नई दिल्ली: चीन के साथ भारत की सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की तारीफ करते हुए इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक ने कहा कि हाल ही में बनाई गई प्लाटून के जवानों ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव के दौरान शानदार काम किया है. उन्होंने कहा कि टकराव की ये घटनाएं अभी भी जारी हैं.
डीजी शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में हिमवीर सम्मान समारोह में आईटीबीपी के जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह बात कही, “हमारी शौर्य प्लाटून ने भी कुछ शानदार काम किया है…अरुणाचल प्रदेश में कुछ ऐसी स्थितियां बनीं, जहां कई जगहों पर टकराव हुआ, जो अभी भी जारी है…हमारी शौर्य कमांडो टीमों ने बहुत अच्छा काम किया. यह एक नई पहल थी.”
कपूर के बयान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे पहली बार अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ टकराव की घटनाओं की पुष्टि होती है. इनमें पिछले महीने ब्रिक्स सम्मेलन के समय हुई एक घटना भी शामिल है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आए थे.
कपूर ने आईटीबीपी की ट्रेनिंग विंग की भी तारीफ की, जिसने जवानों के लिए “स्ट्राइक” नाम का एक नया कोर्स तैयार किया है. इसमें उन्हें युद्ध लड़ने के नए तरीकों और रणनीतियों की ट्रेनिंग दी गई. इसका मकसद सीमा पर बेहतर तैयारी करना और 2020 में गलवान में बनी स्थिति जैसी घटनाओं से बचना था. गलवान में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के दौरान 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे.
उन्होंने कहा कि ड्रोन के जरिए चीनी सैनिकों को चुनौती देने का एक नया मौका है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध ने दिखाया है कि छोटे देश भी बड़े देशों को चुनौती दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि सीमा की रक्षा करने वाली हर बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून होगी और घर के अंदर ड्रोन बनाने और ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग जैसे अभ्यास शुरू कर दिए गए हैं.
कार्यक्रम में कपूर ने कहा, “पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला करना बहुत मुश्किल हो सकता है क्योंकि उनकी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) और बीडीआर (बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट) निवेश और आधुनिकीकरण के मामले में बहुत आगे निकल चुकी हैं. हालांकि, ड्रोन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां एक छोटा देश भी बड़े देशों को बड़ी चुनौती दे सकता है. हमने देखा है कि यूक्रेन, जो बहुत छोटा देश है, उसने रूस की सेना को 10-15 हजार लोगों का नुकसान पहुंचाया है, जबकि रूस एक महाशक्ति है.”
उन्होंने आगे कहा, “चार साल बीत चुके हैं. चार हफ्तों में यूक्रेन पर कब्ज़ा करने के उनके दावे के उलट, उन्हें हर महीने 10 हजार शव मिल रहे हैं. एक फैसले के लिए उन्हें कितना बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है.”
कपूर ने कहा कि गृह मंत्रालय ने ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. यह रकम 2030 तक इस बल को मिलेगी.
अगस्त में दोनों देशों के बीच सैन्य स्थिति और क्या इन मुद्दों को राजनयिक स्तर पर उठाया गया था, इस बारे में दिप्रिंट ने विदेश मंत्रालय से सवाल किया था. मंत्रालय ने कहा था कि ऐसे मुद्दों का दोनों देशों के आपसी संबंधों पर असर पड़ेगा.
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, “भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मामलों में हमने हमेशा चीनी पक्ष के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीर मानते हैं और इन इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है.”
उन्होंने कहा था, “हमने यह भी कहा है कि सीमा पर स्थिति का असर हमारे बड़े द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा. 6 अगस्त को भारत-चीन सीमा मामलों पर हुई 36वीं डब्ल्यूएमसीसी (वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्स) बैठक में भी इस बात को दोहराया गया था और आप उस बयान से पहले ही परिचित हैं, जिसे हमने जारी किया था.”
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