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Friday, 23 October, 2026
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सैकड़ों करोड़ की साइबर ठगी के शक में बेंगलुरु में 4 गिरफ्तार, 320 सिम स्लॉट मिले

कर्नाटक पुलिस की साइबर कमांड यूनिट के मुताबिक, आरोपी ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिनके डिजिटल अरेस्ट घोटाले, सेक्सटॉर्शन और दूसरे तरह की वित्तीय ठगी से जुड़े होने का शक है.

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बेंगलुरु: कर्नाटक पुलिस की साइबर कमांड यूनिट ने बेंगलुरु में दो जगहों से चल रहे एक साइबर अपराध नेटवर्क में कथित रूप से शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इस नेटवर्क के डिजिटल अरेस्ट घोटाले, सेक्सटॉर्शन और दूसरी तरह की वित्तीय ठगी से जुड़े होने का शक है.

पुलिस ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि यह नेटवर्क व्हाइटफील्ड में दो अपार्टमेंट से चल रहा था. दोनों जगहों पर कुल 320 सिम कनेक्शन की क्षमता थी.

जांच तब शुरू हुई, जब भारती एयरटेल लिमिटेड के बेंगलुरु स्थित चीफ सर्किल नोडल ऑफिसर ने शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में व्हाइटफील्ड में सिम बॉक्स सेटअप में एयरटेल के सिम कार्ड के बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया था. 26 अगस्त को मामला दर्ज किया गया और इसके तुरंत बाद जांच शुरू की गई.

साइबर कमांड ने कहा कि कडुगोडी में उसने 192 सिम स्लॉट वाले छह सिम बॉक्स डिवाइस जब्त किए. इनमें अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के ई-सिम कनेक्शन लगाए गए थे. दूसरी जगह, पट्टंदूर अग्रहारा में चार सिम बॉक्स डिवाइस जब्त किए गए, जिनमें कुल 128 सिम स्लॉट थे.

साइबर विंग ने कहा, “दोनों जगहों से बरामद डिवाइस एक संगठित टेलीकम्युनिकेशन सेटअप का हिस्सा होने का शक है. इनका इस्तेमाल फर्जी संचार और उससे जुड़ी साइबर अपराध गतिविधियों को चलाने में किया जाता था.”

सिम बॉक्स में कई सिम कार्ड लगाए जाते हैं और इनके जरिए कॉल या मैसेज टेलीकॉम नेटवर्क से भेजे जाते हैं. साइबर अपराधी इनका इस्तेमाल संचार के असली स्रोत को छिपाने, फर्जी कॉल और मैसेज करने और बड़े स्तर पर साइबर अपराध चलाने के लिए करते हैं.

गिरफ्तार किए गए चारों लोग महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. जब्त किए गए डिवाइस और दूसरी चीज़ों की जांच की जा रही है, ताकि उनकी सही भूमिका और संदिग्ध अपराधियों से उनके संबंधों का पता लगाया जा सके. पुलिस तिरोड़ा, महाराष्ट्र में भी सुरागों की जांच कर रही है.

साइबर कमांड ने कहा कि शुरुआती सुरागों से पता चलता है कि इस बड़े नेटवर्क में सैकड़ों करोड़ रुपये की वित्तीय ठगी शामिल हो सकती है. हालांकि, पीड़ितों की संख्या, असल वित्तीय नुकसान और नेटवर्क का पूरा दायरा अभी साफ नहीं है.

भारत में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इनमें फिशिंग, लोगों को धोखे में लेकर जानकारी हासिल करना, निवेश और रोमांस के नाम पर ठगी, तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी, नौकरी के नाम पर ठगी, सेक्सटॉर्शन, ऑनलाइन उत्पीड़न और रैनसमवेयर जैसे खतरे शामिल हैं.

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच वित्तीय ठगी से जुड़ी 65.89 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें कुल 55,050 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम की ठगी की शिकायतें शामिल थीं.

इनमें से 8,189 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को लियन के रूप में चिह्नित किया गया. इसका मतलब है कि पैसे को बैंक खातों में रोक दिया गया था, ताकि उन्हें निकाला या दूसरे खाते में भेजा न जा सके. इन शिकायतों के संबंध में 1,95,760 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं.

अलग से, सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) ने बताया कि 30 जून 2026 तक 32.8 लाख से ज्यादा शिकायतों पर कार्रवाई करने के बाद 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बचाई गई.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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