नई दिल्ली: भारत में जल्द ही महाभारत महाकाव्य पर पूरी तरह आधारित पोस्टग्रेजुएट डिग्री कोर्स पढ़ाया जाएगा. दिल्ली की केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) महाभारत अध्ययन में दो साल का इंटरडिसिप्लिनरी यानी अलग-अलग विषयों को जोड़ने वाला MA कोर्स तैयार कर रही है.
केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इस कोर्स को एक “अग्रणी” पहल बताया है. इसमें महाभारत के मूल पाठ को गहराई से पढ़ने, उसके दर्शन को समझने और व्यापक वैदिक ज्ञान परंपरा पर ध्यान दिया जाएगा.
इस कोर्स का नाम एमए इन महाभारत स्टडीज (MA-MBH) रखा गया है. इसे भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक परंपराओं पर काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था इंडिका के सहयोग से तैयार किया जा रहा है.
भारत और विदेशों के विश्वविद्यालयों में महाभारत को हिंदू अध्ययन, संस्कृत और धार्मिक अध्ययन जैसे बड़े कोर्सों के हिस्से के रूप में पढ़ाया जाता है. लेकिन इस नई डिग्री का मकसद महाभारत अध्ययन को पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई के एक अलग विषय के रूप में स्थापित करना है.
सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के वेदांत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. के. मनोग्ना ने दिप्रिंट को बताया कि यह कोर्स उन छात्रों के लिए बनाया जा रहा है, जिन्होंने चार साल या तीन साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी की हो और उसके बाद दो साल की पोस्टग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की हो.
उन्होंने कहा, “इसका विचार ऐसे छात्रों को लाना है, जो पहले से किसी खास क्षेत्र में काम कर चुके हैं. हम उन्हें यह समझने में मदद करना चाहते हैं कि महाभारत की शिक्षाओं को उनके अपने-अपने क्षेत्रों में कैसे लागू किया जा सकता है.”
उन्होंने कहा, “यह भारत में महाभारत अध्ययन को समर्पित पहला फुल-टाइम कोर्स होगा.”
यह कोर्स अगले शैक्षणिक सत्र में शुरू होने की उम्मीद है. दाखिले के लिए विश्वविद्यालय की आवेदन प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी.
पढ़ाई और शोध का एक नया क्षेत्र
कोर्स के कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक, सदियों से महाभारत ने भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं को आकार दिया है. इसका असर टीकाओं, अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में दोबारा लिखी गई कहानियों, कला और नाट्य प्रस्तुतियों, धार्मिक परंपराओं, पवित्र स्थानों और भारत के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में आज भी जीवित परंपराओं में दिखाई देता है.
नोट में कहा गया है, “महाभारत का दायरा बहुत बड़ा है और आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है. इसके बावजूद, इसे ऐसे किसी खास और व्यापक पोस्टग्रेजुएट कोर्स के तहत बहुत कम पढ़ाया गया है, जिसमें इसके पाठ, दर्शन, समाज और सभ्यता से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ समझा जा सके.”
प्रस्तावित एमए कोर्स का मकसद इस कमी को दूर करना है. इसके लिए महाभारत अध्ययन को एक अलग इंटरडिसिप्लिनरी विषय के रूप में विकसित किया जाएगा. इसमें महाभारत के मूल पाठ की पढ़ाई के साथ-साथ इस बात पर भी शोध होगा कि आज के समाज और संस्कृति में इसकी क्या अहमियत है.
CSU और इंडिका इस कोर्स के आसपास एक बड़ा शैक्षणिक माहौल तैयार करने की भी योजना बना रहे हैं. इसमें अतिथि विद्वान, शोध में सहयोग, फेलोशिप, विशेष व्याख्यान, किताबों का प्रकाशन और पारंपरिक ज्ञान रखने वाले लोगों के साथ बातचीत शामिल होगी.
यह पहल उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को बढ़ावा देने की उनकी घोषित कोशिश का हिस्सा है. इसके लिए व्यवस्थित पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई और शोध का सहारा लिया जाएगा.
संस्कृत के ग्रंथ, नैतिकता और शासन व्यवस्था
प्रस्तावित पाठ्यक्रम को तीन मुख्य आधारों पर तैयार किया गया है. ये हैं- पाठ, शोध और प्रत्यक्ष अनुभव. इसमें चार क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा: पाठ, विचार, समाज और सभ्यता.
छात्र संस्कृत के मूल ग्रंथों, कहानी कहने के तरीकों और उनकी अलग-अलग व्याख्याओं का अध्ययन करेंगे. इसके साथ ही भगवद्गीता, धर्म, नैतिकता, राज्य चलाने की नीति, कूटनीति, सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरण जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे.
इस कोर्स में महाभारत की अलग-अलग क्षेत्रीय कहानियों, पवित्र स्थानों, सांस्कृतिक यादों और समाज पर महाभारत के आज भी बने हुए प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा.
इस कोर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि पढ़ाई सिर्फ कक्षा तक सीमित न रहे. छात्र विद्वानों, पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं से जुड़े लोगों, सांस्कृतिक संस्थानों, अभिलेखागारों और महाभारत से जुड़ी आज भी जीवित परंपराओं के साथ काम करेंगे.
कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक, इस कोर्स में भारतीय शिक्षा के तीन सिद्धांतों- श्रवणम्, मननम् और निदिध्यासनम् को भी अपनाया जाएगा. इनका मतलब है ध्यान से सुनना और सीखना, गंभीरता से विचार करना और सीखी हुई बातों को गहराई से समझकर आत्मसात करना. इसके साथ ही आज के समय में पोस्टग्रेजुएट स्तर पर पढ़ाई के तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
छात्रों को 20 क्रेडिट का एक अंतिम शोध प्रोजेक्ट भी पूरा करना होगा, जिसके जरिए वे स्वतंत्र रूप से शोध करेंगे. इसके अलावा, सार्वजनिक स्तर पर अपने शोध को प्रस्तुत करने का एक हिस्सा भी होगा और व्यापक मौखिक परीक्षा (वाइवा वॉइस) ली जाएगी. इससे यह आकलन किया जाएगा कि छात्र पारंपरिक शैक्षणिक माहौल से बाहर भी अपने शोध को लोगों तक कितनी अच्छी तरह पहुंचा सकते हैं.
मनोग्ना ने कहा, “पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसकी घोषणा जल्द की जाएगी. कोर्स करने के इच्छुक उम्मीदवारों से अपने उद्देश्य का विवरण (स्टेटमेंट ऑफ पर्पस) जमा करने को कहा जाएगा. इसके आधार पर उनके इंटरव्यू लिए जाएंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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