हैदराबाद: पूरे राज्य में सिंचाई की कई नई परियोजनाओं के बीच खुद को ‘किसानों का दोस्त’ बताने के बाद, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शरन्नवरात्रि के उत्सव का इस्तेमाल अपनी एक नरम और सभी को साथ लेकर चलने वाली सांस्कृतिक छवि पेश करने के लिए किया.
इस बार उनकी सरकार ने विजयवाड़ा उत्सव को मैसूर के भव्य दशहरा समारोह की तर्ज पर आयोजित किया. उनकी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के मंत्रिमंडल के सहयोगियों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री सांस्कृतिक कूटनीति और राजनीतिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
मंगलवार को खत्म हुए 10 दिनों के इस उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री और TDP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विजयवाड़ा को आंध्र प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पेश किया, जबकि अमरावती को नई प्रशासनिक राजधानी बनाया गया है. जिस तरह मैसूर में देवी चामुंडेश्वरी की पूजा होती है और चामुंडी पहाड़ी पर उत्सव मनाया जाता है, उसी तरह विजयवाड़ा में भी दशहरे के दौरान इंद्रकीलाद्रि पहाड़ी पर देवी कनक दुर्गा या विजया दुर्गा की पूजा की जाती है और भव्य उत्सव मनाए जाते हैं.
राज्य के पर्यटन मंत्रालय की ओर से आयोजित इस उत्सव में धार्मिक आस्था, शास्त्रीय कला, लोक प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनियों को एक साथ लाया गया. इसमें महिलाओं के 650 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों (SHG) और 1,500 कारीगरों ने हिस्सा लिया.
‘एक शहर-एक उत्सव’ की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में एक और पहली बार होने वाला काम भी हुआ. नायडू ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले SARAS यानी ग्रामीण कारीगरों की संस्था के उत्पादों की बिक्री मेले के साथ मिलकर दशहरा उत्सव का आयोजन किया. नायडू पहली बार SARAS मेले को दिल्ली से बाहर लाने में सफल रहे. इसे कृष्णा नदी के किनारे पुन्नमी घाट पर लगाया गया.
SARAS एक देशव्यापी पहल है, जिसे ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का समर्थन प्राप्त है. इसके साथ ही आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ग्रामीण गरीबी खत्म करने के लिए काम करने वाली संस्थाएं, जैसे सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP), भी इससे जुड़ी हैं.
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह उत्सव आधुनिक जीवन के दबाव और तनाव को कम करने में मदद करता है. बुधवार को समापन समारोह में उन्होंने कहा, “तकनीक तरक्की लाती है, लेकिन इससे बहुत ज्यादा तनाव भी पैदा होता है. दशहरे की शरन्नवरात्रि के दौरान आयोजित इस उत्सव के आध्यात्मिक पहलू लोगों को ‘अपने मन पर काबू पाने’ और सोशल मीडिया के लगातार इस्तेमाल के चक्र से राहत पाने में अहम भूमिका निभाते हैं.”
लेकिन विजयवाड़ा को राष्ट्रीय स्तर पर लोगों तक पहुंच बनाने का केंद्र बनाने में सबसे बड़ी भूमिका उन मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और खुद राष्ट्रपति के दौरों की रही, जो 10 दिनों के इस उत्सव में शामिल हुए.
नायडू की राजनीतिक छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो तकनीक का इस्तेमाल करके राज्य चलाने वाले प्रबंधक के रूप में जाने जाते हैं. ऐसे में उन्होंने इस उत्सव का इस्तेमाल तमिलनाडु के अपने समकक्ष जोसेफ विजय के सामने नदियों को जोड़ने की परियोजना का प्रस्ताव रखने के लिए किया. इसके जरिए उन्होंने एक बड़े नेता और दूरदर्शी राजनेता के रूप में अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश की.
विजयवाड़ा के सांसद केसिनेनी शिवनाथ ने कहा, “विजय कुछ अतिरिक्त TMC पानी मांगने आए थे, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री ने नदियों को जोड़ने की पूरी योजना सामने रख दी, जिससे हमें हमेशा के लिए सूखे की समस्या से राहत मिल सकती है.”
उन्होंने आगे कहा, “सांस्कृतिक गौरव, ग्रामीण आर्थिक सशक्तीकरण और क्षेत्रीय कूटनीति के मेल से हम समाज के जमीनी स्तर पर रहने वाले लोगों के बहुत बड़े वर्ग तक पहुंच पाए हैं. यह सच में विजयवाड़ा के लिए सबसे खुशी का पल है. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी एक पत्र लिखकर कहा है कि विजयवाड़ा उत्सव भव्य रूप से सफल होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है कि हमें कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए. यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है.”
इस उत्सव में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और चीन का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल थे. इनके अलावा भी कई लोग पहुंचे. तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भी निमंत्रण भेजे गए थे.
लालदुहोमा ने आंध्र प्रदेश के निवेशकों को मिजोरम में कारोबारी अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने नायडू से यह भी अनुरोध किया कि वे मिजोरम के युवाओं के लिए आंध्र प्रदेश में रोजगार के अवसर खोजने में मदद करें.
एसके यूनिवर्सिटी में राजनीतिक और सामाजिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर के. नागराजू ने कहा, “विजयवाड़ा को धार्मिक आस्था और भव्य उत्सवों से जोड़कर मुख्यमंत्री ने न सिर्फ खुद को एक सांस्कृतिक अगुआ के रूप में स्थापित किया है, बल्कि अपने सपने ‘नव नगरालु’ यानी ‘नौ शहरों’ की योजना के लिए भी जमीन तैयार की है. इस योजना का मुख्य केंद्र विजयवाड़ा का दुर्गा मंदिर और आध्यात्मिक पर्यटन है.”
नागराजू ने आगे कहा, “यह उन कुछ मौकों में से एक है, जब नायडू ने धार्मिक पहलू को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया है और अपने किसी भी गठबंधन सहयोगी, BJP या JSP, को इसमें जगह नहीं दी है. पवन कल्याण और राज्य BJP अध्यक्ष की इस कार्यक्रम में लगभग गैरमौजूदगी इस बात का सबूत है कि नायडू ने सोच-समझकर इस आयोजन को अपनी पार्टी का कार्यक्रम बनाने की कोशिश की.”
विजयवाड़ा उत्सव के दौरान नायडू ने ‘स्वयं AP’ ब्रांड भी लॉन्च किया. उन्होंने घोषणा की कि उनका लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को धन और संपत्ति बनाने वाली महिलाओं में बदलना है. महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के योगदान और उनकी पहुंच को देखते हुए उन्होंने 2029 तक पांच लाख और महिलाओं को सशक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा.
P4 (पब्लिक-प्राइवेट-पीपल पार्टनरशिप) सलाहकार समिति का हिस्सा रहे एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी ने कहा, “SERP यानी सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी इस दिशा में पहले ही काफी काम कर चुकी है. लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा का मकसद जनता और राजनीतिक बिरादरी को यह बताना है कि वह अपनी आर्थिक समझ को जमीनी स्तर पर लोगों को साथ लेकर चलने वाली राजनीति से जोड़ने को लेकर गंभीर हैं. उनका संदेश साफ है: वह इस पुरानी आलोचना का जवाब देना चाहते हैं कि उनकी नीतियां लंबे समय से सिर्फ बड़ी कंपनियों के हित में रही हैं.”
दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक नायडू की पहुंच बनाने की कोशिश पर भी लोगों का ध्यान गया है. ThePrint से बात करने वाले राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि दक्षिण भारत की राजनीति में मतदाता सूचियों में बदलाव के मुद्दे पर काफी ध्रुवीकरण है. ऐसे समय में दूसरे राज्यों के नेताओं से संपर्क बढ़ाने का मकसद यह भी है कि नायडू ऐसे नेता न दिखें, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर के नेताओं के विरोधी हैं.
BJP के तीन मुख्यमंत्रियों को छोड़कर, ज्यादातर निमंत्रण कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों या उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजे गए, जहां BJP की सरकार नहीं है.
प्रोफेसर नागराजू ने कहा, “यह उत्सव नारा लोकेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का भी संकेत था. वह राजनीतिक मेहमानों का स्वागत करके एक राजनयिक की भूमिका निभा रहे थे. इस तरह उन्होंने राज्य की राजनीति से बाहर भी अपनी भूमिका बढ़ाई. इससे यह भी साफ होता है कि विजयवाड़ा और अमरावती सिर्फ निवेश के केंद्र नहीं हैं, बल्कि इन्हें राजनीतिक नेताओं के बीच अच्छे संबंध बनाने के केंद्र के रूप में भी स्थापित किया जा रहा है.”
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