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Saturday, 29 August, 2026
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कूटनीतिक दबाव के बाद नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की रेस्क्यू टीम को दी मंजूरी

नेपाल ने भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित इलाकों में विदेशी बचावकर्मियों को न आने देने का अपना फैसला बदल दिया है. अब चार देशों की विशेषज्ञ टीमों को सुरंगों में बचाव अभियान, DNA टेस्ट और फॉरेंसिक जांच के लिए मंजूरी दी गई है.

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नई दिल्ली: नेपाल सरकार ने शुक्रवार को भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से तबाह इलाकों में अंतरराष्ट्रीय सर्च और रेस्क्यू टीमों को आने से रोकने का अपना पहले का फैसला बदल दिया. यह फैसला उन देशों के बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बाद लिया गया, जिनके नागरिक इस आपदा के बाद से अब भी लापता हैं.

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अब सीमित विदेशी मदद लेने के लिए तैयार हो गई है. खासतौर पर हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने, DNA टेस्ट और फॉरेंसिक जांच के लिए विदेशी सहायता ली जाएगी.

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के आकलन के आधार पर नेपाल सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति के जरिए भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की मदद को मंजूरी दी है. इन चार देशों को सुरंगों में बचाव, DNA टेस्ट और फॉरेंसिक जांच का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को भेजने की अनुमति दी जाएगी.

कई अन्य सरकारों ने भी नेपाल को राहत सहायता देने और विशेषज्ञ टीम भेजने की इच्छा जताई है. हालांकि, नेपाल ने उन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है.

सरकार ने पहले कहा था कि नेपाल के अपने बचावकर्मियों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की क्षमता है और दूसरे देशों की टीमों को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

अचानक आई बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे समुदायों को बुरी तरह तबाह कर दिया. शुक्रवार तक 600 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर थी, जबकि कम से कम 1,000 लोग अब भी लापता थे. इनमें 31 देशों के 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

नेपाल टूरिज्म बोर्ड के ताजा रिकॉर्ड के मुताबिक, लापता विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा 178 भारतीय हैं. इसके बाद 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और ब्रिटेन के 33 लोग समेत अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं.

भारत ने सार्वजनिक रूप से नेपाल को विशेषज्ञ टीम भेजने की पेशकश की है.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि नई दिल्ली ने नेपाल को एक टनल-रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और भारत की नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के जवान भेजने की पेशकश की है.

उसी दिन भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से इस आपदा को लेकर बात की. जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “मैंने सुबह नेपाल के विदेश मंत्री से बात की. हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है. वे इन प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं.”

भारत नेपाल को राहत सामग्री की चौथी खेप भी भेज रहा था. उन्होंने कहा कि इस खेप में 11 सदस्यीय टीम भी शामिल है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञ हैं.

दक्षिण कोरिया ने भी सार्वजनिक रूप से मदद की पेशकश की है. दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने गुरुवार को खनाल से बात की और नेपाल में दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. इनमें नौ लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं.

चो ने नेपाल सरकार से यह भी कहा कि वह आपदा क्षेत्र में भेजी गई तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली टीम के साथ सहयोग करे, ताकि वह सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा ले सके.

भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विदेशी टीमों को रासुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर सुरंगों के अंदर चल रहे बचाव अभियान में मदद करने की अनुमति दी जाएगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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