नई दिल्ली: एक सोच-समझकर बनाए गए कदम के तहत, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद शनिवार देर रात BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे. उनके भारत पहुंचने से कुछ घंटे पहले अबू धाबी के क्राउन प्रिंस नई दिल्ली से रवाना हुए थे. सऊदी विदेश मंत्री यहां पहुंचने वाले आखिरी नेता थे और उन्होंने रविवार को हुए आउटरीच शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया.
सऊदी अरब ने अभी तक BRICS के सदस्यों को आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि वह सदस्यता स्वीकार कर रहा है या नहीं. लेकिन उसे इस समूह की सभी बैठकों और वर्किंग ग्रुप्स में बुलाया जाता है.
क्षेत्रीय संघर्षों और यमन तथा सूडान को लेकर अलग-अलग रुख के बीच, UAE और सऊदी अरब कई मुद्दों पर एक जैसी राय नहीं रखते. दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं और महत्वाकांक्षाओं के कारण कई मामलों में उनके रुख अलग-अलग रहे हैं.
हालांकि, दोनों देश गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, अरब लीग और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सदस्य बने हुए हैं. दोनों देश अमेरिका के सहयोगी हैं और आंतरिक मतभेदों के बावजूद दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए.
दिल्ली में एक दिलचस्प बात यह रही कि अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की. यह अमेरिका/इज़राइल-इरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों की पहली मुलाकात थी.
बाद में पेजेशकियन ने भारतीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान को संयुक्त अरब अमीरात से कोई समस्या नहीं है. उनकी समस्या क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से है, जिनका इस्तेमाल तेहरान पर हमले करने के लिए किया जा रहा है.
युद्ध शुरू होने के बाद से किसी भी सऊदी अधिकारी ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात नहीं की है. दोनों देशों के बीच आखिरी मुलाकात 2025 में हुई थी, जब रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ईरान गए थे और आयतुल्लाह से मिले थे. इससे पहले 2023 में दोनों देशों ने अपने संबंध फिर से बहाल किए थे.
#WATCH | Delhi: Crown Prince of Abu Dhabi, Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan departs from India after BRICS Summit 2026. pic.twitter.com/cw3XPOlTTz
— ANI (@ANI) September 12, 2026
BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा हासिल करने में भी सफल रहा. इसमें गाजा में युद्ध और पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक संघर्ष की निंदा की गई, लेकिन किसी का नाम नहीं लिया गया. इससे पहले मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर भाषा पर मतभेदों के कारण कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था.
Warmly welcome Minister of Foreign Affairs of the Kingdom of Saudi Arabia, Prince Faisal bin Farhan Al Saud @FaisalbinFarhan for the 18th BRICS Summit in New Delhi.
India looks forward to his participation and to further deepening cooperation among BRICS partners towards a more… pic.twitter.com/xzxthFWBvK
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 12, 2026
सऊदी अरब और UAE के बीच मतभेद ऊर्जा क्षेत्र में भी देखने को मिले हैं. UAE ने 2026 में घोषणा की कि वह मई में ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) से बाहर हो जाएगा. तेल उत्पादन की नीति को लेकर कई सालों से मतभेद चल रहे थे और क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े व्यापक तनाव भी इसके पीछे थे.
फिर भी, इस प्रतिद्वंद्विता ने दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ एकजुटता दिखाने से नहीं रोका है. शनिवार को UAE ने इराकी और हूती हमले के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया.
अमीरात के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “इराकी क्षेत्र से किए गए ड्रोन हमले सऊदी अरब की संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं और उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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