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Thursday, 8 October, 2026
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MENAAP में गरीबी का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में, क्षेत्र के 48% गरीब वहीं रहते हैं: वर्ल्ड बैंक

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में दुनिया के 14% बेहद गरीब लोग रहते हैं. दुनिया के क्षेत्रों में यह आंकड़ा सिर्फ उप-सहारा अफ्रीका से कम है. गरीबी बढ़ने की मुख्य वजह पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ना रहा.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान में मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान (MENAAP) क्षेत्र में रोज़ाना 3 डॉलर से कम पर गुज़ारा करने वाले करीब आधे लोग रहते हैं. विश्व बैंक की मंगलवार को जारी इस क्षेत्र की आर्थिक रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र की कुल गरीबी में पाकिस्तान की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है. इसी वजह से पूरे क्षेत्र में गरीबी बढ़ी है. यही कारण है कि MENAAP दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां गरीबी महामारी से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई है और अभी भी बढ़ रही है.

तीन डॉलर 830 पाकिस्तानी रुपये और 290 रुपये हैं. 2018-19 और 2024-25 के बीच पाकिस्तान में 3.00 डॉलर की गरीबी रेखा पर गरीबी दर 6.4 प्रतिशत अंक और 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा पर 3.2 प्रतिशत अंक बढ़ी और यह 20 प्रतिशत से ज्यादा हो गई. गरीबी दर उस आबादी का अनुपात है जिसकी आय गरीबी रेखा से नीचे होती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान, सीरिया और यमन में इस क्षेत्र की गरीबी की इसी सीमा से नीचे रहने वाली आबादी का 47 प्रतिशत हिस्सा है.

इससे पहले फरवरी में देश के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी बढ़कर 11 साल के सबसे ऊंचे स्तर 29 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जबकि आय में असमानता 27 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी.

वर्ल्ड बैंक ने कहा कि इस क्षेत्र में दुनिया के बेहद गरीब लोगों का 14 प्रतिशत हिस्सा है. इस मामले में यह क्षेत्र सिर्फ उप-सहारा अफ्रीका से पीछे है.

रिपोर्ट में कहा गया, “इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ना रहा.” रिपोर्ट में बताया गया कि 2018-19 और 2024-25 के बीच पाकिस्तान में 3 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा पर गरीबी दर 6.4 प्रतिशत अंक और 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा पर 3.2 प्रतिशत अंक बढ़ी.

वर्ल्ड बैंक ने इस स्थिति के बिगड़ने की वजह कोविड-19 महामारी, 2022 की विनाशकारी बाढ़, महंगाई और मुद्रा की कीमत में गिरावट से पैदा हुआ आर्थिक संकट और लंबे समय तक चले आर्थिक सुधारों को बताया. इन सबने परिवारों की वास्तविक आय और रोजगार के मौकों को कमजोर किया.

ताज़ा अनुमानों के मुताबिक, 3 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा पर जिबूती, पाकिस्तान, सीरिया और यमन में गरीबी करीब 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो गई है.

वर्ल्ड बैंक ने इसके बाद अनुमान लगाया कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जबकि महंगाई 8.2 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, आबादी की बढ़ोतरी को ध्यान में रखने के बाद वास्तविक प्रति व्यक्ति GDP में सिर्फ 2.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है. पिछले साल यह 2.1 प्रतिशत थी.

सालों के दौरान बदलाव

वर्ल्ड बैंक की 2024 की अपडेट रिपोर्ट में पाकिस्तान के लिए वित्त वर्ष 2025 में 2.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में 3.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया गया था. वित्त वर्ष 2026 में महंगाई घटकर 9 प्रतिशत होने का अनुमान था. वहीं, चालू खाते का घाटा GDP का 0.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था.

2025 की MENAAP रिपोर्ट में पाकिस्तान की वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक वृद्धि 2.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 की वृद्धि 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. वर्ल्ड बैंक ने इस वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा GDP का 0.8 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. दोनों पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी ऐसे स्तर पर हैं जिन्हें संभाला जा सकता है.

2025 में सबसे बड़ा खतरा बाढ़ और कमजोर कृषि थी. 2026 में यह खाड़ी क्षेत्र का संघर्ष है, जिसकी वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, चालू खाते की स्थिति कमजोर होने, रेमिटेंस में संभावित कमी और अल नीनो के खतरे की चिंता है.

वर्ल्ड बैंक ने कहा कि पूरे क्षेत्र की सरकारों के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं. उन्हें बढ़ती कीमतों से परिवारों को बचाना है और साथ ही क्षेत्रीय संघर्षों से पैदा हुई मानवीय जरूरतों का भी जवाब देना है.

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. लेबनान, पाकिस्तान, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोल की कीमतें 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा बढ़ी हैं, जबकि पाकिस्तान और वेस्ट बैंक तथा गाजा में डीजल की कीमतें 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान “विकासशील तेल आयातक” देशों के समूह में है. इस समूह की अर्थव्यवस्था के 2026 में 4.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जबकि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तेज गिरावट आने का अनुमान है.

इसके अलावा, गरीब परिवार अपनी आय का 35–50 प्रतिशत हिस्सा खाने-पीने की चीज़ों पर खर्च करते हैं. इसलिए खाद्य और ईंधन की ज्यादा कीमतों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं परिवारों पर पड़ता है. पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल की कीमतें 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा बढ़ी हैं और संघर्ष शुरू होने के बाद से डीजल की कीमत 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है.

कुछ दूसरे देशों में कीमतों में बढ़ोतरी इससे भी ज्यादा रही. लेबनान में डीजल की कीमत 80 प्रतिशत से ज्यादा और UAE में करीब 70 प्रतिशत बढ़ी.

तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था होने के कारण पाकिस्तान की स्थिति खास तौर पर कमजोर है. जिबूती, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को और ट्यूनीशिया के साथ पाकिस्तान को भी भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने के कारण ज्यादा महंगाई और वस्तुओं की कीमतें बढ़ने, सरकार के पास खर्च करने की कम गुंजाइश, खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस में कमी और कर्ज लेने की ज्यादा लागत का खतरा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, साल के बीच तक पाकिस्तान में महंगाई करीब 11 प्रतिशत पहुंच गई थी. हालांकि, वित्त वर्ष के लिए 7.1 प्रतिशत का अनुमान पिछले साल की तुलना में कम है. रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 में इसके बढ़कर 8.2 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है.

राजकोषीय और बाहरी आर्थिक स्थिति के मामले में पाकिस्तान सरप्लस से बढ़ते घाटे की ओर चला गया है. इसे उन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है जिन पर “कर्ज या वित्तीय मदद का काफी दबाव” है. इस सूची में अल्जीरिया, जिबूती, इराक और मोरक्को भी शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे निपटने के लिए सरकार ने ईंधन और किसानों को लक्षित सहायता शुरू की है. सरकार व्यापक सब्सिडी की जगह लक्षित नकद मदद को बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ती है और इससे सरकार के वित्त पर कम दबाव पड़ता है.

इसके बाद रेमिटेंस की बात आती है. पाकिस्तान खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में कामगार भेजने वाला देश है. खाड़ी देशों में पर्यटन, निर्माण और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लंबे समय तक मंदी रहने से पाकिस्तान में आने वाली आय कमजोर हो सकती है. रिपोर्ट में रेमिटेंस में कमी को सामान्य तौर पर तेल आयात करने वाले देशों के लिए एक जोखिम बताया गया है.

वर्ल्ड बैंक ने 2005 में पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ दक्षिण एशिया क्षेत्र से हटाकर नए बनाए गए MENAAP समूह में शामिल किया था. MENAAP का मतलब मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान है.

पाकिस्तान की आर्थिक और बाहरी कर्ज की स्थिति धीरे-धीरे MENA देशों जैसी होती गई. पाकिस्तान का कर्ज-GDP अनुपात करीब 33.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र के दूसरे देशों के स्तर के आसपास है.

पाकिस्तान की जनसंख्या और रोजगार से जुड़ी कई विशेषताएं भी MENA देशों जैसी हैं. इनमें युवाओं पर ज्यादा निर्भरता, आबादी की तुलना में कम रोजगार और काम करने वाली आबादी की कम भागीदारी शामिल है. खास तौर पर महिलाओं की कामकाजी भागीदारी काफी कम है, जो इस पूरे क्षेत्र की एक बड़ी समस्या है.

रेमिटेंस, पूंजी के प्रवाह और ऊर्जा पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अब खाड़ी देशों और पूरे पश्चिम एशिया से ज्यादा जुड़ती जा रही है. ये संबंध पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों के साथ पाकिस्तान के अपेक्षाकृत सीमित आर्थिक जुड़ाव की तुलना में इनका असर ज्यादा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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