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Saturday, 29 August, 2026
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शहज़ाद भट्टी का नेटवर्क: भारत में कैसे काम करती है गैंगस्टर की ‘शैडो आर्मी’

गृह मंत्रालय द्वारा 'शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क' के तौर पर पहचाने गए इस सीमा-पार इंफ्रास्ट्रक्चर पर अब केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों का दबाव बढ़ रहा है.

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी की बहुत सोच-समझकर बनाई गई छवि और जमीन पर उसके सक्रिय नेटवर्क के पीछे उसके कुछ खास और भरोसेमंद साथी हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे काम करते रहे हैं.

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और उत्तराखंड की पुलिस जांच में इन करीबी साथियों की पहचान हुई है, जिनमें आबिद जट्ट और राणा हुनैन शामिल हैं. उनका काम, जैसा कि उम्मीद थी, मॉड्यूल तैयार करना और भारतीय शहरों में गैरकानूनी कामों को अंजाम देना है.

जांच में पता चला है कि जहां जट्ट और राणा कमजोर युवाओं को पहचानने और उन्हें भर्ती करने पर ध्यान देते हैं, वहीं इस सिंडिकेट की रीढ़ माने जाने वाले अजमल गुज्जर और हमद मेमन जैसे लोग पैसे और दूसरे ऑपरेशनल काम संभालते हैं.

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सभी पाकिस्तान की ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के इशारे पर काम कर रहे हैं. वे हवाला के पैसे संभालते हैं, तस्करी के हथियार बांटते हैं और आरोपियों के लिए सुरक्षित ठिकानों का इंतिजाम करते हैं.”

गृह मंत्रालय (MHA) ने इस सीमा पार नेटवर्क की पहचान शाहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) के नाम से की है. अब केंद्रीय एजेंसियां और राज्यों की पुलिस इस नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही हैं. गृह मंत्रालय ने 17 अगस्त को बताया था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट के तहत 80 से ज्यादा FIR दर्ज की गई हैं और 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

MHA के बयान के मुताबिक, जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया गया है. इसमें IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए CCTV कैमरे शामिल हैं. भट्टी की सोशल मीडिया मौजूदगी पर भी ध्यान दिया जा रहा है. अब तक 100 से ज्यादा टेकडाउन नोटिस जारी किए जा चुके हैं.

भर्ती का नेटवर्क

SBN का ऑपरेशनल नेटवर्क जट्ट और राणा चलाते हैं. दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, जट्ट और राणा भट्टी के “बाएं और दाएं हाथ” की तरह काम करते हैं. अधिकारी ने कहा, “वे सीधे भर्ती, लॉजिस्टिक्स और हथियारों का काम संभालते हैं.”

अधिकारी ने कहा कि शुरुआत में भट्टी खुद सभी जमीनी स्तर के लोगों से एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए सीधे संपर्क में रहता था. “जब एजेंसियों ने उन्हें गिरफ्तार करना शुरू किया, तो उसके करीबी साथियों ने यह काम संभाल लिया. जट्ट और राणा रोजमर्रा की बातचीत संभालते थे और जमीन पर होने वाली गतिविधियों को अंजाम देने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करते थे.”

भर्ती की रणनीति में 18 से 25 साल की उम्र के ऐसे युवाओं को निशाना बनाया जाता है जो आसानी से प्रभावित हो सकते हैं, बेरोजगार हों या आर्थिक रूप से बहुत परेशान हों.

ऐसे ही एक मामले में देहरादून में 18 साल के एक गैराज कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था. उसे ‘राणा भाई’ ने भर्ती किया था.

अधिकारी ने कहा, “पूछताछ में पता चला कि ‘राणा भाई’ सोशल मीडिया के जरिए उस युवक से संपर्क कर रहा था. उसने नेपाल के रास्ते उसे दुबई में नौकरी दिलाने का वादा किया था. उसने दिल्ली से उठाकर ले जाने के लिए इटालियन पिस्तौल भी तैयार करवाई थी, जिनका इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जाना था.”

अधिकारी ने कहा, “भट्टी पोस्टर बॉय है. असल में जट्ट और राणा यह पहचानते हैं कि कौन लोग इतने वफादार होंगे कि असली अपराध कर सकें.”

तस्करी का कारोबार

एक तीसरे अधिकारी ने कहा कि भर्ती किए गए लोगों को शुरुआत में छोटे स्तर के काम दिए जाते हैं, जैसे पोस्टर लगाना, तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान जैसे संगठनों के नाम से ग्रैफिटी या दीवारों पर लिखना, या रेकी करना. “पहला मकसद उनकी वफादारी जांचना होता है.”

सूत्र ने बताया कि इसके लिए करीब 2,000 से 5,000 रुपये या कभी-कभी 7,000 रुपये तक की रकम तुरंत UPI/QR कोड के जरिए भेजी जाती है.

“जब भर्ती किया गया व्यक्ति अपनी वफादारी साबित कर देता है, तो जट्ट और राणा उसे हथियार पहुंचाने, पेट्रोल बम या ग्रेनेड फेंकने और सुरक्षा चौकियों तथा पुलिस स्टेशनों की रेकी करने के लिए भेजते हैं.”

सोशल मीडिया के जरिए जमीनी लोगों की भर्ती जरूरी है, लेकिन यह पूरा नेटवर्क पैसों और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ पर निर्भर करता है. अजमल गुज्जर और हम्माद मेमन सीमा पार तस्करी और ऑपरेशनल काम संभालते हैं.

ऊपर बताए गए अधिकारियों में से एक ने कहा कि जांच में पता चला है कि हम्माद मेमन ऑनलाइन भर्ती से जुड़ी लॉजिस्टिक्स संभालता है. “वह ऐसे SIM कार्ड हासिल करता है जिन्हें फेंक दिया जा सकता है और सोशल मीडिया पर संपर्क के ऐसे माध्यम बनाता है, जिनके जरिए आर्थिक परेशानी में फंसे लोगों से संपर्क किया जाता है.”

अधिकारी ने कहा, “वे जरूरत के हिसाब से उनसे संपर्क करते हैं.” मेमन को ऐसे काम दिए जाते हैं जिनमें अवैध SIM कार्ड हासिल करने से लेकर पेट्रोल बम और ग्रेनेड फेंकने तक के काम शामिल हैं.

ऑपरेशनल स्तर पर गुज्जर तस्करी करके लाए गए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों के वितरण का काम संभालता है.

दिल्ली-NCR में काम कर रहे एक मॉड्यूल की स्पेशल सेल की जांच, जिसके बारे में दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट किया था, से पता चलता है कि “गुज्जर ने हथियार खरीदने वाले सोशल मीडिया यूजर्स से सीधे संपर्क बनाया था.”

यह नेटवर्क एन्क्रिप्टेड ऐप्स, ऐसे नंबरों जिनका इस्तेमाल करके उन्हें फेंक दिया जाता है, हवाला चैनलों, स्कैनर के जरिए किए गए वित्तीय लेन-देन और सामान पहुंचाने के लिए छिपी हुई जगहों के इस्तेमाल के तरीके पर चलता था.

एक खास मामले में आरिफ नाम के एक ऑपरेटिव ने गुज्जर से 1 लाख रुपये में जिगाना पिस्तौल खरीदी. पैसे दुबई में काम करने वाले लोगों से जुड़े UPI के जरिए भेजे गए और फिर यह रकम भारत में नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाई गई.

हथियार मिलने के बाद गुज्जर ने भर्ती किए गए लोगों को दिल्ली-NCR में हेरोइन, जिसे पंजाब में आमतौर पर ‘चिट्टा’ कहा जाता है, की तस्करी करने का काम दिया. पहले की जांच में पता चला था कि आमने-सामने संपर्क से बचने के लिए नशीले पदार्थों की खेप छिपी हुई जगहों पर छोड़ दी जाती थी.

इसके अलावा, गुज्जर को जमीन पर रेकी का काम भी समन्वित करना होता है. एक पुलिस सूत्र ने कहा, “भर्ती किए गए लोगों को हरियाणा में लोकप्रिय खाने की जगहों, प्रमुख लोगों और दिल्ली-NCR में संवेदनशील ठिकानों जैसे हाई-प्रोफाइल टारगेट की तस्वीरें लेने और वीडियो बनाकर WhatsApp और Signal जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भेजने को कहा जाता था.”

स्थानीय आपराधिक नेटवर्क भी इस लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा हैं. उदाहरण के लिए, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर दीपक अग्रोला, जिसके खिलाफ 23 मामले दर्ज हैं, दिल्ली की मंडोली जेल से भट्टी और गुज्जर के सीधे संपर्क में था. इसके लिए उसने जेल में छिपाकर रखे गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया.

इन चैट्स के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने कहा कि अग्रोला, एक ही समुदाय से होने की वजह से, गुज्जर को अनौपचारिक तौर पर ‘गुज्जर भाई’ कहकर संबोधित करता था और वह एक संदेश भेजकर हथियार और ड्रग्स हासिल कर सकता था.

कट्टरपंथ की ओर ले जाना और हमला करवाना

अपराधी से सोशल मीडिया स्टार बने जफर सुपारी का नाम भी पुलिस की जांच में सामने आया है.

चित्तौड़गढ़ जिला स्पेशल टीम (DST) और बासी पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था. यह संदिग्ध भट्टी, गुर्जर और सुपारी जैसे पाकिस्तानी गैंगस्टरों को सोशल मीडिया पर फॉलो करता था.

राजस्थान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भट्टी अपने फॉलोअर्स के सामने जो “लाइफस्टाइल” दिखाता है, वही वजह है कि ज्यादातर लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं. “दुबई से फोटो पोस्ट करना, आधुनिक हथियार चलाना, लग्जरी कारें और महंगे फोन दिखाना. संदेश यह है कि अगर भट्टी अपराध कर सकता है और ऐसी लाइफस्टाइल जी सकता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं.”

उत्तराखंड STF (स्पेशल टास्क फोर्स) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस नेटवर्क में कोई धर्म नहीं है.” उन्होंने कहा कि ज्यादातर युवा भर्ती भट्टी की सोशल मीडिया मौजूदगी और उसके दिखाए जाने वाले “शानदार जीवन” से प्रभावित होते हैं.

भट्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट Shehzad Bhatti001 और Shahzad Bhatti002 जैसे यूजरनेम से पहचाने जा सकते हैं.

STF अधिकारी ने कहा, “यही वादा और सपना उन्हें दिखाया जाता है. गुमराह किए गए युवा लड़कों से कहा जाता है कि भट्टी के साथ काम करने पर उन्हें दुबई में शानदार जिंदगी मिल सकती है. वे बहुत पैसा कमा सकते हैं. उन्हें सिर्फ भारत विरोधी गतिविधियां करनी होंगी.”

हरियाणा STF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में 150 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से ज्यादातर सीधे Instagram और Facebook के जरिए जुड़े थे.

अधिकारी के मुताबिक, इन संदिग्धों से कहा गया था कि हथियारों को एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंचाने जैसे काम पूरे करने पर उनके बैंक खातों में 7,000 से 10,000 रुपये तक भेजे जाएंगे.

” SBN उन लोगों के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर नजर रखता है जो उसके कंटेंट से जुड़ते हैं. कौन फोटो या वीडियो को लाइक करता है, कौन कमेंट करता है. हर चीज पर नजर रखी जाती है.”

काम को अंजाम देने के लिए नेटवर्क तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान जैसी एक नकली पहचान का इस्तेमाल करता है. माना जाता है कि तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान एक छोटे और बहुत कम पहचाने जाने वाले समूह की “नकली पहचान” है, जिसके स्वतंत्र रूप से मौजूद होने का कोई स्पष्ट सबूत नहीं है और जिसके सदस्यों के कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संबंध हैं.

स्पेशल सेल को पहले सोहेल नाम का एक ऑपरेटिव मिला था. उसे दिल्ली और फरीदाबाद में तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के पोस्टर लगाने के लिए 5,000 रुपये दिए गए थे. उसे इसका वीडियो सबूत भी एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भट्टी को भेजना था.

उत्तर प्रदेश STF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हैंडलर्स ऑपरेटिव्स को ग्रैफिटी बनाने और सुरक्षा प्रतिष्ठानों तथा पुलिस चौकियों की रेकी करने के लिए भी कहते हैं, ताकि एक बड़े और संगठित आतंकी संगठन की मौजूदगी का भ्रम पैदा किया जा सके.”

UP STF ने इनमें से कुछ हैंडलर्स की पहचान की है. इनमें आबिद जट्ट, हम्माद मेमन उर्फ हम्माद बरकती, जावेद पाकिस्तानी, रजा भाई पाकिस्तानी, अजमल गुज्जर पाकिस्तानी, राशिद भट्टी, राणा हुनैन, मेजर इकबाल, मेजर हमीद और मेजर अनवर शामिल हैं.

UP STF के अधिकारी के मुताबिक, भट्टी खुद और अपने नेटवर्क के सक्रिय सदस्यों के जरिए उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों के युवाओं को पैसे और काम का लालच देकर कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है.

अधिकारी ने कहा, “वह उन्हें पूर्व मुसलमानों, हिंदू धार्मिक नेताओं, राजनेताओं और पुलिसकर्मियों को धमकाने और मारने के लिए उकसा रहा है. साथ ही BJP/RSS के दफ्तरों, पुलिस स्टेशनों और दूसरे संवेदनशील ठिकानों पर बम, ग्रेनेड और पेट्रोल बम से हमला करने के लिए भी उकसाया जा रहा है, ताकि आम लोगों में डर और आतंक पैदा किया जा सके.”

अधिकारी ने कहा कि SBN के सक्रिय सदस्य सबसे पहले इन गुमराह युवाओं को रेकी, आगजनी, धमकी देने, ‘जिहादी’ पोस्टर लगाने और पेट्रोल बम फेंकने जैसी छोटी आतंकी गतिविधियों में शामिल करते हैं. “इन छोटी आतंकी गतिविधियों के बाद उन्हें बड़े आतंकी हमले करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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