नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, नदियों के प्रदूषण को कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी पर आधारित एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसे जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रस्तुत किया जाएगा.
‘उत्तर प्रदेश स्टेट स्पेसिफिक नोट ऑन माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजीज’ के तहत शुरुआत चुनिंदा संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट से होगी. इसके सफल परिणामों के आधार पर योजना का विस्तार किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की सीईओ कृतिका शर्मा के मुताबिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, नगर विकास और प्रदूषण नियंत्रण समेत संबंधित विभाग इस पहल में सहयोग करेंगे. लखनऊ स्थित बायोटेक पार्क और काउंसिल की भी अहम भूमिका होगी.
ड्राफ्ट में सरकारी और चुनिंदा निजी अस्पतालों में संक्रमण तथा एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की निगरानी के लिए प्रयोगशाला जांच और जरूरत के अनुसार डीएनए सीक्वेंसिंग का सुझाव दिया गया है.
इसके अलावा गंगा, यमुना और गोमती के जलग्रहण क्षेत्रों में जल शोधन की प्रक्रिया बेहतर बनाने के लिए पायलट परियोजनाएं प्रस्तावित हैं. कृषि क्षेत्र में भी फसलों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुधारने के लिए तकनीक का परीक्षण किया जाएगा.
योजना के पहले तीन महीनों में प्रयोगशालाओं की क्षमता और पायलट स्थलों का आकलन होगा. चौथे से बारहवें महीने तक परियोजनाएं शुरू होंगी, जबकि अगले साल परिणामों के मूल्यांकन के बाद सफल प्रयोगों का विस्तार किया जाएगा.