नई दिल्ली: भारत के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों और केमिस्टों में से एक प्रोफेसर CNR राव को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से एक जानकारी मिली है. इसमें बताया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के चुनावी फॉर्म में उनके नाम की स्पेलिंग में अंतर है. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.
राव के परिवार के प्रतिनिधियों ने बताया कि ECI के अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया है कि नाम में सुधार जल्द से जल्द कर दिया जाएगा और मामला सुलझा लिया जाएगा. इससे “प्रोफेसर राव को किसी तरह की परेशानी” नहीं होगी.
CNR राव एजुकेशन फाउंडेशन के एडमिनिस्ट्रेटर एएन जयचंद्र ने दिप्रिंट को एक्सक्लूसिव तौर पर बताया कि राव को कोई “नोटिस” नहीं दिया गया है. ECI की ओर से भेजी गई जानकारी में सिर्फ उनके नाम की स्पेलिंग में गलती बताई गई है.
जयचंद्र ने कहा, “हम टीम के संपर्क में हैं. उन्होंने वास्तव में खुद आकर यह सुधार करने की पेशकश की है. इससे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई है.”
उन्होंने बताया कि यह गलती इसलिए हुई क्योंकि राव अपने पूरे आधिकारिक नाम चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव की जगह ज्यादा लोकप्रिय नाम CNR राव से जाने जाते हैं.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “उनका (प्रोफेसर राव का) आधिकारिक नाम रामचंद्र है, लेकिन कुछ आधिकारिक दस्तावेजों और बातचीत में उन्हें CNR के नाम से लिखा जाता है. यही एक समस्या थी.”
92 साल के वैज्ञानिक और केमिस्ट को भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है. 2014 में राव यह सम्मान पाने वाले चौथे भारतीय वैज्ञानिक बने थे. अब तक केवल पांच वैज्ञानिकों को यह सम्मान दिया गया है.
लाइमलाइट से दूर रहे
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि राव इसके मानद अध्यक्ष हैं. राव और उनकी पत्नी अभी भी विश्वविद्यालय की गतिविधियों में नियमित रूप से शामिल होते हैं, लेकिन बुधवार को उन्होंने वहां नहीं आने का फैसला किया.
वैज्ञानिक ने कहा, “प्रोफेसर राव और श्रीमती राव आज विश्वविद्यालय नहीं आए हैं. हम उनके संपर्क में हैं. ऐसा नहीं लगता कि यह चिंता की कोई बात है.”
विज्ञान में योगदान
1934 में जन्मे राव ने 1953 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से MSc की डिग्री हासिल की और 1958 में पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से PhD की. उन्होंने भारत के कई बड़े संस्थानों में काम किया है, जिनमें बेंगलुरु का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) और IIT कानपुर का केमिस्ट्री विभाग शामिल हैं.
उन्होंने नेशनल रिसर्च प्रोफेसर के रूप में काम किया और लिनस पॉलिंग रिसर्च प्रोफेसर का पद भी संभाला. वह JNCASR के मानद अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए—पहला 1985 से 1989 तक और दूसरा 2005 से 2014 तक.
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