्यों के विपरीत हैं।’’

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति के 81वें सत्र में ‘मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और दंड पर सम्मेलन’ विषय पर भारत का वक्तव्य देते हुए कहा कि देशों की जिम्मेदारी है कि वे अपने राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार अपने क्षेत्र में या अपने नागरिकों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों और बड़े पैमाने पर किए गए अत्याचारों के मामलों में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करें।

भारत ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संधियां पहले से ही काफी हद तक मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और उनके लिए दंड का प्रावधान करती हैं।

मैथिली ने कहा, ‘‘कानूनी रूप से बाध्यकारी किसी भी नए दस्तावेज का उद्देश्य मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्थाओं की नकल करना नहीं, बल्कि उनका पूरक बनना होना चाहिए।’’

भारत ने इस बात पर बल दिया कि आतंकवादियों द्वारा किए गए अपराधों और अत्याचारों को तो मानवता के खिलाफ अपराधों के दायरे में उचित रूप से शामिल किया जाना चाहिए। ऐसा आतंकवादी कृत्यों की गंभीर प्रकृति और लोगों पर उनके प्रभाव को देखते हुए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, इस पर विचार मसौदा अनुच्छेदों के समग्र दृष्टिकोण के अनुरूप किया जाना चाहिए और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं को ज्यों का त्यों नए सम्मेलन में शामिल करने से बचना चाहिए।’’

भारत ने यह भी कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों में देशों द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल स्पष्ट क्षेत्राधिकार संबंधी संबंधों के आधार पर किया जाना चाहिए।

मैथिली ने कहा, ‘‘क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र या राष्ट्रीयता के आधार पर अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाले देश आमतौर पर ऐसे अपराधों की प्रभावी जांच और अभियोजन के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होते हैं। इसलिए न्याय के हित, आरोपियों के अधिकारों और पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’

भारत ने मानवता के खिलाफ अपराधों की प्रभावी रोकथाम, जांच और अभियोजन के लिए राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

मैथिली ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सहायता का उद्देश्य राष्ट्रीय व्यवस्थाओं की नकल करना नहीं, बल्कि उन्हें सहयोग और मजबूती प्रदान करना होना चाहिए।’’

भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments