नई दिल्ली: पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को कहा कि भारत और पोलैंड के लक्ष्य एक जैसे हैं और दोनों देशों के बीच “हितों का कोई टकराव नहीं है”. दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए टस्क ने कहा, “हमारी बातचीत बहुत सफल रही है. इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि भारत और पोलैंड के बीच कई समानताएं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच कोई मतभेद भी नहीं है. शायद सिर्फ भौगोलिक दूरी है. भारत और पोलैंड के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी साफ हैं. हमारे हितों में कोई टकराव नहीं है.”
टस्क ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते भरोसे, साझा मूल्यों और अहिंसा जैसे समान विचारों पर आधारित हैं. उन्होंने कहा, “हमारे बीच इतिहास से जुड़ा ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जो हमें बांटता हो.” उन्होंने पोलैंड के सॉलिडैरिटी आंदोलन और भारत की अहिंसा की परंपरा के बीच समानता बताई. पोलैंड के सॉलिडैरिटी आंदोलन ने अहिंसक तरीकों से कम्युनिस्ट शासन को चुनौती दी थी. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के इतिहास और राजनीतिक परंपराओं से पोलैंड को प्रेरणा मिली है.
टस्क ने यह भी कहा कि उन्हें मोदी को अपना दोस्त कहने पर “बहुत गर्व” है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया में अनिश्चितता के इस दौर में नई दिल्ली दुनिया को सही दिशा दिखा सकती है.
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Polish Prime Minister Donald Tusk deliver a joint press statement at the Hyderabad House following high-level bilateral talks.
Polish PM Donald Tusk says, "We have just completed a very important and fruitful discussion with PM… pic.twitter.com/BGsd6UQTfW
— ANI (@ANI) October 22, 2026
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री जी, आपके जैसा नेता, जो भारत जैसे ताकतवर देश का नेतृत्व कर रहा है, हम सभी के लिए उम्मीद की किरण है. और मुझे यह कहने में बहुत, बहुत गर्व है, सचमुच गर्व है कि मैं खुद को आपका दोस्त कह सकता हूं, प्रधानमंत्री जी.”
दोनों नेताओं ने रक्षा और आर्थिक संबंधों, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और आज की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत पर चर्चा की.
मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने की कोशिशों के लिए भारत का समर्थन दोहराया. यूक्रेन का एक प्रमुख रणनीतिक और सैन्य सहयोगी पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ खड़े होकर उन्होंने कहा, “चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, भारत शांति की दिशा में होने वाली हर सार्थक कोशिश का समर्थन करता रहेगा.”
भारत ने हाल ही में रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था. यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने इस प्रस्ताव को चर्चा में शामिल चार प्रस्तावों में “सबसे व्यापक” बताया था.
टस्क का तीन दिवसीय दौरा बुधवार को शुरू हुआ. साल 2010 के बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री का यह पहला भारत दौरा है. इससे पहले मोदी ने 2024 में पोलैंड का दौरा किया था. यह 45 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पोलैंड का पहला आधिकारिक दौरा था. उस दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए 2024-2028 की कार्ययोजना अपनाई थी.
ड्रोन और रक्षा क्षेत्र पर खास ध्यान
बातचीत में रक्षा और नई तकनीकों पर खास ध्यान दिया गया. दोनों देश ड्रोन, सैटेलाइट, अंतरिक्ष तकनीक और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं.
टस्क ने कहा, “हमारे ड्रोन हाल ही में बहुत उपयोगी साबित हुए हैं.” उन्होंने भरोसा जताया कि ड्रोन और सैटेलाइट के क्षेत्र में सहयोग से देशों को राजनीतिक तनाव और संकटों से निपटने में मदद मिल सकती है.
मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर तकनीक विकसित करने और उत्पादन करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि 2024 में वारसॉ में दोनों देशों की साझेदारी को नया दर्जा दिए जाने के बाद से इसमें तेजी आई है.
प्रधानमंत्री ने कहा, “इस मजबूत नींव के आधार पर पिछले दो वर्षों में हमारी साझेदारी को नई गति मिली है. हम पोलैंड की कंपनियों को इन सभी रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर तकनीक विकसित करने और उत्पादन करने के लिए आमंत्रित करते हैं.”
टस्क ने कहा कि ड्रोन और सैटेलाइट के क्षेत्र में पोलैंड की विशेषज्ञता इस साझेदारी का एक अहम हिस्सा है.
इससे पहले ThePrint से बातचीत में भारत में पोलैंड के राजदूत पियोट्र एंटोनी श्विताल्स्की ने कहा था कि भारतीय सेनाओं ने सैन्य अभियानों में पोलैंड में बने ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है. इनमें ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है. उन्होंने बताया कि हमले और निगरानी करने वाले ड्रोन खरीदने के लिए नए समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं.
टस्क के साथ करीब 100 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है. इसमें पोलिश स्पेस एजेंसी, अंतरिक्ष और तकनीक से जुड़ी कंपनियों और कई दूसरे क्षेत्रों के कारोबारियों के प्रतिनिधि शामिल हैं. टस्क ने इसे दोनों देशों के आपसी संबंधों के इतिहास में अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल बताया.
उन्होंने कहा, “पोलैंड और भारत की रणनीतिक साझेदारी की नींव अर्थव्यवस्था और हमारे आर्थिक संबंध हैं.”
अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा
दोनों देशों ने पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ अंतरिक्ष तकनीक और परमाणु ऊर्जा को भी सहयोग बढ़ाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र माना.
टस्क ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी में खनन, कोयले से गैस बनाने, शिपयार्ड और जहाज निर्माण जैसे पारंपरिक उद्योग शामिल होने चाहिए. इसके साथ ही अंतरिक्ष तकनीक, डिजिटल तकनीक, सैटेलाइट और आधुनिक रक्षा प्रणालियों में भी सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमारी योजनाएं बहुत महत्वाकांक्षी हैं. इनमें खनन, कोयले से गैस बनाने, शिपयार्ड और जहाज निर्माण जैसे पारंपरिक उद्योग शामिल हैं. इसके साथ ही अंतरिक्ष उद्योग, डिजिटलीकरण, सैटेलाइट और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों को लेकर भी हमारे लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं और दोनों देशों के लक्ष्य एक जैसे हैं.”
उन्होंने फिर कहा कि आर्थिक संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी की नींव हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के कारोबारियों के बीच करीबी सहयोग से राजनीतिक वादों को वास्तविक परियोजनाओं में बदला जा सकता है.
नई दिल्ली में बैठकों के बाद टस्क ने कहा कि वह बेंगलुरु जाएंगे, जिसे उन्होंने भारत के तकनीकी उद्योग का केंद्र बताया. यह दौरा दिखाता है कि पोलैंड स्थापित व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर तकनीक पर आधारित उद्योगों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है.
टस्क ने कहा, “पिछले 35 साल हमारे सभी देशों के लिए आर्थिक सफलता और तेज विकास के लिहाज से अभूतपूर्व रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “दुनिया हमें ईर्ष्या की नजर से देखती है. आपको देखती है कि भारत कैसे विकास कर रहा है और पोलैंड के विकास को भी देखती है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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