नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में पिछले हफ्ते चुनाव आयोग के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से छेड़छाड़ करने के आरोपों का सामना कर रहे सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत ने शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि महिला पत्रकार ने उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां कीं और उन्हें अपमानित किया. मंगलवार को संसद मार्ग पुलिस थाने में महिला पत्रकार के खिलाफ एससी/एसटी कानून की धाराओं के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और आपराधिक मानहानि से जुड़ी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई.
यह मामला दिल्ली पुलिस के उस दावे के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें उसने कहा था कि कथित घटना का सीसीटीवी फुटेज एआई की मदद से बनाया गया था. पुलिस ने इस मामले में हरियाणा के एक युवक को गिरफ्तार भी किया था.
अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले भगत ने कहा कि इस घटना से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.
उनकी शिकायत पर दर्ज एफआईआर की एक कॉपी दिप्रिंट के पास है. इसमें भगत ने अपने समुदाय का नाम ‘मेघ/मेघवाल’ बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने उनकी ‘विवेक भगत’ नाम वाली नेमप्लेट की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये भगत है, मेघवाल होते हैं, ये छोटी जाति के होते हैं, सिलाई-बुनाई का काम करते हैं, ये साला कहां से एसीपी बन गया?”
एफआईआर के मुताबिक, एसीपी ने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने से पहले बुटा सिंह गोलचक्कर के पास सार्वजनिक रूप से ये टिप्पणियां की थीं. उन्होंने कहा कि जब पत्रकार अपने सहकर्मी न्यूज डिग्गी के गजेंद्र सिंह समेत कुछ लोगों से बात कर रही थीं, तब उन्होंने और कांस्टेबल रवि दहिया ने पत्रकार को उनका नाम और जाति बताकर उनके बारे में बात करते हुए सुना.
उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया, “यह साफ तौर पर जाति को लेकर की गई टिप्पणी थी, जिसका मकसद मुझे अपमानित करना था. उस समय मैंने इस बात को नज़रअंदाज़ किया और अपनी ड्यूटी करता रहा.”
उनकी शिकायत के मुताबिक, यह घटना 3 अक्टूबर को हुई थी. उस दिन वह इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर थे. भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य लोगों ने जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की अपील की थी.
उनकी शिकायत के मुताबिक, प्रदर्शनकारी दोपहर करीब 2:30 बजे बुटा सिंह गोलचक्कर पर इकट्ठा हुए थे और वहां से जंतर-मंतर की ओर जाने वाले थे. पुलिसकर्मियों ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू होने की घोषणा की और प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने को कहा, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ.
इसके बाद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना और उन्हें बसों में बैठाना शुरू कर दिया. एसीपी ने कहा कि वह कानून के मुताबिक इस कार्रवाई में शामिल थे.
उन्होंने आगे कहा कि दोपहर करीब 3 बजे, जब वह हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही एक बस के लिए रास्ता खाली करा रहे थे, तब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा. उन्होंने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार ने उन्हें देखते ही उन पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार और उनके सहकर्मियों या दोस्तों, जिनमें गजेंद्र सिंह भी शामिल थे, ने पांच-छह बार उन्हें घेर लिया और पूछा कि उन्होंने महिला को गलत तरीके से छूने की हिम्मत कैसे की.
उन्होंने कहा, “इस सबके कारण मेरी सरकारी ड्यूटी में जानबूझकर बाधा डाली गई.”
6 अक्टूबर को, भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बढ़ती मांगों के बीच, दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के पलवल के एक निवासी को गिरफ्तार किया था. उस पर एक ऐसा “मनगढ़ंत वीडियो फैलाने” का आरोप था, जिसमें शिकायत करने वाली महिला पत्रकार के साथ अधिकारी को “गलत व्यवहार करते हुए झूठे तरीके से दिखाया गया” था.
नई दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनजीत श्योराण के मुताबिक, आरोपी ने “एआई टूल्स का इस्तेमाल करके सीसीटीवी फुटेज बनाया, जिसमें एसीपी विवेक भगत को महिला पत्रकार के साथ गलत व्यवहार करते हुए देखा जा सकता है.”
महिला पत्रकार के आरोपों के संबंध में भगत के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
‘मुझे यौन शिकारी बताया’
एसीपी ने अपनी शिकायत में कहा कि वह महिला पत्रकार से दूरी बनाते रहे और अपनी ड्यूटी करते रहे. उन्होंने बताया कि उसी दिन बाद में, शाम करीब 6.15 बजे, महिला पत्रकार और उनके सहकर्मियों ने संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उनका नाम लेकर नारे लगाए और उन्हें “यौन शिकारी” और “संभावित बलात्कारी” बताया.
एसीपी ने आगे आरोप लगाया कि महिला पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका, सौरव दास और रत्ना सिंह ने एक्स और इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट किए. इन पोस्ट में उन्हें “यौन शिकारी” बताया गया.
उन्होंने महिला पत्रकार की ओर से अपने खिलाफ की गई शिकायत को “बुरी नीयत से की गई शिकायत” बताया. उन्होंने कहा कि यह शिकायत संसद मार्ग पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी और बाद में इसे दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को भेज दिया गया था, जहां इसकी जांच चल रही थी.
उन्होंने कहा, “इस घटना से उबरने और इसे समझने में मुझे कुछ समय लगा.” उन्होंने आगे बताया कि वह महिला पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए संसद मार्ग पुलिस थाने गए थे.
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