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Saturday, 12 September, 2026
होमविदेशBRICS घोषणा पर बनी सहमति: पश्चिम एशिया में 'बिना उकसावे की आक्रामकता' की निंदा पर सभी देश एकमत

BRICS घोषणा पर बनी सहमति: पश्चिम एशिया में ‘बिना उकसावे की आक्रामकता’ की निंदा पर सभी देश एकमत

संयुक्त घोषणापत्र के लिए बातचीत चार दिनों से ज़्यादा समय तक चली. अंतिम दस्तावेज़ की घोषणा शाम करीब 4 बजे होने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली: सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया है कि BRICS नेताओं की घोषणा पर सहमति बन गई है. सबसे बड़ी रुकावट पश्चिम एशिया को लेकर भाषा पर थी. इसे भी दूर कर लिया गया है. सभी सदस्य देश ‘बिना उकसावे की आक्रामकता’ के सभी रूपों की ‘निंदा’ करने पर सहमत हो गए हैं.

BRICS के शेरपाओं ने शनिवार सुबह जल्दी ही सहमति बना ली. इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी में चार दिनों से ज्यादा समय तक बातचीत चली.

सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि नेताओं की घोषणा शाम करीब 4 बजे जारी होने की संभावना है. हालांकि, दस्तावेज के अंतिम रूप को लेकर बातचीत अभी भी चल रही है.

इसमें किसी खास देश की निंदा नहीं की जाएगी. हालांकि, भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान पहले हुई बैठकों में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दोनों ने ऐसी भाषा शामिल करने पर जोर दिया था.

दिप्रिंट ने सबसे पहले खबर दी थी कि शेरपा अंतिम भाषा पर बातचीत कर रहे थे. इसमें किसी खास देश का नाम लिए बिना बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया जा रहा था. लगता है कि यह तरीका सफल रहा है. सूत्रों ने पुष्टि की है कि सभी देश इस पर सहमत हैं.

BRICS शिखर सम्मेलन शनिवार से शुरू हो रहा है. इसका पहला सत्र दोपहर 3 बजे शुरू होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्र में अपने संबोधन के दौरान सहमति की घोषणा कर सकते हैं. पश्चिम एशिया और दूसरे संघर्ष यानी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भाषा में भारत की यह मजबूत स्थिति शामिल होने की संभावना है कि आगे बढ़ने का रास्ता ‘बातचीत और कूटनीति’ ही है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर वी. पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन उन राष्ट्राध्यक्षों में शामिल हैं, जो नई दिल्ली BRICS शिखर सम्मेलन में मौजूद हैं.

संयुक्त घोषणा पर बातचीत का सफलतापूर्वक पूरा होना इस तरह का पहला मामला है, जिसमें ईरान और UAE दोनों पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भाषा पर सहमत हुए हैं. संगठन के तौर पर BRICS ने अब तक पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर कोई बयान जारी नहीं किया है. यह युद्ध फरवरी के आखिरी दिन अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ था. मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में भी पश्चिम एशिया पर अंतिम भाषा को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी. ईरान ने दो-राज्य समाधान से जुड़े पैराग्राफ को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

मोदी ने शुक्रवार शाम पेजेश्कियन के साथ द्विपक्षीय बैठक की. इसमें भारतीय प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्रों में स्वतंत्र आवाजाही और व्यापार सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया. यह बात ईरान द्वारा फिलहाल बंद किए गए होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में कही गई.

मोदी ने शनिवार को UAE के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की.

पेजेश्कियन और अमीरात के क्राउन प्रिंस दोनों ने भारत की अध्यक्षता में BRICS के भीतर दिखाई दे रहे सहयोग का स्वागत किया.

भारत के लिए BRICS के भीतर सहमति बनाना उसकी कूटनीतिक ताकत का एक महत्वपूर्ण संकेत है. नई दिल्ली ने पिछले कुछ हफ्तों में रूस और यूक्रेन दोनों से लगभग आधे दशक से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत करने की अपील की है. भारत की कोशिश चल रहे वैश्विक संघर्षों में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका बनाने की है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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