चेन्नई: त्योहारों के मौसम में तमिलनाडु के परिवार चावल, दाल, घी और प्याज जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं. चावल की कई लोकप्रिय किस्मों के खुदरा दाम एक महीने में 35 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि दालें और सब्जियां भी महंगी हो गई हैं. इस बीच, राज्य के सरकारी डेयरी सहकारी संगठन आविन ने बुधवार से दूध से बने 60 से ज्यादा उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं. इससे परिवारों के बजट पर दबाव और बढ़ गया है.
तमिलनाडु में कई जरूरी चीजें राष्ट्रीय औसत के मुकाबले महंगी हैं. सितंबर में राज्य में चावल की औसत कीमत 61.66 रुपये प्रति किलो थी, जबकि पूरे देश में इसका औसत भाव 46.20 रुपये प्रति किलो था. तूर दाल की कीमत 134.23 रुपये प्रति किलो थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 124.41 रुपये था. प्याज का भाव 59.28 रुपये प्रति किलो था, जबकि देश में इसका औसत भाव 52.96 रुपये था. वहीं, पाम ऑयल की कीमत 160.28 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि पूरे देश में इसका औसत भाव 150.91 रुपये प्रति लीटर था.
चावल की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चेन्नई और तमिलनाडु के दूसरे इलाकों में चावल की कई लोकप्रिय किस्में काफी महंगी हो गई हैं. सितंबर में उबले हुए पोन्नी चावल की कीमत करीब 61 रुपये प्रति किलो थी, जो अब लगभग 19 रुपये प्रति किलो बढ़ गई है. कच्चे चावल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. पहले इनका भाव 58 से 75 रुपये प्रति किलो के बीच था. वहीं, बासमती चावल की कुछ किस्मों की कीमत 60 रुपये से बढ़कर 98 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. अच्छी और बहुत अच्छी गुणवत्ता वाले चावल की किस्में अब खुले बाजार में आमतौर पर 75 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं. पारबॉयल्ड चावल की कीमत फिलहाल 70 से 80 रुपये प्रति किलो है.
थोक बाजार में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है. चेन्नई के कोयंबेडु थोक बाजार के व्यापारियों ने बताया कि चावल की कुछ किस्मों के 25 किलो के बोरे की कीमत 300 से 600 रुपये तक बढ़ गई है.
व्यापारियों का अनुमान है कि त्योहारों के पूरे मौसम में कीमतें ऊंची बनी रहेंगी. उन्होंने इसके लिए सरकार की कथित निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना है कि बाजार में सामान की सप्लाई कम है और महंगाई के कारण लोगों की खरीदारी पर असर पड़ रहा है.
दालों की कीमतें बढ़ने से भी परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ गया है. चेन्नई में तूर दाल की थोक कीमत सितंबर में करीब 125 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो हो गई है. पिछले कुछ हफ्तों में उड़द, मूंग और चने की दाल भी 8 से 15 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं.
राज्य सरकार ने सस्ती दरों पर जरूरी चीजें बेचने और जमाखोरी की आशंका को रोकने के लिए कदम उठाए हैं. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पी. वेंकटारामनन ने मीडिया को बताया कि सहकारी दुकानों और अमुधम आउटलेट्स को अच्छी गुणवत्ता वाला चावल 30 रुपये प्रति किलो बेचने का निर्देश दिया गया है. इसके लिए शुरुआत में 25,000 टन चावल उपलब्ध कराया गया है. उन्होंने बताया कि तूर दाल भी 130 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर बेची जा रही है. विभाग के अधिकारियों ने कहा कि चावल की कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.
विजय ने स्टॉक रखने की सीमा तय करने के लिए केंद्र से मंजूरी मांगी
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को पत्र लिखकर जरूरी वस्तु अधिनियम के तहत चावल, दालों, खाने के तेल और प्याज का स्टॉक रखने की सीमा तय करने की मंजूरी मांगी है.
राज्य सरकार ने कहा कि मौसम में बदलाव, अल नीनो और कम बारिश के कारण फसल खराब होने की आशंका है. इससे थोक व्यापारी और मिल मालिक जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा कर सकते हैं. इसके कारण महंगाई बढ़ सकती है और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो सकती है.
चावल के मामले में तमिलनाडु ने थोक व्यापारियों के लिए 2,000 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए आठ मीट्रिक टन स्टॉक रखने की सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है. मिल मालिकों को एक महीने की उत्पादन क्षमता से ज्यादा चावल रखने की अनुमति नहीं होगी.
तूर और उड़द दाल के लिए थोक व्यापारियों के पास 200 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के पास पांच मीट्रिक टन तक स्टॉक रखने का प्रस्ताव है. खाने के तेल और वनस्पति घी के लिए राज्य ने थोक व्यापारियों के लिए 500 क्विंटल और खुदरा विक्रेताओं के लिए 30 क्विंटल की सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है. प्याज के स्टॉक की सीमा थोक व्यापारियों के लिए 25 मीट्रिक टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए दो मीट्रिक टन रखने का प्रस्ताव है.
पड़ोसी राज्यों से सप्लाई में कमी
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में भी चावल की कीमतों पर बढ़ोतरी का दबाव रहा है. हालांकि, तमिलनाडु में कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं. इसकी एक वजह यह है कि राज्य चावल की सप्लाई के लिए इन राज्यों पर निर्भर है, खासकर अच्छी और बहुत अच्छी गुणवत्ता वाले चावल के मामले में.
व्यापारियों का कहना है कि चावल पैदा करने वाले प्रमुख इलाकों से सप्लाई कम होने के कारण कीमतें बढ़ी हैं. वहां कम पैदावार और बारिश की कमी के चलते बाजार में चावल की उपलब्धता घट गई है. अल नीनो से जुड़ी बारिश की कमी और पानी की सीमित उपलब्धता ने तमिलनाडु को चावल सप्लाई करने वाले नेटवर्क के कई इलाकों में उत्पादन को प्रभावित किया है.
कोयंबेडु थोक बाजार के एक व्यापारी आर. पुन्नैयप्पन ने दिप्रिंट को बताया, “हमें दूसरे राज्यों से चावल और तूर दाल की नियमित मात्रा में सप्लाई नहीं मिली. इससे स्वाभाविक रूप से कीमतें बढ़ गईं. पड़ोसी राज्य भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं. इसलिए उन्होंने अपने पास स्टॉक जमा कर लिया और तमिलनाडु को सप्लाई नहीं की. हाल में हुई बारिश के बाद हमें उम्मीद है कि कीमतें अब और नहीं बढ़ेंगी.”
तमिलनाडु में उत्पादन से जुड़ी दिक्कतों ने भी स्थिति को और मुश्किल बना दिया है. मिल मालिकों का कहना है कि कावेरी डेल्टा में कम बारिश और सिंचाई के पानी की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर धान का उत्पादन घटा है. मौसम में बदलाव के कारण भी फसल को नुकसान हुआ है. राज्य में अच्छी और बहुत अच्छी गुणवत्ता वाले धान की कीमत 40 से 42 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है.
मिल मालिकों ने कहा कि धान की खरीद कीमतें बढ़ने से उनकी लागत बढ़ गई है. वहीं, सरकार की खरीद व्यवस्था में ज्यादा धान जाने के कारण खुले बाजार में निजी खरीदारों के लिए धान की उपलब्धता कम हो गई है. उन्होंने खाद की बढ़ती कीमतों, ईंधन और मजदूरी की लागत, चावल का लगातार निर्यात होने और चेन्नई, मदुरै तथा कोयंबटूर में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की ज्यादा मांग को भी कीमतें बढ़ने की वजह बताया.
हालांकि, किसान संगठनों ने मिल मालिकों पर स्टॉक जमा करने और कीमतें बढ़ाने में योगदान देने का आरोप लगाया है. उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त कदम उठाने की मांग की है.
तमिलनाडु रिवर एंड इरिगेशन फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. विश्वनाथन ने दिप्रिंट को बताया, “पिछले साल हमारा उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन कमजोर मानसून और जलवायु परिवर्तन के कारण मिल मालिकों ने चावल का स्टॉक जमा कर लिया है और अब कह रहे हैं कि उत्पादन कम हुआ है. खरीद की ऊंची कीमतों, खेती की लागत और खुले बाजार में निजी खरीदारों के लिए चावल की कम उपलब्धता को भी स्टॉक की कमी की वजह बताया जा रहा है.”
उन्होंने कहा कि सरकार को इन दावों की जांच करने और कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए था. उन्होंने कहा, “इसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है और दूसरे लोग इस मौके का फायदा उठाकर पैसा कमा रहे हैं.”
आविन ने डेयरी उत्पादों के दाम बढ़ाए
खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच आविन ने 28 अक्टूबर से अपने कई डेयरी उत्पादों के दाम बदलने का फैसला किया है. इस बदलाव में घी, मक्खन, दही, छाछ, मिल्कशेक, लस्सी, मिठाइयां और कुकीज शामिल हैं. इससे उन उत्पादों की कीमतें भी प्रभावित हुई हैं, जिन्हें परिवार रोजाना इस्तेमाल करने और त्योहारों की तैयारियों के लिए खरीदते हैं.
घी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. पहले 100 मिलीलीटर के पैक की कीमत 80 से 85 रुपये थी, जो अब बढ़कर 95 रुपये हो गई है. 200 मिलीलीटर के पैक की कीमत अब 180 रुपये और 500 मिलीलीटर के पैक की कीमत 400 रुपये है.
100 ग्राम टेबल बटर की कीमत 60 रुपये से बढ़कर 70 रुपये हो गई है. वहीं, पैक के आकार के हिसाब से दही की कीमतों में करीब 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. छाछ के 200 मिलीलीटर के पैक की कीमत अब आठ रुपये से बढ़कर 10 रुपये हो गई है.
आविन ने कहा कि कच्चे माल और खरीद की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में बदलाव किया गया है. संगठन ने कहा कि इससे होने वाली अतिरिक्त कमाई का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा डेयरी किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
विजय को विपक्ष की आलोचना का सामना
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों को लेकर विजय और टीवीके सरकार की आलोचना की है. उन्होंने दावा किया कि नई सरकार के सत्ता में आने के चार महीने के भीतर ही तमिलनाडु महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में देश का सबसे आगे रहने वाला राज्य बन गया है.
स्टालिन ने सरकार पर बुनियादी प्रशासनिक समझ की कमी का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या रील देखने से लोगों का पेट भर जाएगा. उन्होंने कहा कि आम परिवारों को रोजमर्रा का सामान खरीदने में परेशानी हो रही है, जबकि सरकार दूसरे मामलों में उलझी हुई है.
उन्होंने X पर लिखा, “टीवीके सरकार के चार महीने के भीतर ही तमिलनाडु देश में नंबर एक राज्य बन गया है. किस मामले में? महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में.”
आविन की ओर से कीमतें बढ़ाने के फैसले की AIADMK महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी आलोचना की है. उन्होंने इसे त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग का फायदा उठाते हुए दिया गया कड़वा ‘वेट्री दीपावली का तोहफा’ बताया. उन्होंने सरकार से कीमतों में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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