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Friday, 28 August, 2026
होमविदेश‘30 सेकंड बाद फोन देखा होता तो मर चुके होते’: बाढ़ से पहले आए SMS ने रसुवा में बचाई 8 मजदूरों की जान

‘30 सेकंड बाद फोन देखा होता तो मर चुके होते’: बाढ़ से पहले आए SMS ने रसुवा में बचाई 8 मजदूरों की जान

अर्जुन रेमल ने कहा, 'मैं इतनी तेज़ी से भागा, जितना पहले कभी नहीं भागा था. हो सकता है कि दूसरे लोग इतने भाग्यशाली न हों.' अर्जुन नेपाल के रसुवा में एक पुल पर काम कर रहे थे, जब वहां बाढ़ आई.

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बिदुर: अर्जुन रेमल का कहना है कि वह इस बात के लिए शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने अपना फोन चेक कर लिया था. 26 अगस्त की सुबह रसुवा में एक पुल पर अपनी आठ लोगों की कंस्ट्रक्शन टीम के साथ काम करते समय उन्हें अपनी जेब में फोन के वाइब्रेट होने का एहसास हुआ. जब उन्होंने फोन चेक किया, तो यह नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की ओर से आया SMS अलर्ट था, जिसमें उनकी लोकेशन पर अचानक बाढ़ आने की चेतावनी दी गई थी.

“मैंने फोन की तरफ देखा और जैसे ही ऊपर देखा, पानी तेजी से अंदर आ रहा था,” नेपाल आर्मी के बिदुर स्थित रेस्क्यू ऑपरेशन हेडक्वार्टर के बाहर बैठे रेमल ने याद करते हुए कहा. “मैंने बस अपनी टीम को आवाज दी और भाग गया.”

रेमल रसुवा जिले के मेलुंग इलाके में भांगे झरना नाम की जगह पर एक पुल पर टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहे थे. यह एक लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट है और बाढ़ सबसे पहले इसी इलाके में आई थी. उन्हें करीब 10 फीट ऊंची सफेद पानी, मिट्टी और पत्थरों की एक बड़ी दीवार याद है, जो पुल की तरफ तेजी से आ रही थी. रेमल और उनके साथी जान बचाने के लिए एक साइड रोड से पास की पहाड़ियों की तरफ भागे.

“अगर मैंने अपना फोन नहीं देखा होता, या 30 सेकंड बाद देखा होता, तो हम मर चुके होते,” रेमल ने कहा. “सब कुछ इतनी अचानक हुआ कि हमारे पास इसे समझने का भी समय नहीं था.”

पहाड़ी की तरफ जल्दी-जल्दी भागते समय उनके जूते, फोन और बाकी सभी सामान खो गए. उनका कहना है कि उन्होंने अपने शरीर पर पहने कपड़ों के अलावा सब कुछ पीछे छोड़ दिया.

“लेकिन अच्छी बात यह है कि हम सभी जिंदा हैं, मेरी टीम के सभी सदस्य मेरे साथ हैं और जिन लोगों की जिम्मेदारी मेरी थी, वे सभी यहां हैं,” उन्होंने आंखों में आंसू के साथ याद किया.

रसुवा नेपाल का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला था. तिब्बत सीमा से बाढ़ आने के बाद सबसे ज्यादा असर यहीं हुआ. सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया और तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसी बस्तियां बुरी तरह प्रभावित हुईं.

जंगल में एक रात

रेमल और उनकी टीम ने मेलुंग इलाके के आसपास की पहाड़ियों और जंगलों में पूरी रात बिताई. वे अंधेरे में सुरक्षित जगह की तरफ चलते रहे. नीचे बाढ़ से डूबे नदी वाले इलाके में उतरना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें यह पता नहीं था कि वे कहां हैं या झरने से कितनी दूर हैं.

रात करीब 10 बजे वे कुछ घरों के पास पहुंचे और उन्हें पता चला कि वे पैदल चलते-चलते नुवाकोट जिले तक पहुंच गए थे. उन्हें बचाने के लिए कोई हेलीकॉप्टर या एंबुलेंस नहीं आई थी. घरों में कुछ खाने के बाद वे आगे बढ़ते रहे.

“हम बस सुरक्षित रहना चाहते थे. मुझे याद नहीं कि हम कैसे चले या कहां से चले, लेकिन मुझे बस इतना याद है कि हमें पुल को पीछे छोड़ना था और सुरक्षित जगह की तरफ जाना था,” रेमल की टीम के एक सदस्य सुनील तामांग ने कहा.

बाढ़ से बचे लोग बिदुर कैंप में हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें घर ले जाया जा सके | फोटो: आकांक्षा मिश्रा | दिप्रिंट

गुरुवार दोपहर ये लोग बिदुर नगरपालिका पहुंचे. वहां राह चलते लोगों ने उन्हें बताया कि सेना ने अपने ट्रेनिंग सेंटर में एक बेस बनाया है. वहां पहुंचने के बाद रेमल अपने लोगों को घर भेजने के तरीके तलाशने लगे.

“मैं बिदुर का रहने वाला हूं, लेकिन बाकी लोग नदी के नीचे वाले इलाकों से हैं. कुछ काठमांडू के पास रहते हैं,” रेमल ने कहा. “मुझे पहले उनका इलाज करवाना है और फिर उन्हें घर पहुंचाना है.”

उनके चार साथियों को पिक-अप ट्रक और वैन में अपने गांव जाने के लिए सवारी मिल गई. वहीं रेमल बाकी लोगों के साथ आर्मी ट्रेनिंग सेंटर में ही रुके. यहां जब परिवार अपने लापता लोगों को खोजते हुए पहुंच रहे थे, तब उन्होंने अपनी खुद की डरावनी कहानी सुनाई.

“सच कहूं तो मैं ऐसे भागा जैसे इससे पहले कभी नहीं भागा था. हो सकता है बाकी लोग इतने भाग्यशाली न रहे हों,” उन्होंने बिदुर के एक परिवार से कहा, जो अपने बेटे को खोज रहा था. वह भी रेमल की तरह कंस्ट्रक्शन वर्कर था.

बिदुर में सेना का हेल्प डेस्क फ्लैश फ्लड में लापता हुए लोगों के नाम लगातार दर्ज कर रहा था. वहीं रेमल ने हालात को लेकर अपना एक डरावना अंदाजा लगाया था.

अपने लापता लोगों को खोज रहे परिवारों से वह एक सवाल पूछ रहे थे: “क्या आप बाढ़ वाले दिन शाम 5 बजे के बाद उनसे संपर्क कर पाए थे? उसी समय मुझे कॉल करने के लिए थोड़ा सिग्नल मिला था. अगर नहीं, तो मुझे शक है कि वे जिंदा हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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