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Saturday, 12 September, 2026
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सऊदी तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला इराक से हुआ, रियाद ने जवाबी कार्रवाई रोकी

यह हमला तब हुआ जब ईरान के समर्थक हूती विद्रोहियों ने सऊदी समर्थित सेनाओं के खिलाफ़ हमला शुरू किया, लाल सागर के द्वीपों पर पूरी तरह कब्ज़ा कर लिया और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर आगे बढ़े.

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नई दिल्ली: सऊदी अरब और इराक ने शनिवार को पुष्टि की कि रियाद की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले इराकी इलाके से किए गए थे.

बाद में रियाद ने एहतियात के तौर पर पाइपलाइन बंद कर दी. इराक़ के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने ईरान की सीमा से सटे मयसान प्रांत में सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार क्षेत्रीय ऑपरेशन कमांडर को हटा दिया.

सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया. सऊदी अधिकारी के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर कि भाई देश इराक की सरकार को अपने इलाके से सऊदी अरब और पड़ोसी देशों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए कदम उठाने का मौका दिया जाए, किंगडम ने इस समय जवाबी कार्रवाई नहीं करने और इराकी सरकार की कोशिशों का समर्थन करने का फैसला किया है.”

अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ जुलाई में हुई बैठक के बाद, जैदी ने शक्तिशाली हथियारबंद समूहों को 30 सितंबर तक निहत्था करने का वादा किया था. यही तारीख इराक से बची हुई अमेरिकी नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना की वापसी के लिए भी तय की गई थी.

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब से लाल सागर के बंदरगाह यानबू तक जाती है. इसे फारस की खाड़ी के रास्ते कच्चा तेल भेजने के विकल्प के तौर पर बनाया गया था.

हर दिन करीब 60-70 लाख बैरल कच्चा तेल बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. इसमें से लगभग आधा सऊदी तेल होता है, जिसे लाल सागर के तट पर यानबू से लोड किया जाता है. बाकी तेल रूस का होता है, जो भारत की ओर जाता है. कुछ छोटी खेपें चीन भी जाती हैं.

पाइपलाइन पर हमला ऐसे समय हुआ जब ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ हमला तेज कर दिया था. हूतियों ने लाल सागर के सभी द्वीपों पर कब्जा कर लिया और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर आगे बढ़ रहे थे. यह एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है.

हमलों और अब यमन में हूतियों के नियंत्रण की वजह से ईरान और उसके समर्थक अब अरब प्रायद्वीप के दोनों तरफ पश्चिमी जहाजों के लिए दो महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर नियंत्रण हासिल करने के और करीब आ गए हैं. ये दो रास्ते हैं. लाल सागर के दक्षिणी छोर पर बाब अल-मंदेब और दूसरा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज.

खाड़ी से होने वाले ऊर्जा निर्यात के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा महत्वपूर्ण है. ईरान पहले भी ऐसे कदम उठा चुका है, जिनसे इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी. इससे यह चिंता बढ़ गई है कि अगर टकराव लंबे समय तक चलता है, तो दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है.

खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने यानबू पर अपनी निर्भरता बढ़ा दी है. केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, जून में लाल सागर के इस टर्मिनल से करीब 41.4 लाख बैरल तेल रोजाना निर्यात हुआ. यह काफी बड़ी मात्रा थी, जो पहले सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित रास तनुरा से भेजी जाती थी.

हूती अधिकारियों ने अपने सैन्य अभियान को अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़े हमले से अलग बताने की कोशिश की है. इस आंदोलन के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने X पर कहा कि लाल सागर और बाब अल-मंदेब के रास्ते जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षित बना हुआ है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हूती हमले जारी रहेंगे, जिन्हें यह समूह यमन के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का जवाब बताता है.

हालांकि, सऊदी झंडे वाले और सऊदी से जुड़े जहाजों पर हूतियों की पहले घोषित पाबंदी लागू रही. इससे पश्चिम एशिया में एक नया युद्ध मोर्चा खुल गया है, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने हूतियों से सीधे सऊदी अरब पर हमले बढ़ाने को कहा था. इसके बदले ईरान ने अतिरिक्त पैसा, हथियार और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मदद देने का वादा किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के अधिकारी सैन्य अभियानों की निगरानी के लिए यमन भी गए थे.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को दो बार फोन किया. यह फोन हूतियों के यमनी बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने के बाद किया गया था. उन्होंने अमेरिका से हूती ठिकानों पर हमले करने की मांग की. लेकिन Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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