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Wednesday, 9 September, 2026
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तालिबान का पाकिस्तान को झटका, मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से किया इनकार

मसूद अजहर का ठिकाना भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद का बड़ा मुद्दा है. भारत में 2001 के संसद हमले और 2008 के मुंबई हमलों समेत कई आतंकी हमलों के मामलों में उसकी तलाश है.

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नई दिल्ली: तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज कर दिया है कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान से काम कर रहा है. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अजहर देश में नहीं है.

काबुल ने यह भी दोहराया कि अफगानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा.

भारत में अजहर कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है. इनमें 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई हमला, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 में पुलवामा में हुआ बम धमाका शामिल हैं.

पाकिस्तान कई सालों से यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच आतंकियों की फंडिंग और उनके ठिकानों पर कार्रवाई करने के लिए अजहर अफगानिस्तान भाग गया था. आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कोशिशों और वित्तीय सुरक्षा उपायों की समीक्षा फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की आने वाली पूर्ण बैठक में की जानी है. FATF पेरिस स्थित वैश्विक संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की फंडिंग से निपटने का काम करती है.

पाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में रखा गया था और वह 2022 तक इस सूची में रहा. FATF की ग्रे लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है, जहां मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकियों की फंडिंग और हथियारों के प्रसार की फंडिंग को रोकने के लिए व्यवस्था कमजोर मानी जाती है.

पाकिस्तान की चिंताओं में JeM और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ी फंडिंग को रोकने में उसकी नाकामी और संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकियों के रूप में घोषित लोगों पर वित्तीय प्रतिबंधों को लागू करने में कमियां शामिल हैं.

ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे. इनमें JeM, LeT और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करना और आतंकी नेताओं को सजा दिलाना भी शामिल था.

2025 में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया था कि इस्लामाबाद के पास अजहर के ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर भारत ऐसी जानकारी देता है जिससे पता चले कि अजहर पाकिस्तान की जमीन पर है, तो पाकिस्तान उसे गिरफ्तार करने के लिए “खुशी से तैयार होगा”.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो, जो देश की सत्ताधारी गठबंधन सरकार का हिस्सा है, ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा था कि सईद पाकिस्तान में आज़ाद नहीं है और अजहर अफगानिस्तान में हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र ने 2019 में अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था. 1994 में वह हरकत-उल-अंसार के दो गुटों—हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन—के बीच तनाव कम करने के लिए फर्जी पहचान के साथ श्रीनगर गया था. भारतीय अधिकारियों ने फरवरी में अनंतनाग के खानाबल के पास उसे गिरफ्तार किया था और इन संगठनों के साथ आतंकी गतिविधियों के लिए जेल भेज दिया था.

इसके बाद उसे श्रीनगर की बादामी बाग छावनी, दिल्ली की तिहाड़ जेल और फिर जम्मू की कोट बलवाल जेल में रखा गया. 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक करने वाले आतंकियों ने यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को बंधक बना लिया था. इस विमान को बाद में अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया. बंधकों के बदले 1999 में अजहर को जेल से रिहा कर दिया गया.

उस समय कंधार पर तालिबान का नियंत्रण था और इस संगठन को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंसी का समर्थन मिल रहा था. 2001 के संसद हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने मसूद अजहर को एक साल के लिए हिरासत में रखा था, लेकिन उस पर कभी औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए और दिसंबर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया.

बाद में उसका नाम 2008 के मुंबई हमलों से भी जोड़ा गया. हालांकि, पाकिस्तान ने उसे गिरफ्तार करने से इनकार किया और कहा कि उसे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है.

उसका ठिकाना भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से एक बड़ा विवाद बना हुआ है. भारत बार-बार पाकिस्तान से अजहर के साथ-साथ LeT के संस्थापक हाफिज सईद को भी भारत को सौंपने की मांग करता रहा है. नई दिल्ली ने पाकिस्तान पर आतंकवादी नेताओं को अपनी जमीन से काम करने देने का आरोप लगाया है, जबकि इस्लामाबाद ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है या इन्हें खारिज किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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