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Monday, 28 September, 2026
होमविदेशUNGA में बयानबाजी के कुछ दिन बाद SCO की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल

UNGA में बयानबाजी के कुछ दिन बाद SCO की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व MEA के जॉइंट सेक्रेटरी (मल्टीलेटरल इकोनॉमिक रिलेशंस) आलोक डिमरी कर रहे हैं. यह बैठक पाकिस्तान की 2026-27 SCO अध्यक्षता की शुरुआत है.

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नई दिल्ली: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक-दूसरे पर बयानबाजी के कुछ दिन बाद भारत और पाकिस्तान एक बार फिर एक ही सम्मेलन कक्ष में हैं. इस बार दोनों देश इस्लामाबाद में अगले साल होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की तैयारियां शुरू करने के लिए साथ आए हैं. यह सम्मेलन पाकिस्तान की राजधानी में होना है.

SCO के काउंसिल ऑफ नेशनल कोऑर्डिनेटर्स की पहली बैठक में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय (MEA) के मल्टीलेटरल इकोनॉमिक रिलेशंस विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी आलोक डिमरी कर रहे हैं. वह SCO में भारत के नेशनल कोऑर्डिनेटर भी हैं.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिन की इस बैठक के लिए सोमवार सुबह ही इस्लामाबाद पहुंच गया.

तीन दिन चलने वाली यह बैठक बुधवार तक चलेगी. यह संगठन की 2026-27 की पाकिस्तान की अध्यक्षता की शुरुआत है. पाकिस्तान ने 1 सितंबर को किर्गिस्तान से SCO की अध्यक्षता संभाली थी.

कोऑर्डिनेटर्स की यह बैठक मुख्य कार्यक्रम की तैयारी का आधार तैयार करती है. मुख्य कार्यक्रम SCO के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन होगा, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान अगस्त 2027 में करने वाला है. समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सभी सदस्य देशों के नेताओं को इसमें आमंत्रित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं.

पाकिस्तान ने शिखर सम्मेलन की थीम रखी है- “विजन को एक्शन में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि.”

2025 के शिखर सम्मेलन में तियानजिन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. इसमें 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई थी. प्रधानमंत्री मोदी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे. उन्होंने सदस्य देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया था. उन्होंने कहा था कि आतंकवाद से निपटने में “कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए” और समूह से उन देशों को जवाबदेह ठहराने की अपील की थी जो सीमा पार आतंकवाद को अंजाम देते हैं या उसका समर्थन करते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच करीब एक दशक से कोई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है. दोनों देशों के बीच बातचीत की आखिरी कोशिश दिसंबर 2015 में हुई थी. तब तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस्लामाबाद गई थीं. दोनों देशों ने “कॉम्प्रिहेंसिव बाइलैटरल डायलॉग” फिर से शुरू करने की कोशिश की थी.

हालांकि, जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बाद यह प्रक्रिया रुक गई.

पाकिस्तान फिलहाल संगठन के रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर यानी RATS की भी अध्यक्षता कर रहा है. भारत लंबे समय से इस संस्था को लेकर कुछ संदेह रखता रहा है. इसकी वजह दिल्ली के ये आरोप हैं कि इस्लामाबाद उन आतंकवादियों को पनाह देता है जो भारत को निशाना बनाते हैं.

दोनों देश 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने थे. तब से भारतीय अधिकारी और सैन्यकर्मी संगठन की सीमा सुरक्षा से जुड़ी बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं.

उदाहरण के लिए, जुलाई 2026 में भारत ने इस्लामाबाद में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सीमा सुरक्षा सेवाओं के प्रमुखों की 12वीं बैठक में हिस्सा लिया था.

अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर SCO के शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस्लामाबाद गए थे. करीब नौ साल में यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की पाकिस्तान की पहली यात्रा थी. इस साल जुलाई में भी एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान की राजधानी में संगठन की सीमा सुरक्षा सेवा प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लिया था.

भारत और पाकिस्तान 2017 में SCO में शामिल हुए थे.

इस साल SCO के राष्ट्राध्यक्षों का मुख्य शिखर सम्मेलन अगस्त में किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक में हुआ था. प्रधानमंत्री मोदी इस बैठक में शामिल हुए थे.

पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के शहर तियानजिन गए थे. उन्होंने शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी.

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी. इसे मुख्य रूप से क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने और उन तीन चीजों से निपटने के लिए बनाया गया था, जिन्हें इसके सदस्य “तीन बुराइयां” कहते हैं. इनमें आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद शामिल हैं.

भारत 2005 में SCO में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुआ था और 2017 में कजाकिस्तान के अस्ताना में हुए शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के साथ पूर्ण सदस्य बना. इसके बाद समूह बढ़कर 10 स्थायी सदस्यों वाला संगठन हो गया, जिसमें ईरान और बेलारूस भी शामिल हैं.

SCO का दायरा यूरेशिया के करीब 60 प्रतिशत हिस्से और दुनिया की 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी तक फैला हुआ है. कुछ विश्लेषक इसे NATO के मुकाबले एक संतुलन बनाने वाले संगठन के तौर पर देखते हैं. इसके एजेंडे में सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग शामिल हैं.

SCO का मुख्यालय बीजिंग में है, जबकि RATS उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से काम करता है. 2025 में तियानजिन शिखर सम्मेलन के दौरान SCO ने सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए एक यूनिवर्सल सेंटर और एक एंटी-ड्रग सेंटर बनाने पर भी सहमति जताई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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