नई दिल्ली: पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत हो गई है, पत्रकार वजाहत सईद खान ने मंगलवार को दावा किया. बाद में उन्होंने अपना दावा वापस लेते हुए कहा कि यह पुष्टि हुई खबर नहीं थी.
पत्रकार ने दावा किया कि पाकिस्तान सेना के जनरल हेडक्वार्टर में मौजूद एक अज्ञात सूत्र ने उन्हें बताया कि PTI नेता की हिरासत में मौत हो गई है. वजाहत सईद खान ने 11 अगस्त को दो हिस्सों वाली एक सीरीज शेयर की थी: ‘Is Khan still with us’ (क्या खान अभी भी हमारे साथ हैं?) और ‘What happens after Khan’ (खान के बाद क्या होगा?).
हालांकि, पत्रकार ने बाद में एक लंबा स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि उनके सूत्रों ने वास्तव में कभी इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी.
अपने हालिया वीडियो में सईद खान ने यह अंतर समझाने की कोशिश की कि उनके सूत्रों ने उन्हें क्या बताया था और उनकी पहले की रिपोर्टिंग के आसपास फैले निष्कर्ष और डर क्या थे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने इमरान खान के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी, लेकिन उन्होंने यह सबूत नहीं दिया था कि उनकी मौत हो चुकी है.
“आइए, यह बिल्कुल साफ कर दें. उन्होंने यह पुष्टि नहीं की थी कि इमरान खान की मौत हो गई है,” उन्होंने कहा.
इसके बजाय, उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने ऐसी स्थिति बताई जिसे उन्होंने “गहरे और पंगु कर देने वाले डर” के रूप में बताया. उन्हें डर था कि शायद सबसे बुरा हो चुका है या होने वाला है.
“यह जनरलों की ओर से अपने प्रमुख पर दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है, ताकि इमरान खान का अकेलापन खत्म हो. वजाहात की DGC और कई अन्य बड़े जनरलों तक सीधी पहुंच है. उन्होंने एक एक्सक्लूसिव खबर दी थी कि हाफिज ने इमरान रियाज खान के अपहरण को सीधे तौर पर कैसे संभाला और आबपारा उन्हें रिहा करवाना चाहता था,” पाकिस्तानी कमेंटेटर मोईद अहमद ने कहा.
इसके बाद वजाहत सईद खान ने अपनी पहले की रिपोर्टिंग को इस कोशिश के तौर पर पेश किया कि अधिकारी यह सबूत दें कि इमरान खान जिंदा हैं, न कि यह पक्के तौर पर बताने के तौर पर कि उनकी मौत हो गई है.
उन्होंने पूछा, “आज हमने क्या हासिल किया? मैंने अधिकारियों को यह सबूत देने के लिए मजबूर किया है कि वह जिंदा हैं.”
पत्रकार ने कहा कि उनकी पहले की रिपोर्टिंग सेना के जनरल स्टाफ, मिलिट्री इंटेलिजेंस और C4I निदेशालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के साथ-साथ एक जूनियर कमीशंड अधिकारी से बातचीत पर आधारित थी. उनके मुताबिक, ये अधिकारी रावलपिंडी में सेना के मुख्यालय में तैनात थे.
उन्होंने कहा कि उन्हें मिली जानकारी इमरान खान की मौत का सबूत नहीं थी, बल्कि उनकी जेल में बंदी को लेकर असाधारण स्तर की गोपनीयता और कुछ सैन्य कर्मियों के बीच इस बात की चिंता थी कि उनके साथ क्या हुआ होगा.
उन्होंने कहा, “उन्होंने जिस बात की पुष्टि की, वह उनका अपना गहरा और पंगु कर देने वाला डर था कि शायद सबसे बुरा हो चुका है या होने वाला है. सेना इस समय असामान्य रूप से, डरावने तरीके से और बेहद चुप है और कुछ नहीं बता रही है.”
उन्होंने आगे कहा, “इससे भी बुरा यह है कि वह अपने ही लोगों पर नजर रख रही है और उन्हें निशाना बना रही है. जिस तरह वे आम नागरिकों पर कार्रवाई कर रहे हैं, उसी तरह वे अपने ही रैंकों को चुप करा रहे हैं और उन पर नजर रख रहे हैं. यह अभियान खुफिया अधिकारियों की एक बहुत छोटी और करीबी टीम चला रही है, जो सीधे सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल को रिपोर्ट करती है, जबकि बाकी सेना डरी हुई और हर समय शक में है.”
बातें, तथ्य नहीं
वजाहत सईद खान ने अदियाला जेल में बढ़ती सैन्य निगरानी वाली सुरक्षा व्यवस्था के बारे में भी बताया, जहां इमरान खान कैद हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मिलिट्री इंटेलिजेंस की एक यूनिट ने जेल के कामकाज में बड़ी भूमिका ले ली है और जेल के आसपास अत्याधुनिक निगरानी उपकरण लगाए गए हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके सूत्रों ने बताया है कि अधिकारी इस संभावना के लिए तैयारी कर रहे हैं कि इमरान खान के समर्थक जेल में घुसने की कोशिश कर सकते हैं.
उन्होंने कहा, “ये अफवाहें, ये अटकलें और ये डर वास्तविक चिंता से सामने आए हैं.”
वीडियो में कई बार सईद खान ने जोर देकर कहा कि उनके सूत्रों से मिली जानकारी इमरान खान की मौत का प्रमाणित सबूत नहीं थी. उन्होंने यह भी माना कि कुछ अधिकारियों के आकलन दस्तावेजी तथ्यों के बजाय डर और सेना के अंदर अनौपचारिक बातचीत पर आधारित थे.
उन्होंने कहा, “वे अपने निजी डर और अपने पेशेवर दायरे में चल रही बातचीत के आधार पर आकलन कर रहे थे.” उन्होंने कहा कि यह “वास्तविक सबूतों पर आधारित, आंकड़ों से साबित, प्रमाणित या दस्तावेजी तथ्य नहीं, बल्कि डर और अटकलें थीं.”
यह स्पष्टीकरण पाकिस्तान की सेना की जनसंपर्क शाखा, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टोरेट, की ओर से सईद खान की रिपोर्टिंग को गलत बताए जाने के बाद आया. उन्होंने इस प्रतिक्रिया का स्वागत किया, क्योंकि उनके मुताबिक, इमरान खान की स्थिति को लेकर महीनों की चुप्पी के बाद यह एक अहम घटनाक्रम था.
उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि ISPR ने जवाब दिया है, चाहे वह फर्जी हो या कुछ भी, क्योंकि इसका मतलब है कि इमरान जिंदा हैं.”
उन्होंने अपने वीडियो में यह भी कहा कि बुशरा बीबी के परिवार के सदस्यों ने जेल की यात्रा के दौरान CCTV में खान को देखा था. बुशरा बीबी खान की पत्नी हैं.
उन्होंने कहा, “उन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने CCTV में उन्हें अपने पैरों पर चलते हुए देखा.”
उन्होंने कहा कि परिवार ने यह भी बताया था कि इमरान खान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसमें नजर कमजोर होना और ब्लड प्रेशर का बहुत बढ़ जाना शामिल है. उन्हें हाल ही में अस्पताल भी ले जाया गया था. इन बातों की खबर पहले स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी आ चुकी है.
सईद खान ने कहा कि वह पूर्व प्रधानमंत्री को एक दशक से ज्यादा समय से जानते हैं और उनका इंटरव्यू भी कर चुके हैं. उन्होंने अपनी पत्रकारिता के रिकॉर्ड का बचाव किया और उन दावों को खारिज किया कि उनकी रिपोर्टिंग इमरान खान या उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थन में थी.
उन्होंने अपने वीडियो में कहा, “मैंने पाकिस्तान सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया. एक वरिष्ठ अधिकारी GS निदेशालय में हैं, जिसे जनरल स्टाफ डायरेक्टोरेट के नाम से भी जाना जाता है और जो सेना का ऑपरेशनल सेंटर है. एक वरिष्ठ अधिकारी MI निदेशालय में हैं, यानी मिलिट्री इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट में, जो सेना की अंदरूनी आंख और कान है. और एक वरिष्ठ अधिकारी C4I निदेशालय में हैं, जो मूल रूप से सभी संचार पर नजर रखता है.
ये लोग बलूचिस्तान या वजीरिस्तान में किसी दूर-दराज की चौकी पर नहीं हैं. वे GHQ में हैं, जो रावलपिंडी में सेना का जनरल हेडक्वार्टर है. वे उसी जगह के अंदर हैं, जहां से पूरी व्यवस्था चलती है,” उन्होंने अपने वीडियो में कहा.
उन्होंने कहा, “मेरी रिपोर्टिंग खान के पक्ष में नहीं है. मैं सिर्फ रिपोर्टिंग कर रहा हूं.”
उन्होंने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री को अपना दोस्त, पूर्व इंटरव्यू देने वाला व्यक्ति और राष्ट्रीय प्रतीक बताया, लेकिन कहा कि इस रिश्ते ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री के लिए राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाली खबरें प्रकाशित करने से नहीं रोका.
उन्होंने कहा, “पत्रकारिता का मकसद राष्ट्रीय सोच को चुनौती देना है. इसका मकसद देश में हो रही बातचीत को बदलना है. इसका मकसद सच को सत्ता के सामने रखकर और पारदर्शिता की मांग करके राजनीति और नागरिकों को बेहतर और ज्यादा जानकारी वाले फैसले लेने में मदद करना है.”
72 साल के इमरान खान 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए थे. अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया. इसके बाद से उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ा और 2024 के आम चुनाव में उसे प्रभावी रूप से बाहर कर दिया गया.
खान को पहली बार 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. उन्हें 5 अगस्त 2023 को फिर गिरफ्तार किया गया. तब से वह जेल में हैं. जनवरी 2025 में आधिकारिक गोपनीयता और बुशरा बीबी खान से उनकी शादी से जुड़े मामलों में खान को बरी कर दिया गया था. हालांकि, वह जेल में ही हैं और एक भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं. इसी मामले में बुशरा बीबी को सात साल की सजा सुनाई गई थी.
दिसंबर 2025 में खान और बुशरा बीबी को सरकारी उपहारों से जुड़े एक अलग मामले में 17-17 साल की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई गई.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस साल 4 अगस्त को इमरान खान की गिरफ्तारी की तीसरी सालगिरह पर एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया, “तीन साल से पाकिस्तान के अधिकारी इमरान खान को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से व्यवस्थित तरीके से वंचित कर रहे हैं, उन्हें लंबे समय तक अकेले रखा गया है और मेडिकल सुविधा तथा परिवार से मिलने के अधिकार को सीमित किया गया है. उन्हें आठ महीने से ज्यादा समय से अपने परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है और बताया गया है कि उनकी नजर काफी कमजोर हो गई है. दिसंबर 2025 से उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी खान को नियमित रूप से कानूनी सलाह लेने की सुविधा भी नहीं दी गई है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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