नई दिल्ली: 3 अगस्त को दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यौन उत्पीड़न के आरोपों को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में “बुरी तरह नाकाम” रहा.
इस मामले को लेकर भारत के कई बड़े पहलवानों ने देशभर में प्रदर्शन किया था. इसमें छह महिला पहलवानों ने आरोप लगाए थे. आरोपों में गलत तरीके से छूना, अनुचित तरीके से छूना, जबरदस्ती शारीरिक संपर्क करना और एक मामले में मेडिकल मदद के बदले यौन संबंध की मांग करना शामिल था.
अदालत ने कहा कि सबूतों में “महत्वपूर्ण विरोधाभास”, “तथ्यात्मक असंभवताएं” और “राजनीति से प्रेरित” साजिश के संकेत थे.
फैसला सबूतों पर टिका था, या यूं कहें कि अदालत को सबूतों में गंभीर समस्याएं मिलीं.
जज ने शिकायतकर्ताओं के शुरुआती बयानों में विरोधाभास, आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसी बातें जो कुछ कथित घटनाओं को तथ्यात्मक रूप से असंभव बनाती थीं, बाद में अपने बयान से मुकरने वाली दो शिकायतकर्ताओं और शिकायतों में ऐसी समानताओं की ओर इशारा किया, जिन्हें अदालत ने पहले से तैयारी और शिकायतकर्ताओं को सिखाए जाने के सबूत के तौर पर देखा.
पांच शिकायतकर्ता
चार्जशीट में 2016 से 2022 के बीच पांच मुख्य शिकायतकर्ताओं से जुड़े कई मामलों का जिक्र था.
पहली शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सिंह ने 2016 में मंगोलिया के एक रेस्टोरेंट में उसके स्तन और पेट को गलत तरीके से छुआ. 16 अक्टूबर 2017 को WFI कार्यालय में उसकी हथेली, घुटने, जांघों और कंधों को गलत तरीके से छुआ. 17 अक्टूबर 2017 को WFI कार्यालय में उसके कंधे दबाए, पैरों को छुआ और स्तनों को गलत तरीके से छुआ. जनवरी 2018 में सिरी फोर्ट स्टेडियम और अगस्त 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में उसे 15-20 सेकंड तक कसकर गले लगाया. 2019 में कजाकिस्तान में उसके स्तनों और पेट को गलत तरीके से छुआ.
दूसरी शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सिंह ने अगस्त 2022 में बुल्गारिया में उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाकर उसके पेट और नाभि को छुआ. बाद में मेडिकल इलाज का खर्च उठाने के बदले यौन संबंध की मांग की.
तीसरी शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फरवरी 2018 में किर्गिस्तान में सिंह ने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाकर उसके स्तन को गलत तरीके से छुआ और बाद में जून 2019 में WFI कार्यालय में उसे अपनी ओर खींचकर जबरदस्ती शारीरिक संपर्क किया.
चौथी शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 25 मार्च 2022 को लखनऊ के SAI स्टेडियम में ग्रुप फोटो के दौरान सिंह ने उसके कूल्हों को छुआ या गलत तरीके से छुआ.
पांचवीं शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मार्च 2021 में कर्नाटक के बेल्लारी में सिंह ने फोटो के लिए उसके कंधों से उसे जबरदस्ती अपनी ओर खींचा और उसके पेशेवर करियर को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी.
‘घातक’ मंगोलिया और तुर्की वाला विरोधाभास
मुख्य शिकायतकर्ताओं में से एक ने छेड़छाड़ की कई घटनाओं का आरोप लगाया था. पहला मामला 2016 में मंगोलिया में होने का आरोप लगाया गया था, जहां उसने कहा था कि जब वह रेस्टोरेंट में खाना खा रही थी, तब बृज भूषण ने उसे गलत तरीके से छुआ.
हालांकि, अदालत ने उसके पहले के बयानों में बड़े विरोधाभास के कारण इस आरोप को खारिज कर दिया.
फरवरी 2023 में निगरानी समिति के सामने दिए गए एक पहले के हलफनामे में पीड़िता ने कहा था कि यह घटना 2015 में तुर्की में हुई थी, न कि 2016 में मंगोलिया में.
अदालत ने कहा कि पहली घटना को लेकर बयान में इस तरह का बदलाव “अभियोजन की कहानी के लिए घातक है” और “इस अदालत का विश्वास नहीं जगाता”.
उसने यह भी आरोप लगाया कि 16 और 17 अक्टूबर 2017 को नई दिल्ली में बृज भूषण के घर स्थित उनके कार्यालय में उसके साथ छेड़छाड़ की गई. उसने दावा किया कि एक कारण बताओ नोटिस को लेकर हुई बैठक के दौरान उन्होंने उसकी जांघों, पैरों और कंधों को गलत तरीके से छुआ.
अदालत ने अभियोजन पक्ष के अपने गवाहों से मिले सबूतों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया.
एक गवाह के दिए सबूत और फेसबुक पोस्ट से इसकी पुष्टि हुई कि उन तारीखों पर बृज भूषण उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक चयन ट्रायल के लिए मौजूद थे.
अदालत ने कहा कि संबंधित समय पर सिंह का दिल्ली में होना संभव नहीं था, इसलिए यह आरोप टिक नहीं पाया. इसके अलावा, अदालत ने कहा कि पीड़िता ने घटना की तारीख में महत्वपूर्ण बदलाव किया था. उसने 15 अक्टूबर, रविवार की तारीख को बदलकर 16 अक्टूबर कर दिया था, क्योंकि 15 अक्टूबर को कार्यालय बंद रहता है. इससे कहानी को ज्यादा भरोसेमंद दिखाया जा सके.
किर्गिस्तान में तथ्यात्मक असंभवताएं
एक अन्य शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 2018 में किर्गिस्तान के बिश्केक में एशियन चैंपियनशिप के दौरान बृज भूषण उसके पास आए, जब वह वार्म-अप कर रही थी और सांस की जांच करने के बहाने उसके सीने और पेट पर हाथ रखा.
बचाव पक्ष ने आधिकारिक टूर्नामेंट शेड्यूल पेश करके इस आरोप को खारिज कर दिया. पीड़िता ने कहा था कि 28 फरवरी 2018 को उसके मुकाबलों के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ हुई. लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी कैटेगरी के मुकाबले वास्तव में 1 मार्च 2018 को होने थे.
अदालत ने कहा कि उसके बयान में “तथ्यात्मक असंभवताएं” थीं और उस पर “पूरी तरह भरोसा करना सुरक्षित नहीं था”.
पीड़ितों का दावा, सिंह को फंसाने के लिए बनाया गया दबाव
अभियोजन पक्ष के मामले को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब दो प्रमुख पीड़िताएं “अपने पहले के बयानों से मुकर गईं” और उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया.
जिरह के दौरान उनमें से एक ने साफ कहा कि “उसके साथ कोई गलत घटना नहीं हुई थी” और उसने मूल शिकायत “दो अन्य शिकायतकर्ताओं के दबाव और कहने पर” साइन की थी. उसने दावा किया कि उससे कहा गया था कि अगर वे “नेताजी” (बृज भूषण) को नहीं हटाते हैं, तो हरियाणा के पहलवानों का भविष्य खराब हो जाएगा.
एक अन्य शिकायतकर्ता ने रोहतक की महादेव अकादमी में हुई एक बैठक के बारे में बताया, जहां पांच या छह महिला पहलवानों को बृज भूषण के खिलाफ क्या कहना है, यह सिखाया गया था.
उसने माना कि शिकायत अंग्रेजी में लिखी गई थी, ऐसी भाषा जिसे वह समझती नहीं थी, और उसे इसे याद करने के लिए कहा गया था. उसने अदालत से कहा कि बृज भूषण ने उसे कभी परेशान नहीं किया था और कर्नाटक में फोटो के लिए उसे खींचने की पूरी कहानी बनाई गई थी.
फैसले में कहा गया कि कई पीड़ितों ने अपनी शिकायतों में एक ही पता, एक शिकायतकर्ता का पता, दिया था, जबकि वे वहां रहती नहीं थीं. अदालत ने माना कि गवाहों को “सिखाया गया” था ताकि उनके बयान एक जैसे रहें.
इसके अलावा, अदालत ने परिवार के सदस्यों की ओर से बदले की कार्रवाई या तुरंत शिकायत नहीं किए जाने को “अजीब और असामान्य” बताया.
सिरी फोर्ट और जकार्ता: सार्वजनिक जगहें और कोई गवाह नहीं
2018 में सिरी फोर्ट स्टेडियम और जकार्ता में एशियन गेम्स के दौरान हुई घटनाओं के आरोपों को भी खारिज कर दिया गया. एक शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसे 15-20 सेकंड तक जबरदस्ती गले लगाया गया, जबकि आसपास बहुत सारे लोग मौजूद थे.
अदालत ने कहा कि उसे यह “बहुत अस्वाभाविक और असंभव” लगा कि परिवार, मीडिया और कोचों की मौजूदगी वाले भीड़भाड़ वाले स्टेडियम में ऐसी घटना हो सकती है और कोई बीच में नहीं आएगा या पीड़िता मदद के लिए आवाज नहीं लगाएगी.
जकार्ता की घटना को लेकर अदालत ने कहा कि सोने का पदक जीतने के बाद गले लगाना एक “जश्न” के पल में हुआ था और तस्वीरों में असहजता के बजाय “स्वाभाविक भावनाएं” दिखाई दे रही थीं.
पीड़िता के शुरुआती बयानों में इन गंभीर आरोपों का जिक्र नहीं था. बाद में इन्हें शामिल किए जाने पर अदालत ने इसे “संदिग्ध और झूठा” बताया.
अंत में, अदालत ने कहा कि अपने बयान से मुकरने वाली पीड़ितों के बयानों ने अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह कमजोर कर दिया और यह सामने आया कि आरोप “दो शिकायतकर्ताओं और महादेव अकादमी के कोचों के कहने पर सामूहिक रूप से गढ़े गए” थे और इसके पीछे “गहरी साजिश थी, जो राजनीतिक रूप से प्रेरित लगती है”.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: मोदी सरकार उस पेपर लीक कानून को और सख्त बना रही है, जिसका अब तक किसी पर असर नहीं हुआ