नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की नई सरकार द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा पर तेज़ी से कांटेदार तार लगाने की घोषणा के बाद बांग्लादेश ने सोमवार को कहा कि अब वह सीमा मुद्दों पर पहले की तरह झुकेगा नहीं.
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पत्रकारों से कहा, “हम झुकेंगे नहीं. हसीना सरकार के समय जैसी सीमा स्थिति थी, अब वैसी नहीं रहेगी. यह बांग्लादेश अब उस कठिन दौर वाला बांग्लादेश नहीं है. अब हम सिर्फ चुपचाप देखने वाले नहीं रहेंगे. देश की अपनी योजनाएं हैं.”
उन्होंने बांग्ला में कहा, “अगर लोगों को मारकर सीमा पार धकेला जाएगा, जैसा हमने हसीना के समय देखा, तो सीमा की स्थिति फिर वैसी नहीं होगी. हम बैठकर देखते नहीं रहेंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोग कांटेदार तार से नहीं डरते. बांग्लादेश सरकार भी कांटेदार तार से नहीं डरती. जहां हमें बोलने की ज़रूरत होगी, हम बोलेंगे.”
कबीर की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के उस ऐलान के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार 45 दिनों के भीतर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को जमीन सौंप देगी, ताकि बांग्लादेश सीमा पर नई फेंसिंग परियोजनाएं शुरू की जा सकें.
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है. फरवरी 2025 की सरकारी जानकारी के मुताबिक, इसमें से 3,232.218 किलोमीटर हिस्से में फेंसिंग पूरी हो चुकी है.
करीब 173.81 किलोमीटर सीमा क्षेत्र ऐसा है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और इलाके की वजह से फेंसिंग संभव नहीं मानी जाती.
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि बाकी काम कई कारणों से धीमा पड़ा है. इनमें ज़मीन अधिग्रहण विवाद, बांग्लादेशी सीमा अधिकारियों की आपत्तियां, कम निर्माण अवधि और भूस्खलन व दलदली इलाकों जैसी मुश्किल परिस्थितियां शामिल हैं.
जनवरी 2025 में बिना फेंसिंग वाले हिस्सों में काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, क्योंकि आशंका थी कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है.
यह फैसला पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के सुकदेवपुर इलाके में BSF और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच हुए टकराव के बाद लिया गया था.
विवाद तब शुरू हुआ, जब भारतीय जवान एक लाइन वाली कांटेदार तार लगाने की कोशिश कर रहे थे और बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई.
सोमवार को शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि फेंसिंग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पिछली सरकार ने अवैध घुसपैठियों को बचाने के लिए इस प्रक्रिया में देरी की.
हालांकि, कबीर ने इस बयान को चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि चुनावों में दिए गए बयान हमेशा शासन में नहीं बदलते. उन्होंने कहा, “चुनावी बयानबाजी कई बार बहुत ज्यादा होती है, लेकिन असली शासन अलग चीज़ है.”
उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश का रिश्ता भारत की केंद्र सरकार से है, किसी राज्य सरकार से नहीं.
उन्होंने कहा, “ढाका भारत की घरेलू राजनीति में दखल नहीं देना चाहता.”
भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, फेंसिंग परियोजना का उद्देश्य सीमा पार अपराधों—जैसे तस्करी, मानव तस्करी और अपराधी समूहों की आवाजाही को रोकना है.
नई दिल्ली का कहना है कि वह दोनों देशों के बीच हुए सभी समझौतों और BSF-BGB के बीच तय सीमा प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है. तनाव के बावजूद कबीर ने कहा कि दोनों सरकारें बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
उन्होंने कहा, “चुनौतियां रहेंगी और कुछ मामलों में बड़ी चुनौतियां भी होंगी, लेकिन जब बातचीत का रास्ता खुला रहता है, तब समाधान के लिए पहल की जा सकती है.”
पिछले हफ्ते बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चीन यात्रा से पहले कहा था कि ढाका तीस्ता नदी परियोजना में निवेश और प्रोजेक्ट के लिए बीजिंग की ओर देखेगा.
तीस्ता जल बंटवारा विवाद भारत और बांग्लादेश के बीच करीब चार दशक पुराना है.
2011 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित जल बंटवारा समझौते को रोक दिया था.
रहमान ने ढाका में पत्रकारों से कहा, “बांग्लादेश सिर्फ चुप बैठा नहीं रह सकता.”
उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी समेत अन्य नेताओं के साथ होने वाली बैठकों में तीस्ता परियोजना पर “निश्चित रूप से” चर्चा होगी.
रहमान की वापसी के बाद कबीर ने कहा कि तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर बातचीत में लंबे समय से चली आ रही रुकावट अब शायद कम हो सकती है.
उन्होंने कहा, “अब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार है. हमें उम्मीद है कि अब बाधाएं कम होंगी.”
उन्होंने चीन के साथ बांग्लादेश के बढ़ते रिश्तों का भी जिक्र किया और बीजिंग को “महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझेदार” बताया.
उन्होंने संकेत दिया कि तारिक रहमान सरकार में दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं.
कबीर ने कहा कि चीन का एक्सिम बैंक लंबे समय से चर्चा में रही तीस्ता परियोजना को फंड करेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण शुरू होने से पहले और अध्ययन व बातचीत की ज़रूरत होगी.
पहले की रिपोर्टों में कहा गया था कि खलीलुर रहमान की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री रहमान भी जून में चीन जा सकते हैं. हालांकि, कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री रहमान का चीन दौरा तय माना जा रहा है, लेकिन तारीख अभी तय नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, “चीन एक अहम साझेदार है, इसलिए प्रधानमंत्री निश्चित रूप से बीजिंग जाएंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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