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Thursday, 29 October, 2026
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इजरायल चुनाव में विदेशी दखल का शक, चुनाव प्रमुख ने शिन बेट से जांच कराने को कहा

इजरायल उन विदेशी संस्थाओं द्वारा किए गए वित्तपोषण की जांच कर रहा है जो 'देश के हितों के खिलाफ' काम कर रही थीं और चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थीं, क्योंकि त्रिशंकु फैसले के कारण नेतन्याहू गुट बहुमत से पीछे रह गया और अरब पार्टियों को अभूतपूर्व 19 सीटें मिलीं.

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तेल अवीव: इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोलबर्ग ने मंगलवार को हुए चुनावों में विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच करने के लिए इजरायल की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी शिन बेट के प्रमुख से कहा है.

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चुनाव के नतीजों को लेकर स्थिति साफ नहीं है. अरब पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं, क्योंकि उन्होंने अब तक की सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं.

शिन बेट के निदेशक डेविड जिनी को लिखे पत्र में केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि उनके संज्ञान में गंभीर संदेह आए हैं कि विदेशी संस्थाओं ने इजरायल के हितों के खिलाफ काम करते हुए फंडिंग के जरिए “चुनावों को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की है”.

बुधवार सुबह लिखे गए इस पत्र में किसी देश या संगठन का नाम नहीं लिया गया है. हालांकि, इजरायल के चुनाव समिति अध्यक्ष के पत्र से संकेत मिलता है कि अरब संस्थाओं ने इजरायल के चुनावों के नतीजों को प्रभावित करने के मकसद से चलाए गए अभियान को फंडिंग दी है.

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने कहा है कि जज सोलबर्ग के बयानों से उसे झटका लगा है. इन बयानों में आरोप लगाया गया है कि विदेशी संस्थाएं अरब पार्टियों के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने और उन्हें रिश्वत देने के लिए चुनाव में दखल दे रही थीं.

नेतन्याहू की ओर से पोस्ट किए गए पार्टी के बयान में इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताया गया है. बयान में कहा गया है कि इसका मकसद विदेशी ताकतों के जरिए नेसेट पर कब्जा करना, इजरायल का इस्लामीकरण करना और दक्षिणपंथी शासन को गिराना है, ताकि सभी मोर्चों पर और खासकर ईरान के खिलाफ इजरायली रक्षा बलों (IDF) को पीछे हटने और हार का सामना करना पड़े.

नेतन्याहू विरोधी गठबंधन का नेतृत्व कर रहे गादी आइजेनकोट ने कहा कि इजरायल को चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए. किसी भी तरह की दखलअंदाजी, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और पक्षपात की कोशिश के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए और हर शिकायत की पूरी जांच होनी चाहिए. नेतन्याहू को चुनौती दे रहे आइजेनकोट ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों से उम्मीद है कि वे इस स्थिति का फायदा उठाकर 26वें नेसेट के शपथ ग्रहण के समय को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.

चुनाव समिति ने यह कदम बुधवार को नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी के बयान के कुछ घंटे बाद उठाया. पार्टी ने आरोप लगाया था कि चुनाव “उन अरब पार्टियों ने चुरा लिए हैं, जो आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी देश को खत्म करना चाहती हैं”. पार्टी ने आरोप लगाया कि इसके लिए रिश्वत, धमकी, हिंसा, जालसाजी और मतदाताओं को जुटाने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे गंभीर आपराधिक तरीकों का सहारा लिया गया.

लिकुड पार्टी ने इसे इजरायल के लोकतंत्र और उसके नागरिकों के मतदान के अधिकारों पर गंभीर हमला बताया. पार्टी ने कहा कि वह चुनाव में धांधली से जुड़े “सैकड़ों गवाहों के बयान और सबूत” पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप रही है. पार्टी के मुताबिक, इन सबूतों में कई अरब मतदान केंद्रों पर नकदी वाले हजारों लिफाफे और राम पार्टी की पर्चियां (राम इजरायल की एक राजनीतिक पार्टी है, जिसके समर्थकों में अरब समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं), मतदान केंद्रों के कर्मचारियों को धमकाने और उनके साथ हिंसा करने, मतदान के दौरान पर्दे के पीछे कई बार वोट डालने और दो अलग-अलग पहचान के साथ मतदान करने के मामले शामिल हैं.

इजरायल की 120 सदस्यों वाली संसद नेसेट में अरब पार्टियों ने 19 सीटें जीती हैं. यह 2022 के पिछले चुनावों में मिली 10 सीटों के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं. दोनों पार्टियों ने नेतन्याहू विरोधी बयान जारी किया है. इससे संकेत मिलता है कि वे गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले ‘बदलाव गठबंधन’ का समर्थन कर सकती हैं, जिसका मकसद इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू को सत्ता से हटाना है.

दोनों अरब पार्टियां अब चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाली ताकत बनकर उभरी हैं. नेतन्याहू का गठबंधन और ‘बदलाव गठबंधन’, दोनों ही बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाए हैं. संयुक्त सूची को 12 सीटें मिली हैं, जबकि राम पार्टी ने सात सीटें जीती हैं.

इजरायल में नेसेट के 120 सदस्यों को चुनने के लिए चुनाव हुए थे. इस बार रिकॉर्ड 77.7 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 1999 के बाद सबसे ज्यादा है. इस साल के चुनाव में अरब बहुल इलाकों में मतदान काफी बढ़ा. नाजरेथ में, जहां लगभग 100 प्रतिशत आबादी इजरायली अरब समुदाय की है, वहां 80 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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