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Saturday, 12 September, 2026
होममत-विमतरेप की सजा, हत्या के मामलों में अपील लंबित: राम रहीम के बचाव में डेरा का फुल-पेज विज्ञापन

रेप की सजा, हत्या के मामलों में अपील लंबित: राम रहीम के बचाव में डेरा का फुल-पेज विज्ञापन

दो अख़बारों में इस गुट का अभियान पैरोल और फ़र्लो का बचाव करता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में उसके बरी होने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपीलें अभी भी लंबित हैं.

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गुरुग्राम: डेरा सच्चा सौदा और उसके विवादित प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर खबरों में हैं. इस बार वजह है एक पूरे पन्ने का विज्ञापन.

दो अखबार—द हिंदू और दैनिक भास्कर—में यह विज्ञापन छपा, जिसमें डेरा ने राम रहीम का बचाव किया और उन पर लगे कई आरोपों को गलत बताया. वहीं, उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले अभी भी अदालतों में चल रहे हैं.

हालांकि, विज्ञापन में एक डिस्क्लेमर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि दोनों अखबारों का इस सामग्री से कोई संपादकीय या पत्रकारिता संबंध नहीं है और इसे सिर्फ प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है.

इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है. दूसरी ओर, राम रहीम के समर्थक इन दावों को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.

विज्ञापन का शीर्षक है. ‘डेरा सच्चा सौदा क्या है? तथ्य बनाम झूठ’. यह कई हिस्सों में दिया गया है. इसमें दावा किया गया है कि इस पंथ की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना जी महाराज ने की थी और तब से इसने 7.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को नशे की लत से बाहर निकाला है.

विज्ञापन के अनुसार, राम रहीम ने 23 सितंबर, 1990 से अब तक खुद 7.5 करोड़ लोगों को नशे और बुरी आदतों से बाहर निकाला है. यह वही तारीख थी, जब उन्होंने शाह सतनाम सिंह से डेरा की जिम्मेदारी संभाली थी.

‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश हुई थी?’ नाम के एक अलग हिस्से में इसका जवाब खुद ही दिया गया है. जवाब है. ‘हां, बिल्कुल’. इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ ‘ताकतों’ ने राम रहीम को झूठे गवाहों और झूठे मामलों के जरिए फंसाने की कोशिश की. इसमें यह भी दावा किया गया है कि ये ताकतें आज भी इस झूठ को सच साबित करने की कोशिश कर रही हैं.

विज्ञापन इस दावे को आगे बढ़ाते हुए कहता है कि जैसे-जैसे डेरा का नशा विरोधी अभियान आगे बढ़ा, ड्रग माफिया और डेरा के विरोध में रहने वाली ‘ताकतें’ राम रहीम के खिलाफ हो गईं.

इसमें कहा गया है कि जब लोगों ने नशा छोड़कर ‘राम का नाम’ लेना शुरू किया, तो यह ड्रग माफिया को मंजूर नहीं था. आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राम रहीम को बम से उड़ाने की कोशिश की और उनकी जान लेने की कई बार कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए.

डेरा के अनुसार, जब यह साजिश नाकाम हो गई, तो राम रहीम के खिलाफ झूठे गवाह लाए गए और उन्हें फंसाने के लिए मामले तैयार किए गए.

विज्ञापन में एक और मुद्दे पर काफी बात की गई है. क्या राम रहीम को मिली पैरोल और फरलो VIP ट्रीटमेंट है?

इसका जवाब दिया गया है. ‘नहीं, बिल्कुल नहीं’. इसमें कहा गया है कि पैरोल कैदी अधिनियम, 1894 और हरियाणा सरकार के मौजूदा नियमों के तहत सख्ती से दी गई हैं.

पिछले महीने बलात्कार के दोषी राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर बाहर आने की अनुमति मिली थी. इस साल यह तीसरी बार था और 2017 में दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 9 साल में कुल मिलाकर 17वीं बार था. डेरा प्रमुख 20 साल की सजा काट रहा है.

डेरा ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का हवाला दिया है, जिनमें पैरोल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज किया गया था. डेरा ने इस नतीजे को इस तरह बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को सही माना है.

विज्ञापन के अलग-अलग हिस्सों में डेरा की मानवीय गतिविधियों की भी जानकारी दी गई है. इसमें 35 करोड़ 40 लाख पेड़ लगाने, 36 मेट्रो शहरों में सफाई अभियान चलाने, 33.85 लाख यूनिट खून दान करने और जरूरतमंद लोगों के लिए 2,368 मुफ्त घर बनाने का दावा किया गया है.

मामले अभी भी लंबित हैं

दो महिला शिष्याओं से बलात्कार के मामले में राम रहीम की सजा का जिक्र विज्ञापन में नहीं किया गया है. दो अन्य बड़े मामलों की स्थिति विज्ञापन में बताए गए दावे से अलग तस्वीर दिखाती है.

2002 में पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में एक विशेष CBI अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस साल 7 मार्च को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि CBI ने एक गवाह पर उन्हें आरोपी बताने के लिए दबाव डाला था.

छत्रपति के बेटे अंशुल ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. अगस्त में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस अपील को नवंबर में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. कोर्ट ने कहा कि इस बरी किए जाने के फैसले पर विचार करने की जरूरत है और यह मामला सिर्फ बरी किए जाने के खिलाफ अपील का नहीं, बल्कि पहले हुई सजा को पलटने का मामला है.

अब तक CBI ने राम रहीम को छत्रपति हत्या मामले में बरी किए जाने के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की है.

जहां तक 2002 में डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या का मामला है, हाई कोर्ट ने मई 2024 में राम रहीम और चार अन्य लोगों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने CBI की जांच को ‘दोषपूर्ण और अधूरी’ बताया था.

जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस बरी किए जाने के खिलाफ CBI की अपील पर नोटिस जारी किया था. इसके बाद से इस मामले की सुनवाई नहीं हुई है.

एक अलग मामले में डेरा के करीब 400 अनुयायियों को कथित तौर पर जबरन नपुंसक बनाए जाने की जांच अभी भी पंचकूला की विशेष CBI अदालत में चल रही है. CBI ने राम रहीम और दो डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें छह पीड़ितों और 58 गवाहों का जिक्र किया गया था.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील रविंदर धुल ने विज्ञापन के समय और उसके मकसद पर सवाल उठाए.

रविंदर धुल ने दिप्रिंट से कहा, “राम रहीम एक दोषी है और अपनी शिष्याओं से बलात्कार के मामले में जेल की सजा काट रहा है. यहां तक कि जिन हत्या के मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था और बाद में हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था, उनमें भी पत्रकार राम चंदर छत्रपति मामले और रणजीत सिंह हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील अभी लंबित है.”

हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि डेरा प्रमुख पर जबरन नपुंसक बनाए जाने वाले मामले में भी मुकदमा चल रहा है.

उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में ऐसा विज्ञापन अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है और लंबित मामलों में अदालतों को प्रभावित करने की कोशिश माना जा सकता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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