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Sunday, 13 September, 2026
होमराजनीति‘भारत की विविधता क्यों छिपाई?’ :BRICS में वेज खाने को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

‘भारत की विविधता क्यों छिपाई?’ :BRICS में वेज खाने को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में पीएम मोदी द्वारा आयोजित डिनर में शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, जिनमें खांडवी मिल, खुम्ब गलोटी, पनीर लबाबदार, मिलेट पुलाव आदि शामिल थे.

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नई दिल्ली: इस वीकेंड राजधानी में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में पूरी तरह शाकाहारी खाना परोसे जाने को लेकर विपक्षी नेताओं ने भारत सरकार की आलोचना की है. इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग समेत कई बड़े विश्व नेता शामिल हुए थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मेहमानों पर शाकाहारी खाना थोप रही थी और मेन्यू में मांसाहारी खाना शामिल न करके भारत की अलग-अलग तरह की खान-पान की संस्कृति को “छिपा” रही थी.

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि मोदी सरकार भारत की विविधता को लेकर “शर्मिंदा” क्यों है.

उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “साथी भारतीयों पर अपनी पसंद का खाना थोपने की BJP की आदत पहले से ही बहुत परेशान करने वाली है. अब उन्होंने इसे एक कदम आगे बढ़ाते हुए दुनिया भर से आए बड़े नेताओं पर भी अपनी पसंद थोप दी है. भारत एक समृद्ध और विविधता से भरा हुआ देश है, जहां अलग-अलग तरह के खाने मिलते हैं. यहां कुछ बेहतरीन मांसाहारी व्यंजन भी हैं, जिन्हें दुनिया भर के लोग पसंद करते हैं और मजे से खाते हैं. तो फिर मोदी सरकार ने भारत की संस्कृति के इस हिस्से को छिपाने का फैसला क्यों किया? क्या वह उस विविधता को लेकर शर्मिंदा है, जो भारत को भारत बनाती है?”

शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से आयोजित गाला डिनर में पूरी तरह शाकाहारी खाना परोसा गया. मेन्यू में शुरुआत में खांडवी मिलेट और खुंब गलौटी स्टार्टर के तौर पर थे. इसके बाद पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, कैरट बीन पोरियल, थक्काली बेले सारू और मिलेट पुलाव परोसे गए. मिठाई में ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी और शहतूत फिरनी थी.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बिना BRICS शिखर सम्मेलन या मेन्यू का नाम लिए सरकार पर तंज किया. उन्होंने छोले भटूरे की एक तस्वीर पोस्ट की और कैप्शन में लिखा, “रिकॉर्ड के लिए: 80% भारतीय मांसाहारी हैं. भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट है. जैसे मेरी बहन के छोले भटूरे भी स्वादिष्ट हैं.”

विपक्ष के दूसरे नेताओं ने भी मांसाहारी खाना शामिल नहीं करने के फैसले की आलोचना की. इनमें तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हैं.

महुआ मोइत्रा ने X पर लिखा, “अगर मैं आने वाले BRICS नेताओं को यह सलाह दूं कि इस मेन्यू को छोड़ दें और अपनी सुरक्षा टीम को पास के करीम्स से कुछ बुर्रा कबाब लाने के लिए भेज दें, तो क्या मैं एक खराब सांसद होऊंगी?”

चतुर्वेदी ने बताया कि वह खुद शाकाहारी हैं. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में उन्हें खास तौर पर शाकाहारी खाना मांगना पड़ा है और कई बार जब उनकी पसंद के बारे में पहले से नहीं बताया गया, तो उन्हें सीमित विकल्पों से ही काम चलाना पड़ा.

उन्होंने शनिवार को X पर पोस्ट करते हुए कहा, “इसलिए हमारे मेहमानों को विकल्प दिए जाते तो अच्छा होता, खासकर हमारे ‘अतिथि देवो भव’ वाले विचार को देखते हुए. लेकिन आने वाले सभी मेहमान मेजबानी की सीमाओं को समझते हैं. बस इतना ही कहना है.”

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने शाकाहारी मेन्यू का बचाव किया. साथ ही विपक्ष पर मेहमानों को परोसे गए खाने को लेकर “राजनीति करने” का आरोप लगाते हुए पलटवार किया.

संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने X पर लिखा, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी BRICS देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है. हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण की विविधता से भरपूर हैं और जिनमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं शामिल हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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